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भू-राजनीति से आगे बढ़ रहा विश्व, भू-अर्थशास्त्र का बढ़ा प्रभाव: जेएनयू कुलगुरु
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- व्यापार, शुल्क और वैश्विक बदलावों पर जेएनयू में मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) में आयोजित पंडित हृदय नाथ कुंजरू मेमोरियल लेक्चर्स 2026 के तहत व्यापार, शुल्क और भू-राजनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा जारी है। कार्यक्रम का आयोजन जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की ओर से किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य पर अपने विचार रख रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान जेएनयू की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित ने कहा कि वर्तमान समय केवल भू-राजनीति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दुनिया अब तेजी से भू-अर्थशास्त्र और भू-सांस्कृतिक बदलावों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने वैश्विक असंतुलनों के बीच भारत की व्यापार नीति को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं डॉ. सुमन बेरी ने ‘संकट में अवसर’ विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत को आपूर्ति पक्ष सुधारों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि उभरते बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत है और यह देश तेजी से आर्थिक प्रगति की ओर अग्रसर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक राजनीति में बदलाव पर प्रो. गुलशन सचदेवा ने चर्चा की। वहीं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर बोलते हुए प्रो. शंकरी सुंदरारमन और प्रो. अनंत स्वरूप बिजेंद्र ने कहा कि अमेरिका की भूमिका भले बदल जाए, लेकिन इस क्षेत्र का महत्व बना रहेगा। यहां उभरते छोटे-छोटे समूह सहयोग और संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) में आयोजित पंडित हृदय नाथ कुंजरू मेमोरियल लेक्चर्स 2026 के तहत व्यापार, शुल्क और भू-राजनीति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा जारी है। कार्यक्रम का आयोजन जेएनयू के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज की ओर से किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य पर अपने विचार रख रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान जेएनयू की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित ने कहा कि वर्तमान समय केवल भू-राजनीति तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि दुनिया अब तेजी से भू-अर्थशास्त्र और भू-सांस्कृतिक बदलावों की ओर बढ़ रही है। उन्होंने वैश्विक असंतुलनों के बीच भारत की व्यापार नीति को मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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वहीं डॉ. सुमन बेरी ने ‘संकट में अवसर’ विषय पर बोलते हुए कहा कि भारत को आपूर्ति पक्ष सुधारों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। उन्होंने बताया कि उभरते बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत है और यह देश तेजी से आर्थिक प्रगति की ओर अग्रसर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों और वैश्विक राजनीति में बदलाव पर प्रो. गुलशन सचदेवा ने चर्चा की। वहीं इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर बोलते हुए प्रो. शंकरी सुंदरारमन और प्रो. अनंत स्वरूप बिजेंद्र ने कहा कि अमेरिका की भूमिका भले बदल जाए, लेकिन इस क्षेत्र का महत्व बना रहेगा। यहां उभरते छोटे-छोटे समूह सहयोग और संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
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