कहते हैं कि ज्ञान और हुनर इंसान के जीवन के वो दो पहलू हैं, जो बुरे वक्त में भी उसको सफलता के लिए प्रेरित करते रहते हैं। शहर की एक ऐसी ही महिला हैं अनीता, जिन्होंने पति की मौत के बाद विपरीत परिस्थितियों का सामना किया। अपने बच्चों का पालन-पोषण करने के लिए लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाये, बल्कि उन्हीं हाथों से थाम स्टेयरिंग थामकर बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने की ठान ली।
इन महिलाओं ने अपने हौसले के बल पर छुआ अपना आसमां
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हौसले से आकांक्षा ने बदल डाली जिंदगी की दिशा
कहते हैं अगर सिर पर माता-पिता का हाथ न हो तो जिंदगी की राह कठिन हो जाती है, लेकिन शहर की बेटी ने अनाथालयों में रहने वाले हजारों-लाखों बच्चों के सामने अपनी कामयाबी की मिसाल पेश की है। सेक्टर 29 स्थित बालग्राम संस्थान में पली बढ़ी अकांक्षा ने अपने हौसले की बदौलत जिंदगी की दिशा ही बदल डाली।
ग्रीनफील्ड स्थित बालग्राम संस्थान में पली-बढ़ी अकांक्षा एयर होस्टेस बनी हैं। यह उसकी मेहनत और विषम परिस्थितियों से लड़कर उस मुकाम पर पहुंचने की जिद ही थी कि वो ऐसा कर पाई, वरना हर कोई कुछ करने की सोचता है, लेकिन कुछ ही लोग कर पाते हैं।
अकांक्षा ने सेक्टर-29 स्थित एसओएस हरमन माईनर से 12वीं करने के बाद एयर होस्टेस का कोर्स किया। अभी उनकी पोस्टिंग जयपुर इंडिगो एयरलाइंनस में है। अकांक्षा कहती है हर लड़कियों को विपरित परिस्थितियों में संघर्षशील रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं कि उनके सगे माता-पिता कौन हैं, लेकिन एसओएस में जिन यशोदा मैया ने मुझे सहारा दिया वही मेरे लिए सबकुछ हैं। वह बताती हैं कि जिंदगी में सफल होने के लिए हिम्मत और हौसला होना चाहिए।
चारा पानी कर पंच लगा जीत लिया गोल्ड
बचपन में टेलीविजन पर बॉक्सरों को पंच लगाते हुए देखा। बड़ी होने पर पढ़ाई के साथ बॉक्सिंग करने की इच्छा हुई। लेकिन, घर में बड़े बुजुर्गों का सहयोग नहीं मिला। बाद में जिद के आगे परिवार के लोगों ने उसे सपोर्ट करना शुरू कर दिया।
वह पहले स्कूल से आने के बाद घर पर जानवरों का चारा-पानी कर गोबर उठाती है। फिर ट्रेन से बैठकर सेक्टर-11 स्थित द्रोणाचार्य क्लब में आकर प्रेक्टिस करती है। दो साल में मेहनत करके भिवानी में सम्पन्न हुए राज्य स्तरीय बॉक्सिंग प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर जिले का नाम रोशन किया।
ये कहानी है पलवल जिले के गांव यादूपुर निवासी किसान की बेटी अनुपमा की। वह सराय स्थित सीनियर गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल में 11वीं कक्षा की छात्रा है। वह सितंबर 2015 में भिवानी में संपन्न हुए स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी है। अब उसका लक्ष्य नेशनल में गोल्ड जीतना है।
अनुपमा के पिता किसान सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जब उसने खेल के लिए घर में चर्चा की थी तो दादा ने विरोध किया था। क्योंकि वह लड़कियों को खेल के क्षेत्र में जाने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन बेटी की इच्छा को ध्यान में रखते हुए वह कृष्णा कॉलोनी में आकर परिवार के साथ रहने लगे। उन्होंने बताया कि अनुपमा स्कूल से आने के बाद घर में पाली गई चार गायों का चारा-पानी करती है। उसके बाद ट्रेन से आकर यहां प्रशिक्षण लेती है।
रात करीब 8:30 बजे वह घर वापस जाती है। अनुपमा के कोच राजीव गोदारा ने बताया कि दिल्ली में 14 से 18 मार्च तक होने वाली नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप के लिए उसका चयन हुआ है। इसके अलावा अप्रैल में गुवाहाटी में प्रस्तावित अंडर-19 आयु वर्ग में नेशनल स्कूल गेम में हिस्सा लेगी। अनुपमा 75 से 81 भार वर्ग में खेलती है।
खेलों में किया देश का नाम रोशनः श्वेता चौधरी
2014 के एशियन गेम्स में देश को कांस्य पदक देने वाली शहर की शूटर श्वेता चौधरी ने एक बार फिर अपने प्रदेश व जिले का नाम रोशन किया है। हाल ही गुवाहाटी में संपन्न हुए साउथ एशियन गेम्स में श्वेता ने 10 मीटर एयर पिस्टल में व्यक्तिगत व टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक पर शानदार निशाना लगाया है। फरीदाबाद के यह बेटी शूटिंग क्षेत्र में अपने वाली लड़कियों के लिए आदर्श बनी हुई हैं। शहर में आयोजित किसान भवन उद्घाटन में मुख्यमंत्री ने बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ के तहत इन्हें सम्मानित भी किया था। श्वेता कहती है कि किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए एक लक्ष्य की जरूरत होती है। बेटियों को हमेशा एक लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए।
अनीसा सैय्यदः दिल्ली के कॉमनवैल्थ खेलों में उन्होंने 25 मीटर पिस्टल में पहली बार स्वर्ण पर कब्जा