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दिल्ली : इंडिया आर्ट फेस्टिवल में 0.2 मिमी आकार के बर्तन बने आकर्षण का केंद्र, कल तक है देखने का मौका
Sat, 09 Apr 2022 05:35 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 09 Apr 2022 05:35 AM IST
सार
गुरुग्राम की बीनू ने पॉलीमर पॉटरी से निर्मित 100 से ज्यादा सूक्ष्म बर्तनों की कलाकृतियों को यहां प्रदर्शित किया है। इनकी कीमत 500 रुपये से कई हजार रुपये तक है। इंडिया आर्ट फेस्टिवल में दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, नोएडा, उदयपुर, हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु जैसे अनगिनत शहरों से आए ऐसे ही एक से बढ़कर एक कलाकारों ने कला की प्रदर्शनी लगाई है। कांस्टीट्यूशन क्लब में 10 अप्रैल तक आयोजित होने वाले फेस्टिवल में विविध तरह की कला और आत्मनिर्भर भारत की झलक देखी जा सकती है।
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आकर्षण का केंद्र
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हम सबने अभी तक कितने छोटे बर्तन देखे होंगे, ये सवाल इसलिए किया गया है, क्योंकि इंडिया आर्ट फेस्टिवल में 0.2 मिलीमीटर आकार के बर्तन उपलब्ध हैं। चाक पर तैयार किए गए इन बर्तनों को बड़े ध्यान से देखना पड़ता है, इसलिए यहां इन्हें देखने के लिए लेंस का इंतजाम किया गया है।
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गुरुग्राम की बीनू ने पॉलीमर पॉटरी से निर्मित 100 से ज्यादा सूक्ष्म बर्तनों की कलाकृतियों को यहां प्रदर्शित किया है। इनकी कीमत 500 रुपये से कई हजार रुपये तक है। इंडिया आर्ट फेस्टिवल में दिल्ली, मुंबई, गुरुग्राम, नोएडा, उदयपुर, हैदराबाद, पुणे, बेंगलुरु जैसे अनगिनत शहरों से आए ऐसे ही एक से बढ़कर एक कलाकारों ने कला की प्रदर्शनी लगाई है। कांस्टीट्यूशन क्लब में 10 अप्रैल तक आयोजित होने वाले फेस्टिवल में विविध तरह की कला और आत्मनिर्भर भारत की झलक देखी जा सकती है।
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कोविड महामारी काल के बाद इंडिया आर्ट फेस्टिवल के जरिये कलाकारों को फिर से अपनी कला को प्रदर्शित करने का अवसर मिला है। अपने आर्ट वर्क को बेचकर आत्मनिर्भर बनने का भी मौका मिला है। यहां 80 से ज्यादा स्टॉल हैं, जिन पर 3500 से ज्यादा आर्ट वर्क प्रदर्शित किए गए हैं। नोएडा के कलाकार अनूप कामत द्वारा बनाई गई दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को दर्शाती तस्वीरें खासी आकर्षक हैं। विंटेज कारों, अंग्रेजी शासनकाल में दिल्ली में चलने वाली ट्राम, तांगा, हाथ व ऑटो रिक्शा को उन्होंने कैनवास पर उतारा है।
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पंजाब की सुखमणि ने अपने जियोर्ड आर्ट वर्क को यहां प्रदर्शित किया है। जमीन में पाए जाने वाले मिनरल और क्रिस्टल से उन्होंने प्रकृति की सुंदरता और सच्चाई को एक आकार दिया है। उनकी कलाकृतियां लोगों को आकर्षक लग रही हैं।
मेरठ से आई वैशाली रस्तोगी साहनी रंगीन कागज और फेविकोल के इस्तेमाल से 19 कलाकृतियों को यहां पर प्रदर्शित किया है। इसमें लाल किला, कुतुब मीनार, मां सरस्वती और भगवान कृष्ण की मनमोहक आकृतियां शामिल हैं।