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Delhi: फांसी घर को फर्जी करार देते तुरंत हटाने के निर्देश, विधानसभा अध्यक्ष बोले- जन भावनाओं से किया गंभीर छल

Fri, 08 Aug 2025 01:09 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Fri, 08 Aug 2025 01:09 AM IST
सार

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को तत्कालीन आप सरकार की ओर से बनाए गए फांसी घर को फर्जी करार देते हुए तत्काल हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कक्ष को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा।

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Terming the hanging house as fake the Speaker of the Assembly said- a serious fraud has been committed with th
विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता - फोटो : दिल्ली विधानसभा

विस्तार

विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने बृहस्पतिवार को तत्कालीन आप सरकार की ओर से बनाए गए फांसी घर को फर्जी करार देते हुए तत्काल हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस कक्ष को पुराने स्वरूप में लाया जाएगा। उन्होंने पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति को सौंपी है। उन्होंने कहा कि यह निर्माण न केवल ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ है बल्कि देश की जनता की भावनाओं के साथ किया गया गंभीर छल है।

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अगस्त 2022 में भारत छोड़ो आंदोलन की वर्षगांठ पर इस कथित फांसीघर का उद्घाटन किया गया जिसमें यह संदेश दिया गया कि यहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी और एक सुरंग लाल किले तक जाती थी लेकिन राष्ट्रीय अभिलेखागार, आईसीएचआर, आईजीएनसीए, दिल्ली विश्वविद्यालय, जेएनयू के इतिहासकारों और एमसीडी की हेरिटेज सेल से प्राप्त दस्तावेज के आधार पर यह प्रमाणित हो गया कि ऐसा कोई फांसी घर या सुरंग कभी इस परिसर में मौजूद नहीं थी।
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तीन दिनों की चर्चा के बावजूद विपक्ष की ओर से इस निर्माण को लेकर कोई तर्कसंगत आधार या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया। यह एक इरादतन फर्जीवाड़ा है जिसमें करोड़ों रुपये खर्च कर जनता को गुमराह किया गया और विधानसभा की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई। विजेंद्र गुप्ता के संबोधन के दौरान आप विधायकों ने विरोध किया और नारेबाजी की। इसके बाद आतिशी के नेतृत्व में सदन से बहिष्कार कर दिया।
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आप नेताओं को भेजा जाएगा समन
विजेंद्र गुप्ता ने बताया कि अब भवन को उसके 1912 के मूल स्वरूप में बहाल किया जाएगा। दोनों टिफिन रूम का मूल नक्शा स्थापित किया जाएगा। अगस्त 2022 को लगाए गए शिलापट्ट को हटाकर पूरे मामले की जांच विधानसभा की विशेषाधिकार समिति करेगी, जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल और उपाध्यक्ष राखी बिड़लान को समन किया जाएगा। 


इस ऐतिहासिक धरोहर के साथ जो छल किया गया, वह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि नैतिक अपराध है। इससे मेरी ही तरह हजारों लोगों की भावनाएं आहत हुईं हैं। देश कभी इस तरह के कुकृत्य को माफ नहीं करेगा। जब यह फांसी घर बनाया गया था तब वे और विपक्ष के अन्य नेता भावनात्मक रूप से इससे जुड़ गए थे। हमें लगा कि यह कोई शहादत स्थल है लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो विश्वासघात जैसा महसूस हुआ।

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