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डीयू के 85 फीसदी छात्र ओपन बुक एग्जाम के लिए तैयार नहीं
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नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) के ऑनलाइन सर्वे में लगभग 85 फीसदी छात्रों ने ओपन बुक परीक्षा के लिए तैयार नहीं होने की बात कही। 48 घंटे के ऑनलाइन सर्वे में अधिकतर छात्रों ने कहा है कि वह ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सकते।
सर्वे में 8.3 फीसदी छात्रों ने कहा कि उनके पास लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट फोन, टैब जैसी सुविधा नहीं है। वहीं 33.7 फीसदी छात्र डीयू की जूम ऑनलाइन कक्षाओं में हिस्सा नहीं ले सके।
डूटा ने ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा पर मंगलवार को जूम एप से प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें उन्होंने 23 से 25 मई तक कराये गए ऑनलाइन सर्वे के परिणाम जारी किये। दो दिन तक चले इस जनमत संग्रह में छात्रों से परीक्षा पर कुछ सवाल पूछे गए थे। मात्र 48 घंटे से कम समय में 51,452 विद्यार्थियों ने सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
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सर्वे में 85 फीसदी से ज्यादा छात्र ऐसे हैं जो किसी ना किसी परेशानी जैसे लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट फोन या नेटवर्क हो नेट की समस्या के कारण ऑनलाइन परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सकते। वहीं, 11.9 फीसदी छात्रों ने कहा कि उन्हें पढ़ने के लिए सामग्री ही नहीं मिली जबकि 38.1 फीसदी ने कहा जो ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध कराई गई वह उसका इस्तेमाल नहीं कर सके।
डूटा अध्यक्ष राजीव रे ने भी कहा कि हम छात्रों के हित के लिए ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम का सख्त विरोध करते हैं। डूटा उपाध्यक्ष डॉ आलोक रंजन पांडेय ने बताया कि सर्वे में छात्रों ने एकमत से कहा है कि वह ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा नहीं दे सकते तो दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन किस दबाव में ऐसा करना चाहता है। जब सीबीएसई जुलाई में परीक्षा कराने को तैयार है तो डीयू प्रशासन को भी जुलाई से सोशल डिसटेंसिग का ध्यान रखकर तृतीय वर्ष के छात्रों की परीक्षा करानी चाहिए क्योंकि अभी छात्र कागज कलम से ही परीक्षा देना चाहते हैं।
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सर्वे में 8.3 फीसदी छात्रों ने कहा कि उनके पास लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट फोन, टैब जैसी सुविधा नहीं है। वहीं 33.7 फीसदी छात्र डीयू की जूम ऑनलाइन कक्षाओं में हिस्सा नहीं ले सके।
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डूटा ने ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा पर मंगलवार को जूम एप से प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें उन्होंने 23 से 25 मई तक कराये गए ऑनलाइन सर्वे के परिणाम जारी किये। दो दिन तक चले इस जनमत संग्रह में छात्रों से परीक्षा पर कुछ सवाल पूछे गए थे। मात्र 48 घंटे से कम समय में 51,452 विद्यार्थियों ने सवालों पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
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सर्वे में 85 फीसदी से ज्यादा छात्र ऐसे हैं जो किसी ना किसी परेशानी जैसे लैपटॉप, डेस्कटॉप, स्मार्ट फोन या नेटवर्क हो नेट की समस्या के कारण ऑनलाइन परीक्षा में उपस्थित नहीं हो सकते। वहीं, 11.9 फीसदी छात्रों ने कहा कि उन्हें पढ़ने के लिए सामग्री ही नहीं मिली जबकि 38.1 फीसदी ने कहा जो ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध कराई गई वह उसका इस्तेमाल नहीं कर सके।
डूटा अध्यक्ष राजीव रे ने भी कहा कि हम छात्रों के हित के लिए ऑनलाइन ओपन बुक एग्जाम का सख्त विरोध करते हैं। डूटा उपाध्यक्ष डॉ आलोक रंजन पांडेय ने बताया कि सर्वे में छात्रों ने एकमत से कहा है कि वह ऑनलाइन ओपन बुक परीक्षा नहीं दे सकते तो दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन किस दबाव में ऐसा करना चाहता है। जब सीबीएसई जुलाई में परीक्षा कराने को तैयार है तो डीयू प्रशासन को भी जुलाई से सोशल डिसटेंसिग का ध्यान रखकर तृतीय वर्ष के छात्रों की परीक्षा करानी चाहिए क्योंकि अभी छात्र कागज कलम से ही परीक्षा देना चाहते हैं।