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विश्व स्ट्रोक दिवस: स्ट्रोक से बचना है तो तंबाकू से बनाएं दूरी
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देश में हर साल 13.5 लाख मौतें, स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 फीसदी के लिए तंबाकू जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तंबाकू का सेवन न केवल फेफड़ों बल्कि दिल और दिमाग की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों को तंबाकू से दूर रहने और इसकी लत छोड़ने के लिए समय पर मदद लेने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में हर साल करीब 13.5 लाख मौतें तंबाकू के सेवन से जुड़ी होती हैं। ऐसे में केवल जागरूकता फैलाना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए उचित उपचार और लगातार सहायता देना भी जरूरी है।
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों के 2024 के विश्लेषण के अनुसार, भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 फीसदी का योगदान तंबाकू के सेवन का था। वहीं, बढ़े हुए सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप के ऊपरी स्तर का योगदान 56 फीसदी था। इससे साफ है कि स्ट्रोक से बचाव के लिए तंबाकू छोड़ने के साथ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।
न्यूरोसर्जरी और न्यूरोसाइंसेज डॉ. यशपाल सिंह बुंडेला के अनुसार, निकोटीन की लत के कारण तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है। कई लोग इसके नुकसान जानते हुए भी इसका सेवन जारी रखते हैं। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह और लगातार मदद की जरूरत होती है। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसे उपचार भी डॉक्टर की सलाह पर मददगार हो सकते हैं। उनके अनुसार, देश में तंबाकू का इस्तेमाल सिगरेट और बीड़ी के अलावा खैनी, गुटखा और जर्दा जैसे उत्पादों के रूप में भी किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निकोटीन की लत लग सकती है, जबकि तंबाकू के जहरीले रसायन दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए तंबाकू के सभी रूपों से बचना जरूरी है।
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दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने की जरूरत
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डॉ. विकास मित्तल के अनुसार, तंबाकू नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपाय अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक से बचने के लिए तंबाकू छोड़ने के साथ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। युवाओं को तंबाकू की लत से बचाना और इसकी लत से जूझ रहे लोगों को उपचार उपलब्ध कराना भी अहम है। समय रहते जोखिम कारकों पर ध्यान देकर स्ट्रोक और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। तंबाकू का सेवन न केवल फेफड़ों बल्कि दिल और दिमाग की रक्त वाहिकाओं को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। विश्व स्ट्रोक दिवस पर विशेषज्ञों ने लोगों को तंबाकू से दूर रहने और इसकी लत छोड़ने के लिए समय पर मदद लेने की सलाह दी है। विशेषज्ञों के अनुसार, देश में हर साल करीब 13.5 लाख मौतें तंबाकू के सेवन से जुड़ी होती हैं। ऐसे में केवल जागरूकता फैलाना काफी नहीं है, बल्कि लोगों को तंबाकू छोड़ने के लिए उचित उपचार और लगातार सहायता देना भी जरूरी है।
ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों के 2024 के विश्लेषण के अनुसार, भारत में स्ट्रोक से होने वाली मौतों में 12 फीसदी का योगदान तंबाकू के सेवन का था। वहीं, बढ़े हुए सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी रक्तचाप के ऊपरी स्तर का योगदान 56 फीसदी था। इससे साफ है कि स्ट्रोक से बचाव के लिए तंबाकू छोड़ने के साथ ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना भी जरूरी है।
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न्यूरोसर्जरी और न्यूरोसाइंसेज डॉ. यशपाल सिंह बुंडेला के अनुसार, निकोटीन की लत के कारण तंबाकू छोड़ना मुश्किल हो सकता है। कई लोग इसके नुकसान जानते हुए भी इसका सेवन जारी रखते हैं। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह और लगातार मदद की जरूरत होती है। निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी जैसे उपचार भी डॉक्टर की सलाह पर मददगार हो सकते हैं। उनके अनुसार, देश में तंबाकू का इस्तेमाल सिगरेट और बीड़ी के अलावा खैनी, गुटखा और जर्दा जैसे उत्पादों के रूप में भी किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, निकोटीन की लत लग सकती है, जबकि तंबाकू के जहरीले रसायन दिल और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए तंबाकू के सभी रूपों से बचना जरूरी है।
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दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने की जरूरत
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के डॉ. विकास मित्तल के अनुसार, तंबाकू नियंत्रण के लिए वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित उपाय अपनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक से बचने के लिए तंबाकू छोड़ने के साथ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना, नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना जरूरी है। युवाओं को तंबाकू की लत से बचाना और इसकी लत से जूझ रहे लोगों को उपचार उपलब्ध कराना भी अहम है। समय रहते जोखिम कारकों पर ध्यान देकर स्ट्रोक और दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है।