Delhi: परिसीमन फार्मूले से शहरी क्षेत्र को होगा फायदा, गांवों में घटेंगी सीटें
गृह मंत्रालय ने एक विधानसभा क्षेत्र में पांच वार्ड बनाने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय के मद्देनजर आबादी ही नहीं, बल्कि क्षेत्रफल के अनुसार शहरी क्षेत्र में छोटे और गांव व अनधिकृत कॉलोनी बहुल विधानसभा क्षेत्रों में बड़े वार्ड बनेंगे।
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केंद्र के निगम वार्डों के परिसीमन के फार्मूले से शहरी क्षेत्रों को फायदा हो सकता है। एमसीडी के वार्ड की संख्या में कटौती का असर अनधिकृत कॉलोनियों व ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ेगा। वार्ड की संख्या 272 से 250 करने से इन्हीं इलाकों में सीटों की संख्या कम हो सकती है।
दरअसल, अभी दिल्ली के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वार्ड की संख्या 3 से 7 हैं। शहरी क्षेत्रों की अधिकतर विधानसभा क्षेत्रों में तीन-तीन वार्ड हैं। जबकि ग्रामीण व अनधिकृत कॉलोनियों वाले विधानसभा क्षेत्रों में संख्या 4-7 के बीच है। केंद्र के नए फार्मूले के हिसाब से अब दिल्ली की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 3 से 5 के बीच ही वार्ड हो सकते हैं। इसमें कोई भी वार्ड दो विधानसभा क्षेत्रों में नहीं होगा।
गृह मंत्रालय ने एक विधानसभा क्षेत्र में पांच वार्ड बनाने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्णय के मद्देनजर आबादी ही नहीं, बल्कि क्षेत्रफल के अनुसार शहरी क्षेत्र में छोटे और गांव व अनधिकृत कॉलोनी बहुल विधानसभा क्षेत्रों में बड़े वार्ड बनेंगे। लिहाजा एमसीडी के वार्डों में क्षेत्रफल और आबादी का काफी बड़ा अंतर रहेगा।
इन क्षेत्रों में होंगे 3-3 वार्ड
शहरी क्षेत्र के आदर्श नगर, शकूर बस्ती, मॉडल टाउन, चांदनी चौक, मटिया महल, बल्लीमारान, करोल बाग, मोती नगर, राजेंद्र नगर, हरी नगर, तिलक नगर, जंगपुरा, कस्तूरबा नगर, मालवीय नगर, आरकेपुरम, अंबेडकर नगर, ग्रेटर कैलाश, कालकाजी, गांधी नगर आदि विधानसभा क्षेत्रों में पहले की तरह तीन-तीन वार्ड रहेंगे।
इन क्षेत्रों में कम हो सकते हैं
ग्रामीण व अनधिकृत कॉलोनी वाले विधानसभा क्षेत्र नरेला, बुराड़ी, बादली, रिठाला, बवाना, मुंडका, किराड़ी, विकासपुरी, उत्तम नगर, मटियाला, नजफगढ़, बिजवासन, देवली, बदरपुर, ओखला व करावल नगर में वार्डों की संख्या कम हो सकती है।
बड़े वार्ड के पार्षदों को बजट की होगी दिक्कत
एमसीडी के वार्डों के क्षेत्रफल और उनमें आबादी का अंतर होने का आम लोगों को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। दरअसल पार्षदों को बजट, कर्मचारी व कूड़ा उठाने के लिए वाहन एक समान मिलते है। इस कारण छोटे वार्डों में विकास कार्य के लिए बजट की दिक्कत नहीं होगी, जबकि बड़े वार्डों के पार्षदों को अपने इलाके की समस्याएं दूर कराने के लिए बजट की कमी का सामना करना पड़ सकता है।
एमसीडी में होंगे 250 वार्ड
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एमसीडी के वार्डों की संख्या तय कर दी है। मंत्रालय ने दिल्ली राज्य चुनाव आयोग के आयुक्त की अध्यक्षता में बनाए गए आयोग को 250 वार्ड बनाने का निर्देश दिया है। इसके अलावा विधानसभा क्षेत्रों में तीन से पांच वार्ड बनाने का आदेश दिया है। आयोग ने गत दिनों इस बारे में मंत्रालय से राय मांगी थी। वर्ष 2007 में एमसीडी में वार्डों की संख्या 134 से बढ़ाकर 272 की थी और जब से एकीकृत एमसीडी के साथ-साथ तीनों नगर निगमों में वार्डों की संख्या 272 ही थी, लेकिन अप्रैल माह में केंद्र सरकार ने तीनों नगर निगम का विलय करके एमसीडी बनाने के दौरान वार्डों की संख्या 272 से घटाकर 250 करने का निर्णय लिया।