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जिंदगी के रंग : सरकारी स्कूल के 11वीं के छात्रों ने दिव्यांगों के लिए बनाई बैटरी चालित साइकिल
Thu, 17 Mar 2022 03:00 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 17 Mar 2022 03:00 AM IST
सार
बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम के तहत स्टार्टअप के लिए फंडिंग मिली। सेंसर ब्रेक होंगे, ब्रेक मारते ही इंजन बंद होगा, गति कर सकेंगे नियंत्रित।
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बैटरी से चलने वाली साइकिल के साथ छात्र...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
11वीं कक्षा में पढ़ने वाले तुषार, विवेक, मनीष, राज और अंकुश सभी दोस्त हैं और पढ़ाई में औसत हैं। इन छात्रों की कक्षा में एक दिव्यांग भी है। उसकी मांसपेशियां कमजोर हैं, इससे स्कूल आने-जाने में कठिनाई होती है। दोस्तों के इस समूह ने अपने दिव्यांग साथी की पीड़ा को गहराई तक महसूस कर ऐसी तरकीब निकाली, जिससे दिव्यांग साथी के साथ-साथ अन्य दिव्यांगों के जीवन में भी रंग भर जाएं।
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दरअसल, नेताजी नगर स्थित सर्वोदय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के छात्रों के इस समूह ने दिव्यांगों के लिए बैटरी से चलने वाली एक साइकिल तैयार की है। दिव्यांगता के आधार पर और साइकिलेें भी तैयार की जा रही हैं। मतलब जिसकी जैसी दिव्यांगता होगी, उसे उसकी सहूलियत के अनुसार ही साइकिल तैयार करके दी जाएगी।
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टीम के सदस्यों अंकुश और तुषार ने बताया कि अपने दोस्त की दिव्यांगता को देखकर पीड़ा होती थी, जब बिजनेस ब्लास्टर्स प्रोग्राम के तहत स्टार्टअप तैयार करने के लिए फंडिंग मिली, तो सोचा ऐसा कुछ तैयार किया जाए, जिससे कि दिव्यांगों की तकलीफ दूर हो सके। तब आम साइकिल को दिव्यांगों के लिए बैटरी साइकिल में बदला। अब इसे कस्टमाइज साइकिल के रूप में तैयार किया जा रहा है।
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टीम के सदस्यों ने बताया कि वह साइकिलों को दिव्यांगता के आधार पर तैयार करने में लगे हैं। इसमें सेंसर ब्रेक लगा रहे हैं। ब्रेक मारते ही इंजन बंद हो जाएगा। इंजन बंद होने से बैटरी की बचत होगी। कोई भी दिव्यांग इसकी गति को नियंत्रित कर सकेगा।
दस लाख की फंडिंग और 250 ऑर्डर मिले
स्कूल में आंत्रप्रेन्योर माइंडसेट करिकुलम (ईएमसी) कोऑर्डिनेटर नीतू शर्मा ने बताया कि साइकिल में चार हजार रुपये की किट और 1600 रुपये की बैटरी को लगाया गया है। इसकी लागत सात से आठ हजार रुपये की पड़ रही है। जैसे-जैसे इसमें दिव्यांगता के आधार पर विशेषताएं जुड़ेंगी, वैसे ही इसकी कीमत में इजाफा होगा।
बिजनेस ब्लास्टर्स एक्सपो में इस स्टार्टअप को दस लाख की फंडिंग मिली है, वहीं 250 साइकिलों के ऑर्डर मिले हैं। दिल्ली सरकार हमारी मदद कर रही है। वहां से हमें दो बिजनेस कोच व निवेश की सुविधा उपलब्ध कराने वाले मिले हैं। यह ही निवेशकों से बातचीत करेंगे। अब छात्रों की कंपनी का पंजीकरण कराया जा रहा है।
आर्ट्स स्ट्रीम के छात्रों ने दिखाया हुनर
स्कूल के प्रिंसिपल आरके मीणा ने बताया कि आर्ट्स स्ट्रीम के छात्र इस तरह की इंजीनियरिंग कर रहे हैं, यह हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। छात्रों को जिस तरह की सुविधा की जरूरत है, वह उपलब्ध कराई जा रही है।