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हर साल 5000 मृत जानवरों से तैयार हो रहा है पॉल्ट्री फीड
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मृत जानवरों से तैयार हो रहा है पोल्ट्री फीड
- मृत पशुओं की गाजीपुर रेंडरिंग प्लांट में वैज्ञानिक तरीके से होती है प्रोसेसिंग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में स्थित रेंडरिंग प्लांट में मृत पशुओं के अवशेष से पोल्ट्री फीड तैयार किया जा रहा है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, पूरी दिल्ली के मृत जानवरों को प्लांट में लाकर प्रोसेसिंग (प्रक्रिया) के बाद फीड व अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बृहस्पतिवार रात एनएच-9 (पूर्व में एनएच-24) पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन में करीब 50 मृत जानवरों के अवशेष मिले, जिसके बारे में एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो-तीन के दौरान मरे जानवरों को लाया गया। यानि पूरे साल के दौरान इस प्लांट में करीब 5000 मृत जानवरों से पोल्ट्री फीड तैयार किया जा रहा है।
एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, मृत जानवरों को गाजीपुर बूचड़खाने तक पहुंचाने की जिम्मेवारी एजेंसी को सौंपी गई है। प्लांट में आधुनिक मशीनों की मदद से वैज्ञानिक तरीके से पशुओं के अवशेषों को प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में दौरान प्रदूषण न हो, कंकाल की वजह से गंदगी या बदबू न फैले इसका भी खास तौर पर ध्यान रखा गया है। लेकिन हादसे के दौरान मृत पशुओं में अधिकतर बछड़े थे, जिससे सवाल उठ रहा है कि आखिरकार दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों से बछड़ों की इतनी अधिक संख्या में मौत क्यों हुई।
पशु चिकित्सा विभाग के निदेशक रामकुमार के मुताबिक, मृत जानवरों के कारण आम लोगों को किसी तरह की समस्या पेश न आए, इस लिहाज से पूरी तैयारियां हैं। इसके अवशेष से पोल्ट्री फीड भी तैयार किया जाता है। दिल्ली के सभी क्षेत्रों से मृत जानवर लाए जाते हैं ताकि इधर-उधर कंकाल न दिखे और न ही प्रदूषण को रोका जा सके। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर बिपिन बिहारी सिंह ने बताया कि प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ लोगों की सेहत का ध्यान भी रखा जाता है।
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- मृत पशुओं की गाजीपुर रेंडरिंग प्लांट में वैज्ञानिक तरीके से होती है प्रोसेसिंग
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में स्थित रेंडरिंग प्लांट में मृत पशुओं के अवशेष से पोल्ट्री फीड तैयार किया जा रहा है। निगम अधिकारियों के मुताबिक, पूरी दिल्ली के मृत जानवरों को प्लांट में लाकर प्रोसेसिंग (प्रक्रिया) के बाद फीड व अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बृहस्पतिवार रात एनएच-9 (पूर्व में एनएच-24) पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन में करीब 50 मृत जानवरों के अवशेष मिले, जिसके बारे में एमसीडी अधिकारियों का कहना है कि पिछले दो-तीन के दौरान मरे जानवरों को लाया गया। यानि पूरे साल के दौरान इस प्लांट में करीब 5000 मृत जानवरों से पोल्ट्री फीड तैयार किया जा रहा है।
एमसीडी अधिकारियों के मुताबिक, मृत जानवरों को गाजीपुर बूचड़खाने तक पहुंचाने की जिम्मेवारी एजेंसी को सौंपी गई है। प्लांट में आधुनिक मशीनों की मदद से वैज्ञानिक तरीके से पशुओं के अवशेषों को प्रोसेस किया जाता है। इस प्रक्रिया में दौरान प्रदूषण न हो, कंकाल की वजह से गंदगी या बदबू न फैले इसका भी खास तौर पर ध्यान रखा गया है। लेकिन हादसे के दौरान मृत पशुओं में अधिकतर बछड़े थे, जिससे सवाल उठ रहा है कि आखिरकार दिल्ली के अलग-अलग क्षेत्रों से बछड़ों की इतनी अधिक संख्या में मौत क्यों हुई।
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पशु चिकित्सा विभाग के निदेशक रामकुमार के मुताबिक, मृत जानवरों के कारण आम लोगों को किसी तरह की समस्या पेश न आए, इस लिहाज से पूरी तैयारियां हैं। इसके अवशेष से पोल्ट्री फीड भी तैयार किया जाता है। दिल्ली के सभी क्षेत्रों से मृत जानवर लाए जाते हैं ताकि इधर-उधर कंकाल न दिखे और न ही प्रदूषण को रोका जा सके। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर बिपिन बिहारी सिंह ने बताया कि प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ लोगों की सेहत का ध्यान भी रखा जाता है।
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