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प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बंद कर दें तो?

Thu, 18 Feb 2016 02:59 PM IST
Updated Thu, 18 Feb 2016 02:59 PM IST
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Why not giveing order to polluting industries

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले तक गंगा किनारे प्रदूषण फैलाने वाले सभी उद्योगों को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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गंगा किनारे टेक्सटाइल, पेपर, पल्प, टैनरीज और अन्य उद्योगों को लेकर एनजीटी की सख्ती कायम है। एनजीटी ने पूछा है कि गंगा किनारे स्थित इन उद्योगों को क्यों न बंद करने का आदेश दिया जाए।
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ट्रिब्यूनल ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी निर्देश दिया है कि वह अपने वेबसाइट पर गंभीर प्रदूषण फैलाने वाली 1070 इंडस्ट्री की सूची प्रकाशित करें। साथ ही पर्यावरण मंत्रालय भी इस प्रक्रिया में पूरी मदद करे। मामले की अगली सुनवाई 7 मार्च को होगी।
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प्रदूषण रहित अपशिष्ट निकासी पर अपना स्पष्ट पक्ष रखें

Why not giveing order to polluting industries

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को एमसी मेहता मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। बेंच ने कहा कि उक्त सभी उद्योग जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (प्रदूषण रहित अपशिष्ट निकासी) फॉर्मूले पर भी अपना स्पष्ट पक्ष रखें।


बेंच ने कहा कि इस फॉर्मूले से किसी तरह का प्रदूषण होता है या नहीं, इस पर उद्योग अपना स्पष्ट पक्ष रखें। वहीं ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम, और उद्योगों की ताजा स्थिति को लेकर भी जवाब देने को कहा है। बेंच ने कहा कि उद्योग यह भी बताएं की प्रदूषण की रोकथाम को लेकर उन्होंने अभी तक क्या कदम उठाए हैं।

उद्योगों की तरफ से आए वकीलों से फटकार लगाते हुए बेंच ने कहा कि क्या आप एक उद्योग का भी नाम बताएंगे जो प्रदूषण न करती हो। आप कहते हैं कि आपकी यूनिट से प्रदूषण नहीं हो रहा है।

क्यों न इन उद्योगों को बंद कर दिया जाए

Why not giveing order to polluting industries

क्या आपने अपने उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट को कभी जांचा-परखा? यदि गंगा किनारों पर प्रदूषण मौजूद है तो क्यों न इन उद्योगों को बंद कर दिया जाए।


बेंच ने अपनी टिप्पणी में कहा कि प्रदूषण बोर्ड की अनुमति के बिना चल रहे इन उद्योगों को आखिर क्यों न बंद किया जाए कोई एक कारण बताएं?

मालूम हो कि दस फरवरी को ग्रीन बेंच ने गंगा (हरिद्वार से कानपुर बहाव क्षेत्र) किनारे मौजूद प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की जांच के लिए एक कमेटी गठित की थी। साथ ही जांच कमेटी से कहा था कि वे बताएं कि इन उद्योगों के जरिये कितना सीवेज डिस्चार्ज किया जा रहा है?

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