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Delhi News: तीन साल की बच्ची को किया अगवा, तीन आरोपी गिरफ्तार
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उत्तरी जिला पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की मदद से बच्ची को ढूंढा
नेपाल में बच्ची को बेचने का था इरादा, सभी आरोपी भीख मांगने का करते हैं काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने अगवा तीन साल की बच्ची को सुरक्षित ढूंढ लिया है। पुलिस ने बच्ची को अगवा करने वाली महिला समेत एक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। परिवार भीख मांगने का काम करता है।
पुलिस ने इनके परिवार के दो मासूमों को भी बचाया है, जिनसे परिवार भीख मंगवा रहा था। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर ऐसे गैंग के सदस्यों का पता लगा रही है। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने बताया कि 12 जनवरी को कश्मीरी गेट थाना पुलिस को तीन साल की बच्ची को अगवा किए जाने की शिकायत मिली। कश्मीरी गेट इलाके में दुकान करने वाले बच्ची के पिता मुजफ्फर अली ने बताया कि वह सुंदर नगरी में रहते हैं। उनकी पत्नी का निधन हो गया है। बच्ची का देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए वह अपनी बेटी को दुकान पर लाता था। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया।
थाना प्रभारी प्रशांत यादव के नेतृत्व में पुलिस ने कई टीमें गठित कर बच्ची की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरे की जांच की। फुटेज में बच्ची को छह-सात साल की एक अन्य बच्ची के साथ जाते देखा। उसने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास बच्ची को परिवार वालों को सौंप दिया। इसके बाद बच्ची को अगवा करने वाले परिवार भीड़ में गायब हो गया। काफी प्रयास के बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। उसके बाद पुलिस ने 100 पुलिसकर्मियों की कई अतिरिक्त टीमें बनाईं और सभी को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन सहित सब्जी मंडी, शाहदरा और साहिबाबाद रेलवे स्टेशन और आसपास इलाके में लगा दिया। इन इलाकों में लगे करीब 400 सीसीटीवी फुटेज की जांच की।
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सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से मिला सुराग
एक फुटेज में महत्वपूर्ण सुराग पुलिस के हाथ लगा। बच्ची को अगवा करने वाले परिवार की एक छोटी सी झलक दिखी। फुटेज में आरोपी परिवार पुराने पुल पर एक ई-रिक्शा में यात्रा करता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम सीसीटीवी कैमरे के जरिए आरोपियों का 12 किलोमीटर तक पीछा करते हुए वेलकम इलाके में पहुंची, जहां वह पूरी रात गुप्त रूप से तैनात रहे। इस दौरान पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ कर साक्ष्य हासिल किए। आखिरकार पुलिस ने 17 जनवरी को यमुना बाजार हनुमान मंदिर के पास से तीन आरोपियों और दो नाबालिगों को पकड़ लिए। आरोपियों की पहचान सीलमपुर निवासी नजीमा, उसके पति अनीस और दामाद शमशाद आलम के रूप में हुई। जबकि परिवार के सात और दस साल के दो बच्चों को पकड़ा। जांच में पता चला कि सभी आरोपी किशनगंज बिहार के रहने वाले हैं।
बच्ची को बेचने के इरादे से किया था अगवा
पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी परिवार भीडभाड़ वाले बाजारों और धार्मिक जगहों पर भीख मांगता था। 12 जनवरी को परिवार ने कश्मीरी गेट ऑटो पार्ट्स मार्केट में भीख मांगते समय बच्ची को अकेले खेलते देखा। आरोपियों ने अपने परिवार के एक नाबालिग सदस्य को बच्ची को रेलवे स्टेशन लाने के लिए कहा। नाबालिग उसे अपने साथ ले गई। वारदात को अंजाम देने के बाद परिवार ने उसी रात अपना किराए का घर भी बदल लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका मकसद बच्ची को बेचकर पैसा कमाना था। उन लोगों ने बच्ची की तस्करी नेपाल में करने की योजना बनाई थी। वह उसे किसी निः संतान दंपती को बेचना चाहते थे।
