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Delhi NCR News: महिला गिग वर्करों का जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
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-गिग वर्कर्स की सरकार से मांग, उन्हें श्रम कानून के दायरे में लाया जाए
नई दिल्ली। दिल्ली गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (जीपीएसडब्ल्यूयू) ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 28 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया। जिसमें कई जगहों से बड़ी संख्या में आए गिग वर्कर्स शामिल हुए। आंदोलनकारी वर्कर्स ने कहा कि वह सिर्फ डिलिवरी पार्टनर नहीं हैं बल्कि आपके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं। एक डिलीवरी बॉय दिन में 14-16 घंटे दौड़ता है, ट्रैफिक में पसीना बहाता है, बारिश में भीगता है, लेकिन महीने के अंत में मिलता है तो सिर्फ 15-20 हजार रूपये जिसमें से किराया, पेट्रोल, बाइक मेंटेनेंस कट जाता है। यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने बताया कि महिलाएं घरेलू काम, ब्यूटी सर्विस या स्पा में जाती हैं, तो उन्हें यौन उत्पीड़न का डर, अनुचित रेटिंग और आईडी ब्लॉक करने की धमकी मिलती रहती है। वह लोग अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं भर पाते, बीमारी में अस्पताल का खर्चा नहीं उठा पाते। कंपनियां दस मिनट डिलीवरी का वादा करती हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। संवाद
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नई दिल्ली। दिल्ली गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (जीपीएसडब्ल्यूयू) ने मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने 28 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना दिया। जिसमें कई जगहों से बड़ी संख्या में आए गिग वर्कर्स शामिल हुए। आंदोलनकारी वर्कर्स ने कहा कि वह सिर्फ डिलिवरी पार्टनर नहीं हैं बल्कि आपके रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा हैं। एक डिलीवरी बॉय दिन में 14-16 घंटे दौड़ता है, ट्रैफिक में पसीना बहाता है, बारिश में भीगता है, लेकिन महीने के अंत में मिलता है तो सिर्फ 15-20 हजार रूपये जिसमें से किराया, पेट्रोल, बाइक मेंटेनेंस कट जाता है। यूनियन की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा सिंह ने बताया कि महिलाएं घरेलू काम, ब्यूटी सर्विस या स्पा में जाती हैं, तो उन्हें यौन उत्पीड़न का डर, अनुचित रेटिंग और आईडी ब्लॉक करने की धमकी मिलती रहती है। वह लोग अपने बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं भर पाते, बीमारी में अस्पताल का खर्चा नहीं उठा पाते। कंपनियां दस मिनट डिलीवरी का वादा करती हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। संवाद