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इन महिलाओं ने अपने हौसले के बल पर छुआ अपना आसमां

Tue, 08 Mar 2016 10:34 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 08 Mar 2016 10:34 AM IST
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womens day special: women growing their children by driving cars of call centre
anita women driver - फोटो : अमर उजाला

कहते हैं कि ज्ञान और हुनर इंसान के जीवन के वो दो पहलू हैं, जो बुरे वक्त में भी उसको सफलता के लिए प्रेरित करते रहते हैं। शहर की एक ऐसी ही महिला हैं अनीता, जिन्होंने पति की मौत के बाद विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाये, बल्कि उन्हीं हाथों से थाम स्टेयरिंग थामकर बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने की ठान ली।



समाज में मर्दों का काम माना जाने वाला वाहन ड्राईविंग को इस महिला ने अपना रोजगार चुना है।  छज्जन नगर में अपने बच्चों के साथ रह रही अनीता विधवा हैं। वह नोएडा के एक कॉलसेंटर में बतौर ड्राईवर की नौकरी कर रही हैं।

इसी रोजगार के सहारे ही वह अपने तीन बच्चों एक आठ वर्षीय बेटी और दो बेटों का भरण-पोषण कर रही है। अनीता बताती है कि उनकी शादी 2006 में जसाना गांव के नजदीक राजपुर कला में कन्हैयालाल के साथ हुई थी।

शादी के कुछ दिनों बाद ही वह गांव छोड़कर अपने पति के साथ छज्जन नगर आकर बस गई। यहां उनके पति की फोटोग्राफी की दुकान थी। उन्होंने बताया की शादी के पांच साल बाद ही बीमारी के कारण पति की मृत्यु हो गई।

पति के मरने के बाद ससुराल वालों का भी साथ नहीं मिला, लेकिन उन्हें अपने बच्चों को बेहतर जिंदगी देनी थी। ऐसे में उन्होंने अपने बचपन के हुनर को अपना रोजी रोटी का जरिया बनाया। अनीता का मायका गांव जसाना है। उनके पिता खेती-बाड़ी का काम करते हैं।

किसान की इस बेटी को गाड़ी चलाने का शौक बचपन से था। ट्रैक्टर से खेत जोतने से लेकर बाजार से सामान लाने का काम वह मोटरसाइकिल से करती। उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में ही ड्राईविंग सीख ली थी। अब वह मिनी बस, ट्रैक्टर, ऑटो, कार आदि बखूबी चला लेती है।

हौसले से आकांक्षा ने बदल डाली जिंदगी की दिशा

womens day special: women growing their children by driving cars of call centre
akansha - फोटो : अमर उजाला


कहते हैं अगर सिर पर माता-पिता का हाथ न हो तो जिंदगी की राह कठिन हो जाती है, लेकिन शहर की बेटी ने अनाथालयों में रहने वाले हजारों-लाखों बच्चों के सामने अपनी कामयाबी की मिसाल पेश की है। सेक्टर 29 स्थित बालग्राम संस्थान में पली बढ़ी अकांक्षा ने अपने हौसले की बदौलत जिंदगी की दिशा ही बदल डाली।

ग्रीनफील्ड स्थित बालग्राम संस्थान में पली-बढ़ी अकांक्षा एयर होस्टेस बनी हैं। यह उसकी मेहनत और विषम परिस्थितियों से लड़कर उस मुकाम पर पहुंचने की जिद ही थी कि वो ऐसा कर पाई, वरना हर कोई कुछ करने की सोचता है, लेकिन कुछ ही लोग कर पाते हैं।

अकांक्षा ने सेक्टर-29 स्थित एसओएस हरमन माईनर से 12वीं करने के बाद एयर होस्टेस का कोर्स किया। अभी उनकी पोस्टिंग जयपुर इंडिगो एयरलाइंनस में है। अकांक्षा कहती है हर लड़कियों को विपरित परिस्थितियों में संघर्षशील रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं कि उनके सगे माता-पिता कौन हैं, लेकिन एसओएस में जिन यशोदा मैया ने मुझे सहारा दिया वही मेरे लिए सबकुछ हैं। वह बताती हैं कि जिंदगी में सफल होने के लिए हिम्मत और हौसला होना चाहिए।

