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World Book Fairs: किंडल व ई-बुक्स नहीं ले सकते पेपर बैक की जगह, विश्व पुस्तक मेले में पहुंचे करीब 10 लाख पाठक

Wed, 08 Mar 2023 09:16 AM IST
शाहरुख खान आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Wed, 08 Mar 2023 09:16 AM IST
सार

25 फरवरी से पांच मार्च तक चले विश्व पुस्तक मेले में इसका सबसे मजबूत उदाहरण सबने देखा। नौ दिवसीय मेले में 10 लाख से ज्यादा पाठक पहुंचे, इनमें सबसे ज्यादा संख्या युवा पाठकों की थी। 
 

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World Book Fair Kindle and e-books cannot replace paperback about one million readers reached World Book Fair
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

किंडल और ई-बुक्स कभी पेपर बैक का स्थान नहीं ले पाएंगी। पाठक डिजिटल को स्थायी प्लेटफार्म नहीं मानते और किताबें पढ़ने का उनका अपना आनंद बरकरार है। यह आनंद अब देश की युवा पीढ़ी में भी बढ़ता दिख रहा है। 
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25 फरवरी से पांच मार्च तक चले विश्व पुस्तक मेले में इसका सबसे मजबूत उदाहरण सबने देखा। नौ दिवसीय मेले में 10 लाख से ज्यादा पाठक पहुंचे, इनमें सबसे ज्यादा संख्या युवा पाठकों की थी। 
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 ईरान ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले से अभिभूत होकर भारत को मई-जून में अपने देश में आयोजित होने जा रहे विश्व पुस्तक मेले में मेहमान देश बनकर शिरकत करने का न्योता भी दिया है। 
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विश्व पुस्तक मेला आजादी के अमृत महोत्सव और जी-20 की थीम पर आयोजित किया गया था। इसमें जी-20 सहित 30 से अधिक देशों ने भागीदारी निभाई। फ्रांस मेले में अतिथि देश के तौर पर शामिल हुआ। फ्रांस से साहित्यकारों व किताब के व्यवसाय से जुड़े करीब 60 लोगों का दल मेले में नौ जिन तक मौजूद रहा। 

भारत की 24 भाषाओं की किताबों का विभिन्न विदेशी भाषाओं की किताबों का भारत की इन भाषाओं में अनुवाद करने को लेकर कॉपी टेबल बैठकों का यहां लंबा दौर चला। करीब 1000 से ज्यादा देशी-विदेशी वक्ताओं ने किताबों, इनके प्रकाशन, भाषा, व्यवसाय जैसे विषयों पर यहां गंभीरता से चर्चा की। इनके बीच 400 से ज्यादा बैठकें हुईं।

250 से अधिक किताबों का विमोचन

राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष डॉ गोविंद प्रसाद शर्मा ने बताया कि पुस्तक मेले में अकेले एनबीटी (नेशनल बुक ट्रस्ट) ने 250 से अधिक किताबों का विमोचन किया। कुछ इसी अनुपात में, बल्कि ये कहें कि एनबीटी से ज्यादा किताबें हर एक निजी प्रकाशकों की तरफ से लॉन्च की गईं। 

मेले में 2000 से भी अधिक स्टालों पर कई लाख किताबें लेकर प्रकाशक पहुंचे थे। सभी प्रकाशकों ने खूब जमकर किताबें बेचीं। कई प्रकाशक बताना चाहते हैं, कई नहीं। लेकिन सच्चाई ये है कि किताबें बहुत बिकी हैं। डॉ शर्मा ने कहा कि मेला यदि 20-25 दिन पहले होता, तो इसका आनंद कुछ और होता। बच्चों की परीक्षाएं नहीं चल रही होती तो पाठकों की संख्या 5-10 फीसदी और बढ़ जाती। 

पाठकों में किताब के प्रति लगाव देखकर हो रही खुशी

वांणी प्रकाशन की प्रमुख अदिति माहेश्वरी गोयल ने बताया कि हिंदी-अंग्रेजी दोनों की किताबें खूब बिकी हैं। मेले में खराब इंटरनेट के कारण रोजाना 10-15 फीसदी ट्रांजेक्शन फेल हुए, फिर भी वह पाठकों के किताबों के प्रति बढ़े लगाव को देखकर बेहद खुश हैं। इसी प्रकार प्रभात प्रकाशन के प्रमुख प्रभात कुमार ने बताया कि इस साल रिकार्ड तोड़ किताबें बिकी हैं। पाठकों ने खूब प्यार दिखाया है। इस बार मेले में नई उम्र के पाठक ज्यादा रहे हैं।
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