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नई शिक्षा नीति वापसी के लिए 50 दिवसीय राष्ट्रीय आंदोलन

Sat, 25 Dec 2021 01:06 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 25 Dec 2021 01:06 AM IST
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50 day national movement for return of new education policy
नई दिल्ली। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ और आइसा ने नई शिक्षा नीति 2020 के विरोध के लिए 50 दिवसीय राष्ट्रीय आंदोलन की शुक्रवार को घोषणा कर दी। इसे रोलबैक एनईपी 2020 (नई शिक्षा वापस लेने) का नाम दिया गया है। छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को नई शिक्षा नीति से होने वाले नुकसान को दर्शाने के लिए ड्रॉफ्ट भी तैयार किया गया है।
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जेएनयू छात्रसंघ और आइसा के इस शिक्षा बचाओ-देश बचाओ अभियान के समर्थन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र, शिक्षक समेत कई शिक्षाविद भी जुड़े हैं।
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छात्रसंघ के पूर्व पदाधिकारी व आइसा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एन साई बालाजी ने कहा कि नई शिक्षा नीति आम परिवारों के छात्रों के लिए नहीं है। यह अमीरों और कॉरपोरेट घरानों के शिक्षण संस्थानों और बच्चों को आगे बढ़ाने के मकसद से तैयार की गई है। यह नीति शिक्षण संस्थानों में पारंपरिक कक्षाओं में पढ़ाई की बजाय ऑनलाइन क्लासरूम को प्रमोट करने वाली है। इससे शिक्षा आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगी। इससे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इसका ताजा उदाहरण स्वयं प्लेटफार्म पर ऑनलाइन कोर्स की पढ़ाई मुख्य है।
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इस दौरान प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि आज संस्कृति और आम जीवन का भगवाकरण हो गया है। पहले जब शिक्षा में भगवाकरण की बात होती थी तब यह शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा लगता था। आज देश के सामने भगवाकरण हर क्षेत्र में है। अब शिक्षा उसका एक हिस्सा है। आजादी के बाद चिंता थी कि आपसी भाईचारा और शिक्षा कैसे बचाई जाए और आज फिर वही चिंता सता रही है। आज हम उन्हीं चुनौतियों को दोबारा झेल रहे हैं, जो आजादी के बाद थी।
जेएनयू शिक्षक संघ की पदाधिकारी व प्रोफेसर मौसमी बासू ने कहा कि सरकार शिक्षा को समाप्त कर रही है। हम सबको इसके खिलाफ मिलकर आवाज उठानी होगी। वहीं, प्रो. जितेंद्र मीना ने कहा कि पूरी नीति में एससी, एसटी, ओबीसी के लिए कोई जगह नहीं है। यह मनु स्मृति का दूसरा भाग है।

डीयू शिक्षक संघ की पूर्व अध्यक्ष प्रो. नंदिता नारायण ने कहा कि विश्वविद्यालयों में नई शिक्षा नीति लागू की जा रही है। मैसिव ऑनलाइन कोर्स अब उच्च शिक्षा में शामिल हो गया है, यह चिंता का विषय है। डीयू के प्रोफेसर रतन लाल ने कहा कि यह नेशनल एजुकेशन पॉलिसी नहीं, बल्कि एंटी नेशनल एजुकेशन पॉलिसी है।
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