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दिल्ली में परिवहन: 2031 से एनसीआर में केवल इलेक्ट्रिक कारें बेचने की तैयारी, 2028 तक सड़कों पर 6972 नई ई-बसें
Fri, 09 Oct 2026 01:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 09 Oct 2026 01:33 AM IST
सार
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेषज्ञ समिति ने एक रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और आने वाले वर्षों में पेट्रोल-डीजल वाहनों की बिक्री पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने की सिफारिश की है।
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : AI
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए पेट्रोल और डीजल वाहनों को धीरे-धीरे सड़कों से हटाने की तैयारी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेषज्ञ समिति ने एक रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और आने वाले वर्षों में पेट्रोल-डीजल वाहनों की बिक्री पर चरणबद्ध तरीके से रोक लगाने की सिफारिश की है।
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रिपोर्ट में नई निजी कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके तहत 2027 तक नई कारों में 20 प्रतिशत, 2028 तक 45 प्रतिशत और 2029 तक 70 प्रतिशत कारें इलेक्ट्रिक करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद 1 जनवरी 2031 से दिल्ली-एनसीआर में नई पेट्रोल और डीजल निजी कारों की बिक्री बंद करने और केवल इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की गई है।
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समिति ने केवल निजी कारों तक ही बदलाव सीमित रखने का सुझाव नहीं दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, 1 अप्रैल 2027 से नए ऑटो, दोपहिया टैक्सी, डिलीवरी वाहन और हल्के मालवाहक वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक श्रेणी में करने की सिफारिश है। वहीं, 1 अप्रैल 2028 से नई कैब-टैक्सी, बस और गैर-परिवहन दोपहिया वाहनों को भी इलेक्ट्रिक करने का प्रस्ताव है। मध्यम और भारी मालवाहक वाहनों को भी 2031-32 तक चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक करने की योजना सुझाई गई है।
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पुराने वाहनों पर भी सख्ती
प्रदूषण कम करने के लिए पुराने पेट्रोल-डीजल वाहनों को भी धीरे-धीरे सड़कों से हटाने का प्रस्ताव है। समिति ने बीएस-1, बीएस-2 और बीएस-3 वाहनों को हटाने की सिफारिश की है। बीएस-4 वाहनों को भी 2030 तक चरणबद्ध तरीके से बाहर करने का प्रस्ताव है। सर्दियों में प्रदूषण बढ़ने के दौरान बीएस-4 वाहनों के इस्तेमाल पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया गया है। वहीं, बीएस-6 दोपहिया वाहनों को 2035 और चार पहिया वाहनों को 2040 तक चरणबद्ध तरीके से हटाने की सिफारिश की गई है।
घर में चार्जर लगाने के लिए आसान नियम
रिपोर्ट में इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए चार्जिंग की सुविधा आसान बनाने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत सोसायटी में अपनी तय पार्किंग की जगह पर ईवी चार्जर लगाने के लिए आरडब्ल्यूए की एनओसी की जरूरत खत्म करने का प्रस्ताव है। इसके लिए केवल सूचना देना पर्याप्त होगा। बिजली वितरण कंपनियों को भी ईवी चार्जिंग के लिए कनेक्शन की मांग मिलने के बाद 15 दिन के भीतर कनेक्शन देने की सिफारिश की गई है।
ईवी खरीदने पर मिल सकती है आर्थिक मदद
लोगों को पेट्रोल-डीजल वाहनों से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर ले जाने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन देने का भी प्रस्ताव है। पुरानी गाड़ी स्क्रैप कर नई इलेक्ट्रिक कार या टैक्सी खरीदने पर एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि और एक लाख रुपये तक का स्क्रैपेज बोनस देने की सिफारिश की गई है। इसी तरह इलेक्ट्रिक ऑटो पर 50 हजार रुपये और इलेक्ट्रिक दोपहिया पर 30 हजार रुपये तक की सहायता का प्रस्ताव है।