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नेपाल में बच्ची को बेचने का था इरादा, सभी आरोपी भीख मांगने का करते हैं काम
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। कश्मीरी गेट थाना पुलिस ने अगवा तीन साल की बच्ची को सुरक्षित ढूंढ लिया है। पुलिस ने बच्ची को अगवा करने वाली महिला समेत एक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है। परिवार भीख मांगने का काम करता है।
पुलिस ने इनके परिवार के दो मासूमों को भी बचाया है, जिनसे परिवार भीख मंगवा रहा था। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर ऐसे गैंग के सदस्यों का पता लगा रही है। उत्तरी जिला पुलिस उपायुक्त राजा बांठिया ने बताया कि 12 जनवरी को कश्मीरी गेट थाना पुलिस को तीन साल की बच्ची को अगवा किए जाने की शिकायत मिली। कश्मीरी गेट इलाके में दुकान करने वाले बच्ची के पिता मुजफ्फर अली ने बताया कि वह सुंदर नगरी में रहते हैं। उनकी पत्नी का निधन हो गया है। बच्ची का देखभाल करने वाला कोई नहीं है, इसलिए वह अपनी बेटी को दुकान पर लाता था। पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज किया।
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थाना प्रभारी प्रशांत यादव के नेतृत्व में पुलिस ने कई टीमें गठित कर बच्ची की तलाश के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरे की जांच की। फुटेज में बच्ची को छह-सात साल की एक अन्य बच्ची के साथ जाते देखा। उसने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पास बच्ची को परिवार वालों को सौंप दिया। इसके बाद बच्ची को अगवा करने वाले परिवार भीड़ में गायब हो गया। काफी प्रयास के बाद उनका कोई सुराग नहीं मिला। उसके बाद पुलिस ने 100 पुलिसकर्मियों की कई अतिरिक्त टीमें बनाईं और सभी को पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन सहित सब्जी मंडी, शाहदरा और साहिबाबाद रेलवे स्टेशन और आसपास इलाके में लगा दिया। इन इलाकों में लगे करीब 400 सीसीटीवी फुटेज की जांच की।
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सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से मिला सुराग
एक फुटेज में महत्वपूर्ण सुराग पुलिस के हाथ लगा। बच्ची को अगवा करने वाले परिवार की एक छोटी सी झलक दिखी। फुटेज में आरोपी परिवार पुराने पुल पर एक ई-रिक्शा में यात्रा करता हुआ दिखाई दिया। पुलिस टीम सीसीटीवी कैमरे के जरिए आरोपियों का 12 किलोमीटर तक पीछा करते हुए वेलकम इलाके में पहुंची, जहां वह पूरी रात गुप्त रूप से तैनात रहे। इस दौरान पुलिस ने स्थानीय लोगों से पूछताछ कर साक्ष्य हासिल किए। आखिरकार पुलिस ने 17 जनवरी को यमुना बाजार हनुमान मंदिर के पास से तीन आरोपियों और दो नाबालिगों को पकड़ लिए। आरोपियों की पहचान सीलमपुर निवासी नजीमा, उसके पति अनीस और दामाद शमशाद आलम के रूप में हुई। जबकि परिवार के सात और दस साल के दो बच्चों को पकड़ा। जांच में पता चला कि सभी आरोपी किशनगंज बिहार के रहने वाले हैं।
बच्ची को बेचने के इरादे से किया था अगवा
पूछताछ के दौरान पता चला कि आरोपी परिवार भीडभाड़ वाले बाजारों और धार्मिक जगहों पर भीख मांगता था। 12 जनवरी को परिवार ने कश्मीरी गेट ऑटो पार्ट्स मार्केट में भीख मांगते समय बच्ची को अकेले खेलते देखा। आरोपियों ने अपने परिवार के एक नाबालिग सदस्य को बच्ची को रेलवे स्टेशन लाने के लिए कहा। नाबालिग उसे अपने साथ ले गई। वारदात को अंजाम देने के बाद परिवार ने उसी रात अपना किराए का घर भी बदल लिया। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि उनका मकसद बच्ची को बेचकर पैसा कमाना था। उन लोगों ने बच्ची की तस्करी नेपाल में करने की योजना बनाई थी। वह उसे किसी निः संतान दंपती को बेचना चाहते थे।