अस्पताल में नहीं सुधरे हालात, धूल फांक रही मशीनें
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मांडीखेड़ा गांव में 11 लाख की आबादी में पर बने अल आफिया अस्पताल में काफी कुछ बदला है मगर यहां अभी और सुधार की दरकार है। अभी भी सी-आर्म जैसी हड्डी जोड़ने वाली मशीन पिछले 17 साल से धूंल फांक रही है।
वहीं सीटी स्कैन व एमआरआई जैसी सेवाओं के लिए भी मरीजों को गुड़गांव और अलवर का रुख करना पड़ रहा है। हालांकि पिछले सप्ताह सीजेरियन शुरू हो जाने से औरतों को बेहतर सहूलियतें मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले डिलीवरी के दौरान कठिन हालात में महिलाओं को नल्हड़, दिल्ली, गुड़गांव और अलवर रेफर कर दिया जाता था। जिला स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि पहले से बेहतर सुविधाएं मरीजों को मिल रही हैं।
शौचालयों में साथ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखा जा रहा है। इस साल अलआफिया अस्पताल मांडीखेड़ा को पावर हॉटलाइल जोड़ दिया गया है।
साथ ही पार्किंग, सीसीटीवी कैमरे, एक्स-रे, अल्ट्रासांउड, आरओ वाटर, आधुनिक लैब की सेवाएं भी आरंभ हो चुकी हैं। ब्लड बैंक, आई सर्जरी का काम भी जोर शोर से चल रहा है।
पिछले साल जहां मरीजों की संख्या प्रतिदिन तीन सौ के आसपास थी वह अब बढ़कर चार सौ के पार पहुंच गई। सिविल सर्जन डॉ. बीके राजौरा ने बताया कि पिछले एक साल में काफी कुछ सुधार हुआ है।
18 नये डॉक्टर आने से मांडीखेड़ा सामान्य अस्पताल में सीजेरियन ऑपरेशन शुरू हो गये हैं। नर्सिंग स्कूल बन रहा है तथा रक्त के लिए दुर्घटनाग्रस्त एवं जापे वाली महिलाओं को रैफर नहीं किया जाता।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि कोई सुविधा न मिलने की अवस्था में बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बात रखें। साथ ही बाहर से आकर यहां सेवारत डॉक्टरों के साथ बेहतर व्यवहार करें। ताकि वो बीच में ही मेवात से नौकरी छोड़कर न जाये। क्योंकि पहले काफी डॉक्टर इन्हीं कारणों की वजह से चले गये थे।