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Delhi NCR News: हाईकोर्ट ने समलैंगिक जोड़ों को मेडिकल प्रतिनिधि मान्यता देने की याचिका पर केंद्र की चुप्पी पर नाराजगी जताई
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि समलैंगिक जोड़ों को चिकित्सा उपचार के दौरान मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने की याचिका पर एक साल बीत जाने के बावजूद जवाब क्यों नहीं दिया गया। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि जब लोगों को समलैंगिक साथी के साथ सहमति संबंध में रहने की अनुमति है, तो अधिकारियों को नियमों में भी बदलाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून पुरुष और महिला के बीच सहमति संबंध को मान्यता देता है। फिर पुरुष और पुरुष के बीच सहमति संबंध को क्यों नहीं मानेगा?अदालत ने जुलाई 2025 में केंद्र और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को नोटिस जारी किया था। अदालत ने पूछा कि अधिकारियों ने अब तक जवाब क्यों नहीं दाखिल किया। आपको बताना होगा कि आपका रुख क्या है। यह लड़ाई किसके लिए है? न्यायमूर्ति ने कहा। सरकार के वकील ने हाल ही में नियुक्त होने का हवाला देते हुए निर्देश लेने के लिए समय मांगा। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट सौरभ किरपाल ने कहा कि जुलाई में केंद्र को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। अदालत एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 2015 से अपनी साथी के साथ संबंध में हैं। दोनों ने 2023 में न्यूजीलैंड में शादी की और 2018 से दिल्ली में समलैंगिक साथी के रूप में रह रहे हैं।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को केंद्र सरकार से पूछा कि समलैंगिक जोड़ों को चिकित्सा उपचार के दौरान मेडिकल प्रतिनिधि के रूप में मान्यता देने की याचिका पर एक साल बीत जाने के बावजूद जवाब क्यों नहीं दिया गया। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांता शर्मा ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि जब लोगों को समलैंगिक साथी के साथ सहमति संबंध में रहने की अनुमति है, तो अधिकारियों को नियमों में भी बदलाव करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून पुरुष और महिला के बीच सहमति संबंध को मान्यता देता है। फिर पुरुष और पुरुष के बीच सहमति संबंध को क्यों नहीं मानेगा?अदालत ने जुलाई 2025 में केंद्र और नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को नोटिस जारी किया था। अदालत ने पूछा कि अधिकारियों ने अब तक जवाब क्यों नहीं दाखिल किया। आपको बताना होगा कि आपका रुख क्या है। यह लड़ाई किसके लिए है? न्यायमूर्ति ने कहा। सरकार के वकील ने हाल ही में नियुक्त होने का हवाला देते हुए निर्देश लेने के लिए समय मांगा। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट सौरभ किरपाल ने कहा कि जुलाई में केंद्र को जवाब दाखिल करने का आखिरी मौका दिया गया था, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। अदालत एक महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो 2015 से अपनी साथी के साथ संबंध में हैं। दोनों ने 2023 में न्यूजीलैंड में शादी की और 2018 से दिल्ली में समलैंगिक साथी के रूप में रह रहे हैं।