योगेंद्र के खिलाफ अब क्या है 'केजरी प्लान'
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आम आदमी पार्टी के नेता आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं। दोनों खेमे पार्टी पर अपना वर्चस्व जमाने की जुगत में हैं। हालांकि, राष्ट्रीय परिषद के शनिवार के फैसले से टीम केजरीवाल को बढ़त मिल गई है।
अब इनकी कोशिश एक सप्ताह के भीतर ऐसा ढांचा तैयार करने की है, जिससे विद्रोही नेताओं से आप की दोबारा भद्द न पिटे। रविवार की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के फैसले इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
दूसरे खेमे की अगुवाई कर रहे योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण को आप की दूसरी अहम इकाइयों से भी बाहर कर दिया गया है। सूत्र बताते हैं कि टीम केजरीवाल की कोशिश है कि उठापटक के इसी माहौल में कड़ा फैसला ले लिया जाए।
भूषण को बाहर करना का रास्ता हो गया है साफ
जिससे बार-बार आप को बदनामी न झेलनी पड़े। एक सप्ताह में विद्रोही नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो अनुशासन समिति से प्रशांत भूषण को निकालने से इसका रास्ता भी साफ हो गया है।
नई समिति योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, प्रो. आनंद कुमार व अजीत झा समेत दूसरे बागी नेताओं के खिलाफ पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों की जांच करेगी।
इसके आधार पर उन्हें पार्टी से बाहर निकाला जा सकता है।
मीडिया से बात करने की मनाही
आम आदमी पार्टी ने अपने विधायकों को सलाह दी है कि वह अपनी विधान सभा के बारे में ही मीडिया से बात कर सकते हैं। दूसरे किसी मसले पर मीडिया से बात करने की इजाजत उन्हें नहीं है।
पार्टी की पूर्व अनुमति के बिना विधायक मीडिया से बात नहीं करेंगे। आप नेता आशुतोष के मुताबिक, इस तरह के मामले अनुशासनहीनता के दायरे में आएंगे।
वहीं, राष्ट्रीय परिषद ने प्रस्ताव पारित किया है कि कोई नेता अगर पार्टी लाइन से हटकर बात करता है तो पीएसी को उस पर कार्रवाई का अधिकार होगा। सूत्र बताते हैं कि वरिष्ठ नेताओं में शुमार योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के नजदीकियों की पार्टी में गहरी पैठ है। मुमकिन है कि आने वाले समय में वह दोनों नेताओं के इशारे पर विरोध के सुर बुलंद करें।
लोकपाल की नियुक्ति पर योगेंद्र-दिलीप आमने सामने
योगेंद्र यादव ने कहा कि मैं हैरान हूं कि लोकपाल आंदोलन से पैदा हुई पार्टी ने अपने ही लोकपाल को बाहर कर दिया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी को लोकपाल नियुक्त करने का कोई अधिकार नहीं है। पार्टी के संविधान के अनुसार, लोकपाल खुद ही अपना उत्तराधिकारी तय करेगा।
वहीं दिलीप पांडे ने योगेंद्र का जवाब देते हुए कहा कि श्रीमान, आपने फिर पार्टी का संविधान नहीं पढ़ा। इसका लिंक पार्टी की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूद है। इसमें साफ-साफ लिखा है कि राष्ट्रीय कार्यकारिणी के पास लोकपाल की नियुक्ति का अधिकार है।
इसके मुताबिक, अगर चार सप्ताह के भीतर पूर्व लोकपाल ने अपने उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं की तो राष्ट्रीय कार्यकारिणी की जिम्मेदारी है कि वह अपने लोकपाल को नियुक्त करे। (पार्टी बता रही है कि लोकपाल का कार्यकाल दिसंबर में ही पूरा हो गया था।