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टाइगर श्रॉफ पर हमला मामला: आतंकियों वाला तरीका अपनाकर वारदात, चार गैंगस्टर चला रहे लॉरेंस गिरोह; कई अहम खुलासे

Thu, 22 Oct 2026 06:04 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 22 Oct 2026 06:04 AM IST
सार

वारदात में शामिल शूटर, हथियार देने वाले व रेकी करने वाले आदि सभी आरोपी एक-दूसरे को नहीं जानते हैं। सभी को अलग-अलग काम सौंपा जाता है। फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग वाली घटना में गैंगस्टरों ने यही तरीका अपनाया है।

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Terrorist-style tactics used for the crime; four gangsters are running the Lawrence gang
demo - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गैंगस्टर अब आतंकी संगठनों की तर्ज पर वारदात को अंजाम दे रहे हैं। यानी वारदात में शामिल शूटर, हथियार देने वाले व रेकी करने वाले आदि सभी आरोपी एक-दूसरे को नहीं जानते हैं। सभी को अलग-अलग काम सौंपा जाता है। फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग वाली घटना में गैंगस्टरों ने यही तरीका अपनाया है। मुंबई में शूटरों को हथियार उपलब्ध कराने वाले हरियाणा के सोनीपत जिले के रहने वाले कुणाल (21) से पूछताछ में ये खुलासा सामने आया है।

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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समय लारेंस बिश्नोई गैंग को उसके चार सहयोगी गैंगस्टर हैरी बॉक्सर, रणदीप मलिक, अनिल पंडित, अरजू बिश्नोई चला रहे हैं। ये सब जहां मौका लगता है, वहां उगाही आदि के लिए वारदात करवा रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने जिस अरुण को पकड़ा था, वह इन चारों गैंगस्टर के संपर्क में था।
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अपराध की दुनिया में हथियार तस्कर कहे जाने वाले अरुण ने रणदीप के कहने पर सोनीपत में उगाही की रकम नहीं देने पर मनी एक्सचेंजर पर फायरिंग करवाई थी। इस मामले में वह जेल गया था। जुलाई महीने में ही वह जेल से बाहर आया था। वह काफी वारदात करवा चुका है। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि अरुण ने पूछताछ में कहा कि उसने उत्तर प्रदेश निवासी राधा (23) और बबिता (23) को 10 से 12 हजार रुपये का लालच देकर मुंबई हथियार पहुंचाने के लिए तैयार किया था। अरुण राधा व बबिता के साथ काम कर चुका है। राधा विधवा है, जबकि बबिता की अभी शादी नहीं हुई है।
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लारेंस गैंग के लिए भर्ती कर रहा था अरुण
दिल्ली पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अरुण हथियार तस्करी की दुनिया में काफी नाम है। वह लारेंस बिश्नोई गैंग के लिए शूटर भर्ती कर रहा था। उसे जिस तरह अच्छा हथियार तस्कर कहा जाता है उसी तरह उसे अच्छा भर्ती करने वाला भी कहा जाता है। वह युवाओं को जल्द ही झांसा में ले लेता था।

वारदात का ये तरीका अपनाया
स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि गैंगस्टर अब एक व्यक्ति को पूरी वारदात की जिम्मेदारी नहीं सौंपते हैं, जैसे कि पहले होता था। अब एक वारदात के लिए सभी को अलग-अलग काम सौंपा जाता है। यानी वारदात किसी और को करनी है, हथियार किसी और को पहुंचाने हैं, रेकी किसी और को करनी है, वारदात को अंजाम देने वालों को पैसा कोई और देगा..आदि। फिल्म अभिनेता पर फायरिंग, हथियार पहुंचाने और रेकी करवाने वाले सभी आरोपी अलग-अलग हैं।

हथियार देने वालों के कपड़े के फोटो भेजे गए थे
वारदात में शामिल किसी भी आरोपी को एक-दूसरे मिलवाया नहीं जाता है और न ही चेहरा दिखाया जाता है। अरुण ने जब बबिता व राधा से मुंबई में हथियार पहुंचवाए तो उनको शूटरों को न चेहरा दिखाया और न ही कोई संपर्क दिया गया। इनको शूटर की लोकेशन भेजी और शूटर के कपड़ों की यानी पहने हुए कपड़ों की बिना चेहरे वाली फोटो भेजी गई थी। ये उस लोकेशन पर उस व्यक्ति को हथियार देकर आई थीं।


हालांकि आरोपियों तक हथियार पहुंचाने के लिए इस तरीके को डेड लेटर बॉक्स कहा जाता है। यानी इस तरीके में हथियार या सामान किसी सुनसान या तयशुदा जगह पर चुपचाप रख दिया जाता है। अमृतसर की एक गुप्त जगह पर पिस्टल और कारतूस रखे गए थे, जिसे कुणाल और सुमित नामक आरोपियों ने वहां से उठाया था। कुणाल और सुमित को यह तक नहीं पता था कि अमृतसर में वह हथियार किसने रखे थे।
 

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