2028 तक दिल्ली की सड़कों पर उतरेंगी 6972 नई ई-बसें
दिल्ली में अधिक से अधिक लोगों तक सार्वजनिक परिवहन पहुंचाकर जीवाश्म ईंधन को कम करने के लिए प्रदेश सरकार की बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों को चलाने की योजना है। वर्ष 2028 तक दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में 6972 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल हो जाएंगी। इसी अक्तूबर तक 150 ई-बसें समेत दिसंबर 2026 तक 842 ई बसें डीटीसी के बेड़े में शामिल हो रहीं हैं। दिल्ली में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण एक ओर जहां सड़कों पर दौड़ रहे वाहन हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को दिल्ली प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंचाने की तैयारी है।
वर्तमान में दिल्ली परिवहन निगम की 6858 बसें दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रही हैं। इनमें से 1750 सीएनजी बसें हैं। इनके अलावा 5088 इलेक्ट्रिक बसें चलती हैं। अब डीटीसी के बेड़े में तीन वर्षों में 6972 नई ई-बसें शामिल करने की योजना है। वर्ष 2026 दिसंबर तक 842 इलेक्ट्रिक बसें मिलेंगी। वर्ष 2027 में 2800 इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा डीटीसी में शामिल होगा। वर्ष 2028 में बेड़े में 3330 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होंगी।
12 मीटर की 2508 बसें आएंगी
वर्ष 2028 तक दिल्ली परिवहन निगम के बेड़े में आने वाली कुल बसों में 2508 बसें 12 मीटर की होंगी। वर्ष 2026 में 608 बसें, वर्ष 2027 में 1400 बसें और वर्ष 2028 में 500 बसें मिलेंगी।
संकरे रास्तों के लिए सात मीटर की 500 ई बसें चलेंगी
दिल्ली की चौड़ी सड़कों पर जहां 12 मीटर की बसें चलेंगी। वहीं, कम चौड़े और घनी आबादी वाले रास्तों के लिए सात मीटर लंबाई वाली 500 बसों चलेंगी।
सबसे अधिक आएंगी नौ मीटर लंबी बसें
राजधानी में सबसे अधिक नौ मीटर वाली नई ई बसों को लाने की योजना है। वर्ष 2026 में 234 बसें, वर्ष 2027 में 1400 बसें और वर्ष 2028 में 2330 बसें मिलेंगी। दिसंबर 2028 तक 3964 नौ मीटर की लंबी इलेक्ट्रिक बसें होंगी।
दिल्ली-एनसीआर में नए ऑटो सिर्फ इलेक्ट्रिक होंगे, सीएनजी की भी होगी विदाई
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए अब ऑटो और मालवाहक तिपहिया वाहनों को भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने की तैयारी है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की विशेषज्ञ समिति ने नए तिपहिया वाहनों के पंजीकरण को लेकर चरणबद्ध तरीके से सख्ती करने की सिफारिश की है। इसके तहत आने वाले वर्षों में नए सीएनजी, पेट्रोल और डीजल तिपहिया वाहनों का पंजीकरण बंद कर केवल इलेक्ट्रिक ऑटो और ई-लोडर को ही मंजूरी देने का प्रस्ताव है।
प्रस्ताव के मुताबिक, दिल्ली में 1 जनवरी 2027 से नए तिपहिया वाहनों का पंजीकरण केवल इलेक्ट्रिक श्रेणी में किया जाएगा। इसके बाद एनसीआर के अधिक वाहन घनत्व वाले जिले गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर में 1 जनवरी 2028 से केवल इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों का पंजीकरण होगा। एनसीआर के बाकी जिलों में यह व्यवस्था 1 जनवरी 2029 से लागू करने का प्रस्ताव है। यानी इसके बाद पूरे एनसीआर में नए सीएनजी और पेट्रोल-डीजल तिपहिया वाहनों के पंजीकरण की अनुमति नहीं होगी। पुराने डीजल तिपहिया वाहनों को लेकर भी पहले से सख्ती है। ऐसे वाहनों को 31 दिसंबर 2026 तक सड़कों से हटाने का आदेश जारी किया जा चुका है।
सीएनजी को भी नहीं माना पूरा समाधान
रिपोर्ट में कहा गया है कि सीएनजी वाहन पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में सीधे तौर पर कम धुआं छोड़ते हैं, लेकिन इनके इंजन से नाइट्रोजन ऑक्साइड (नॉक्स) का उत्सर्जन होता है। यह हवा में मौजूद दूसरे तत्वों के साथ मिलकर बेहद छोटे कण बनाता है, जिन्हें सेकेंडरी पार्टिकुलेट मैटर कहा जाता है।