चारा पानी कर पंच लगा जीत लिया गोल्ड

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anupama - फोटो : अमर उजाला

बचपन में टेलीविजन पर बॉक्सरों को पंच लगाते हुए देखा। बड़ी होने पर पढ़ाई के साथ बॉक्सिंग करने की इच्छा हुई। लेकिन, घर में बड़े बुजुर्गों का सहयोग नहीं मिला। बाद में जिद के आगे परिवार के लोगों ने उसे सपोर्ट करना शुरू कर दिया।

वह पहले स्कूल से आने के बाद घर पर जानवरों का चारा-पानी कर गोबर उठाती है। फिर ट्रेन से बैठकर सेक्टर-11 स्थित द्रोणाचार्य क्लब में आकर प्रेक्टिस करती है। दो साल में मेहनत करके भिवानी में सम्पन्न हुए राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर जिले का नाम रोशन किया।

ये कहानी है पलवल जिले के गांव यादूपुर निवासी किसान की बेटी अनुपमा की। वह सराय स्थित सीनियर गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा है। वह सितंबर 2015 में भिवानी में संपन्न हुए स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी है। अब उसका लक्ष्य नेशनल में गोल्ड जीतना है।

अनुपमा के पिता किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जब उसने खेल के लिए घर में चर्चा की थी तो दादा  ने विरोध किया था। क्योंकि वह लड़कियों को खेल के क्षेत्र में जाने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन बेटी की इच्छा को ध्यान में रखते हुए वह कृष्णा कॉलोनी में आकर परिवार के साथ रहने लगे। उन्होंने बताया कि अनुपमा स्कूल से आने के बाद घर में पाली गई चार गायों का चारा-पानी करती है। उसके बाद ट्रेन से आकर यहां प्रशिक्षण लेती है।

रात करीब 8:30 बजे वह घर वापस जाती है। अनुपमा के कोच राजीव गोदारा ने बताया कि दिल्ली में 14 से 18 मार्च तक होने वाली नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए उसका चयन हुआ है। इसके अलावा अप्रैल में गुवाहाटी में प्रस्तावित अंडर-19 आयु वर्ग में नेशनल स्कूल गेम में हिस्सा लेगी। अनुपमा 75 से 81 भार वर्ग में खेलती है। 

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खेलों में किया देश का नाम रोशनः श्वेता चौधरी

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shweta chaudhari - फोटो : अमर उजाला


2014 के एशियन गेम्स में देश को कांस्य पदक देने वाली शहर की शूटर श्वेता चौधरी ने एक बार फिर अपने प्रदेश व जिले का नाम रोशन किया है। हाल ही गुवाहाटी में संपन्न हुए साउथ एशियन गेम्स में श्वेता ने 10 मीटर एयर पिस्टल में व्यक्तिगत व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर शानदार निशाना लगाया है। फरीदाबाद के यह बेटी शूटिंग क्षेत्र में अपने वाली लड़कियों के लिए आदर्श बनी हुई हैं। शहर में आयोजित किसान भवन उद्घाटन में मुख्यमंत्री ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के तहत इन्हें सम्मानित भी किया था। श्वेता कहती है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य की जरूरत होती है। बेटियों को हमेशा एक लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

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अनीसा सैय्यदः दिल्ली के कॉमनवैल्थ खेलों में उन्होंने 25 मीटर पिस्टल में पहली बार स्वर्ण पर कब्जा

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anisa sayed - फोटो : अमर उजाला
शहर की बहू अनीसा सैय्यद ने शादी के बाद परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए भी अपने खेल को जिंदा रखा। वर्ष 2010 में दिल्ली के कॉमनवैल्थ खेलों में उन्होंने 25 मीटर पिस्टल में पहली बार स्वर्ण पर कब्जा किया। 2014 के ग्लास्गो कॉमनवैल्थ में 25 मीटर पिस्टल में रजत पदक अपने नाम करके फरीदाबाद और देश का नाम रोशन किया। अनीसा को अपने खेल जीवन में काफी मेहनत करनी पड़ी। फरीदाबाद में रहते हुए शूटिंग के अभ्यास के लिए कोई सुविधा न होने के चलते उन्होंने घर के एक कमरे में निशाना लगाने का अभ्यास जारी रखा।
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