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केजरीवाल को आईना दिखा रहा है यूपी का ये गांव

Thu, 16 Apr 2015 08:20 PM IST
Updated Thu, 16 Apr 2015 08:20 PM IST
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Village in loni is fully wifi abled

जीवन के 52 बसंत देख चुके नरेंद्र कुमार अपनी चारपाई पर बैठकर अपने पोते के आईपैड में कुछ ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। उनके बाईं ओर धानी अपना चारा खाना खाने में मस्त है। वो धानी से कहते हैं 'देख धानी मैं क्या कर रहा हूं? मैं अपने गेहूं के ऊंचे दाम कहां मिलेंगे ये ढूंढ रहा हूं।'

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धानी उनकी दो साल की भैंस का नाम है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक नरेंद्र कुमार जिस गांव में रहते हैं वो बिल्कुल सामान्य गांवों जैसा है। खेती-बाड़ी, मवेशी, ट्रैक्टर और हुक्का पीते गांव के बुजुर्ग।
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लेकिन एक चीज है जो इस गांव को दूसरे गांवों से अलग करती है। बल्कि हम ये भी कह सकते हैं कि ये गांव देश की राजधानी दिल्ली और वहां के सीएम अरविंद केजरीवाल तक को आईना दिखाता है।
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एक्सप्रेस आगे कहता है कि दिल्ली से मात्र 8 किमी दूर ये गांव एक ऐसी चीज से संपन्न है जिसका वादा केजरीवाल ने चुनाव के दौरान किया था लेकिन उस वादे को वो अगले साल तक पूरा होने का दावा करते हैं।

फोटो साभार: इंडियन एक्सप्रेस

ये पूरा गांव है वाई-फाई से लैस

Village in loni is fully wifi abled

गाजियाबाद के लोनी में गांव टिल्ला शाहबाजपुर है जहां के गांववालों ने अपने दम पर ही एक महीने के अंदर पूरे गांव को वाई-फाई जोन में तब्दील कर दिया।

जहां केजरीवाल के मंत्री अब भी इस कशमकश में हैं कि दिल्ली में फ्री वाई-फाई सुविधा कैसे लागू की जाए। इस लगभग 2.5 किमी में फैले गांव ने एक-दूसरे की सहायता से गांव में वाई-फाई लगा भी लिया।

करीब एक महीने पहले यहां के लोगों ने 18 लाख रुपए खर्च करके गांव को वाई-फाई से लैस कर दिया। गांव के प्रधान ईश्वर मावी बताते हैं कि दिल्ली चुनावों के दौरान उन्होंने केजरीवाल को वादा करते सुना था‌ कि दिल्ली को फ्री वाई-फाई उपलब्ध कराया जाएगा।

अभी केवल मोबाइल पर मिल रही है सुविधा

Village in loni is fully wifi abled

इसके बाद ईश्वर मावी ने अपने गांव के युवाओं से बात की जिन्होंने वाई-फाई लगवाने पर जोर दिया। जिसके बाद टेलीकॉम कंपनी से बात की गई।

जल्द ही उनके घर के पीछे एक टॉवर लग गया और अब गांव के सभी 2700 मोबाइल इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। गांव में इस सुविधा को प्रदान करने वाली कंपनी का नाम ग्रैड्स नेटवर्क लिमिटेड है जिसने एएनआई नेटवर्क के साथ मिलकर इस प्रोजेक्ट को अंजाम दिया है।

ग्रैड्स नेटवर्क के एक ‌इंजीनियर का कहना है कि अभी कनेक्शन केवल मोबाइल के लिए है। वैसे इस सुविधा का लाभ लैपटॉप और कंप्यूटर पर भी उठाया जा सकता है।

अभी तक केवल 120 गांववालों को इस सुविधा का लाभ मिल रहा है। लेकिन 10 और घर पहले ही कंपनी को कनेक्शन के लिए मिल चुके हैं।

पहले महीने फ्री फिर 200 रु में मिलेगा 5 जीबी डेटा

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कुमार ने आगे बताया कि पहले महीने के लिए यह सुविधा मुफ्त होगी ताकि लोग इसके बारे में जान सकें फिर बाद में हर 5 जीबी के लिए मात्र 200 रुपए देने होंगे।

गांव में उपलब्ध कनेक्शन प्रधान ईश्वर मावी की मां के नाम पर है। इसलिए जैसे ही आप गांव की सीमा में घुसेंगे आपको किरण-वाई-फाई-जोन@9654453438 के नाम से वाई-फाई कनेक्शन दिखने लगेगा।

लेकिन यह नेटवर्क केवल उनके लिए है जिनका डिवाइस कंपनी के साथ रजिस्टर है। अगर आप अपना डिवाइस बदलते हैं तो आप नेटवर्क का एक्सेस खो देंगे। इस सबके बावजूद ईश्वर मावी को यह बात सालती है कि जहां वो रहते हैं उसे गांव माना जाता है।

वो कहते हैं कि यह गांव है क्योंकि यह गांव की तरह दिखता है। लेकिन गांव में कई प्राइमरी और जूनियर स्कूल हैं। साथ ही में बीएड कॉलेज और सीनियर सेकेंडरी स्कूल भी है।

'केजरीवाल की वाई-फाई लगाने में देरी है समझ से परे'

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यह बात प्रधान मावी के समझ से परे है कि आखिर दिल्ली के सीएम केजरीवाल वाई-फाई लगाने में इतनी देर क्यों कर रहे हैं। वो कहते हैं कि हमारे पास आइडिया था हमने उस पर काम किया।

किसी को भी कोई काम करने के लिए केवल इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। वहीं इस गांव की सफल परियोजना को देखते हुए गाजियाबाद के मजिस्ट्रेट विमल कुमार शर्मा कहते हैं कि एक गांव द्वारा ‌इस तरह की पहल को देखकर बहुत अच्छा लगता है।

वो कहते हैं कि वो गांव के प्रधान से बात करेंगे ताकि और गांवों में भी इस योजना को अमल में लाया जा सके। गांव के प्रधान ईश्वर मावी का पोता दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीकॉम का छात्र है।

वो उन्हें गूगल मैप पर अपना गांव दिखाता है तब वो पूछते हैं कि मेरा घर कहां है तब वो जूम करके उन्हें दिखाता है। फिर वो मजाक करते हुए पूछते हैं कि क्या 'अब जो मैं तुमसे बात कर रहा हूं, वो भी दिख रहा है क्या इसपे?'

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