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स्वीकार होने के बाद इस्तीफा देने वाला इसे वापस लेने की मांग नहीं कर सकता
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नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति द्वारा दिया इस्तीफा एक बार स्वीकार होने के बाद वह इसे वापस लेने की मांग नहीं कर सकता।
न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने याचिकाकर्ता मोहरम अली खान के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उन्हें जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय द्वारा उनके इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए जारी आदेश प्राप्त नहीं हुआ क्योंकि ऐसा आदेश याचिकाकर्ता के अनुरोध के अनुसार जारी किया गया था।
अदालत ने कहा किसी भी मामले में यदि असाधारण अवकाश (ईओएल) के लिए याचिकाकर्ता के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था, तो वह सऊदी अरब में कार्यभार ग्रहण करने के लिए विश्वविद्यालय नहीं छोड़ सकता था। सऊदी जाने से पहले उसे कम से कम अपने इस्तीफे के बारे में पूछताछ करनी चाहिए थी। स्वीकृत इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता।
याचिकाकर्ता जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (जेएमआई) में गणित के प्रोफेसर थे। उन्होंने सऊदी अरब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने जामिया से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ या असाधारण अवकाश (ईओएल) मांगा था। हालांकि, अनुरोध को विश्वविद्यालय ने 20 अगस्त, 2010 को एक पत्र के माध्यम से खारिज कर दिया।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने तब जामिया के कुलपति से बात की, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि ईओएल के उनके अनुरोध पर अनुकूल विचार किया जाएगा। याची ने कहा उक्त आश्वासन पर भरोसा करते हुए उसने किंग अब्दुल अजीज विश्वविद्यालय में एक वर्ष के लिए अनुबंध पर नौकरी ज्वाइन कर ली।
याची ने कहा सऊदी अरब में एक साल पूरा करने के बाद, वह 25 अगस्त, 2011 को भारत वापस आया और जामिया विश्वविद्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट किया। लेकिन विश्वविद्यालय ने फिर से ड्यूटी देने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।
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न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव ने याचिकाकर्ता मोहरम अली खान के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि उन्हें जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय द्वारा उनके इस्तीफे को स्वीकार करने के लिए जारी आदेश प्राप्त नहीं हुआ क्योंकि ऐसा आदेश याचिकाकर्ता के अनुरोध के अनुसार जारी किया गया था।
अदालत ने कहा किसी भी मामले में यदि असाधारण अवकाश (ईओएल) के लिए याचिकाकर्ता के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया गया था, तो वह सऊदी अरब में कार्यभार ग्रहण करने के लिए विश्वविद्यालय नहीं छोड़ सकता था। सऊदी जाने से पहले उसे कम से कम अपने इस्तीफे के बारे में पूछताछ करनी चाहिए थी। स्वीकृत इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता।
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याचिकाकर्ता जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (जेएमआई) में गणित के प्रोफेसर थे। उन्होंने सऊदी अरब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था। उन्होंने जामिया से ‘अनापत्ति प्रमाण पत्र’ या असाधारण अवकाश (ईओएल) मांगा था। हालांकि, अनुरोध को विश्वविद्यालय ने 20 अगस्त, 2010 को एक पत्र के माध्यम से खारिज कर दिया।
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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि उन्होंने तब जामिया के कुलपति से बात की, जिन्होंने उन्हें आश्वासन दिया कि ईओएल के उनके अनुरोध पर अनुकूल विचार किया जाएगा। याची ने कहा उक्त आश्वासन पर भरोसा करते हुए उसने किंग अब्दुल अजीज विश्वविद्यालय में एक वर्ष के लिए अनुबंध पर नौकरी ज्वाइन कर ली।
याची ने कहा सऊदी अरब में एक साल पूरा करने के बाद, वह 25 अगस्त, 2011 को भारत वापस आया और जामिया विश्वविद्यालय में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट किया। लेकिन विश्वविद्यालय ने फिर से ड्यूटी देने के उनके अनुरोध को अस्वीकार कर दिया।