{"_id":"5df4fcff8ebc3e880d69b920","slug":"tension-in-jamia-even-after-24-hours-police-force-deployed-over-cab-issue","type":"story","status":"publish","title_hn":"नागरिकता संशोधन अधिनियम : जामिया में 24 घंटे बाद भी तनाव, पुलिस बल तैनात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नागरिकता संशोधन अधिनियम : जामिया में 24 घंटे बाद भी तनाव, पुलिस बल तैनात
Sun, 15 Dec 2019 03:11 AM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Sun, 15 Dec 2019 03:11 AM IST
विज्ञापन
जामिया के छात्रों का प्रदर्शन जारी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में 24 घंटे बाद भी तनाव बना रहा। शनिवार दिनभर कैंपस के भीतर चला विरोध प्रदर्शन शाम को एक बार कैंपस के बाहर आ गया। नारेबाजी के बीच छात्रों ने कैंपस के सामने मौलाना मोहम्मद अली जौहर मार्ग बंद कर हंगामा शुरू कर दिया।
अचानक उग्र हुए छात्रों ने डिवाइडर पर लगी लोहे की रेलिंग को तोड़ डाला। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को समझाने का प्रयास करता रहा। इधर हंगामे को देखते हुए एस्कोर्ट अस्पताल के पास से यूनिवर्सिटी और ओखला से जुलेना की ओर आने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया। देर शाम तक हंगामा और नारेबाजी जारी थी।
छात्र केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी के अलावा अधिनियम को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। वहीं छात्रों का कहना था कि शुक्रवार को जिन्होंने कैंपस के बाहर हंगामा किया, वे स्थानीय लोग थे, छात्र नहीं।
विज्ञापन
जामिया विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में शुक्रवार को हुए हंगामे व बवाल को देखते हुए यूनिवर्सिटी के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। पुलिस को देखकर छात्र भड़कें नहीं, इसलिए एहतियात के तौर पर पुलिस को कैंपस से करीब एक किलोमीटर दूर सराय जुलेना गांव व सूर्या होटल के नजदीक तैनात किया गया था। इसके अलावा कुछ फोर्स को जामिया नगर थाने और सुखदेव विहार के पास भी तैनात रखा गया।
वरिष्ठ पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऊपर से आदेश है कि छात्रों से नरमी से पेश आना है। इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस बल को कैंपस से दूर ही रखा गया। मामले की छानबीन कर रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्रों के अलावा कुछ लोग भीड़ में घुसकर छात्रों को उकसा रहे हैं। पुलिस ऐसे लोगों पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को देर शाम छोड़ दिया गया था। बवाल के दौरान घायल हुए 12 में से 10 पुलिसकर्मियों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
गंभीर रूप से घायल दो पुलिसकर्मियों की तबीयत में पहले से सुधार है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शनिवार शाम को हुए हंगामे के दौरान छात्रों को समझाकर उन्हें हटाने के प्रयास किए गए। असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है। डीसीपी चिन्मय बिश्वाल का कहना है कि शुक्रवार को जो हंगामा हुआ था, उसका मामला दर्ज नहीं किया गया है, छानबीन की जा रही है। वहीं डीसीपी ने घायल पुलिसकर्मियों का हालचाल लिया।
गौरतलब है कि शुक्रवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर पुलिस व छात्र आमने-सामने आ गए थे। छात्रों के पथराव करने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर आंसू गैस के गोले दागे थे।
मामले को लेकर जामिया के पीआरओ अहमद अजीम का कहना है कि पहली बात तो यही है कि प्रदर्शन विश्वविद्यालय परिसर में नहीं हुआ था और दूसरे वह जामिया का भी नहीं था। उस विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल रहे। हमने इस बारे में छात्रों से बात की है और अब वे शांतिपूर्वक विरोध प्रकट कर रहे हैं।
विज्ञापन
अचानक उग्र हुए छात्रों ने डिवाइडर पर लगी लोहे की रेलिंग को तोड़ डाला। विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों को समझाने का प्रयास करता रहा। इधर हंगामे को देखते हुए एस्कोर्ट अस्पताल के पास से यूनिवर्सिटी और ओखला से जुलेना की ओर आने वाले ट्रैफिक को डायवर्ट कर दिया गया। देर शाम तक हंगामा और नारेबाजी जारी थी।
विज्ञापन
छात्र केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी के अलावा अधिनियम को वापस लेने की मांग पर अड़े रहे। वहीं छात्रों का कहना था कि शुक्रवार को जिन्होंने कैंपस के बाहर हंगामा किया, वे स्थानीय लोग थे, छात्र नहीं।
विज्ञापन
जामिया विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन अधिनियम के विरोध में शुक्रवार को हुए हंगामे व बवाल को देखते हुए यूनिवर्सिटी के आसपास भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। पुलिस को देखकर छात्र भड़कें नहीं, इसलिए एहतियात के तौर पर पुलिस को कैंपस से करीब एक किलोमीटर दूर सराय जुलेना गांव व सूर्या होटल के नजदीक तैनात किया गया था। इसके अलावा कुछ फोर्स को जामिया नगर थाने और सुखदेव विहार के पास भी तैनात रखा गया।
वरिष्ठ पुलिस सूत्रों का कहना है कि ऊपर से आदेश है कि छात्रों से नरमी से पेश आना है। इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस बल को कैंपस से दूर ही रखा गया। मामले की छानबीन कर रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि छात्रों के अलावा कुछ लोग भीड़ में घुसकर छात्रों को उकसा रहे हैं। पुलिस ऐसे लोगों पर नजर बनाए हुए है। शुक्रवार को हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को देर शाम छोड़ दिया गया था। बवाल के दौरान घायल हुए 12 में से 10 पुलिसकर्मियों को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई।
गंभीर रूप से घायल दो पुलिसकर्मियों की तबीयत में पहले से सुधार है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शनिवार शाम को हुए हंगामे के दौरान छात्रों को समझाकर उन्हें हटाने के प्रयास किए गए। असामाजिक तत्वों की पहचान की जा रही है। डीसीपी चिन्मय बिश्वाल का कहना है कि शुक्रवार को जो हंगामा हुआ था, उसका मामला दर्ज नहीं किया गया है, छानबीन की जा रही है। वहीं डीसीपी ने घायल पुलिसकर्मियों का हालचाल लिया।
गौरतलब है कि शुक्रवार को नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर पुलिस व छात्र आमने-सामने आ गए थे। छात्रों के पथराव करने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर आंसू गैस के गोले दागे थे।
मामले को लेकर जामिया के पीआरओ अहमद अजीम का कहना है कि पहली बात तो यही है कि प्रदर्शन विश्वविद्यालय परिसर में नहीं हुआ था और दूसरे वह जामिया का भी नहीं था। उस विरोध-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल रहे। हमने इस बारे में छात्रों से बात की है और अब वे शांतिपूर्वक विरोध प्रकट कर रहे हैं।