दिल्ली: भाजपा सांसद हंस राज हंस को कोर्ट से बड़ी राहत, चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के मामले में हुए बरी
हंस राज हंस पर 2019 के चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने का आरोप लगा था। अदालत ने इस मामले में आज उन्हें बरी कर दिया है।
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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा सांसद हंस राज हंस को अपने नामांकन पत्र में गलत जानकारी देने के मामले में राहत प्रदान करते हुए बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि सांसद के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए कोई आधार नहीं है। उन्होंने नामांकन के दौरान कोई गलत जानकारी नहीं दी और न ही तथ्यों को छिपाया।
राउज एवेन्यू कोर्ट के अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी धर्मेन्द्र सिंह ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष हंस राज हंस पर 2019 के चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने का आरोप साबित नहीं कर पाया। ऐसे में वे उनके खिलाफ सुनवाई बंद कर रहे हैं।
हंस के खिलाफ कांग्रेस के उम्मीदवार राजेश लिलोठिया ने आरोप लगाया था कि उन्होंने अपने नामांकन के दौरान फॉर्म 26 में कई तथ्यों की गलत जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि सांसद ने अपनी शैक्षणिक योग्यता, पत्नी की वित्तीय स्थिति, उन पर निर्भर बच्चों की आय, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग में उपचेयरमैन होने की जानकारी छिपाई।
इस शिकायत के बाद अदालत ने पुलिस को जांच के आदेश दिए। हंस के खिलाफ पुलिस ने अदालत में जनप्रतिनिधि अधिनियम की धारा 125-एक के तहत आरोपपत्र दायर किया था।
सांसद की ओर से पेश अधिवक्ता रत्नेश कुमार गुप्ता व नीरज ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे व बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल ने नामांकन में शैक्षणिक योग्यता मैट्रिक बताई थी जबकि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके मुवक्किल ने डीएवी कॉलेज जालंधर से प्रेप की जो 11वीं कक्षा के समक्ष है।
उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि संबंधित कॉलेज ने इस बात से इनकार किया है कि उनके मुवक्किल ने उनके यहां से प्रेप की है। इसी प्रकार उनके मुवक्किल की पत्नी घरेलू महिला हैं और जो उन पर आयकर बकाया दिखाया गया है वह संपत्ति को बेचने पर बकाया है। उनके मुवक्किल की पत्नी न तो कोई नौकरी करती हैं न ही व्यवसाय। ऐसे में जानकारी ठीक है। इसके अलावा आश्रितों यानि दो बेटों की आय का मामला है, वे उन पर निर्भर नहीं हैं और उनकी आय का अलग स्रोत है।
उन्होंने कहा कि पुलिस जांच से स्पष्ट है कि उनके मुवक्किल ने नामांकन से पहले राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपचेयरमैन पद से अप्रैल 2019 में त्यागपत्र दे दिया था। ऐसे में नामांकन में जानकारी देना जरूरी नहीं है। ऐसे में उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।
A Delhi Court discharges BJP MP and noted Punjabi singer Hans Raj Hans in connection with a case under 'Representation of People Act' for allegedly providing ambiguous information in election affidavit
— ANI (@ANI) August 25, 2021
(file photo) pic.twitter.com/h2kOuzKZJ9