शिक्षक-प्रधानाध्यापक संवाद: CM केजरीवाल बोले- टेंट वाले स्कूल बन गए टैलेंट वाले, नेता प्रतिपक्ष ने उठाए सवाल
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार पहले चाहती थी कि प्राइवेट स्कूल से बेहतर सरकारी स्कूल बने, वो बन गए। अब सोच है कि विश्व के स्कूलों से बेहतर बने।
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त्यागराज स्टेडियम में रविवार को फिनलैंड, सिंगापुर और कैंब्रिज से ट्रेनिंग ले चुके सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों से संवाद के मौके पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली की शिक्षा क्रांति की वजह से टेंट वाले स्कूल अब टैलेंट वाले बन गए हैं। शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ शिक्षकों की ट्रेनिंग से स्कूल में माहौल बदला और नतीजे अच्छे आने लगे। आलोचक भी मानते हैं कि दिल्ली के शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव हुआ है।
सरकार पहले चाहती थी कि प्राइवेट स्कूल से बेहतर सरकारी स्कूल बने, वो बन गए। अब सोच है कि विश्व के स्कूलों से बेहतर बने। पंजाब में भी शिक्षा क्रांति पहुंच गई है। हर विधानसभा क्षेत्र में एक ‘स्कूल ऑफ एमिनेंस’ चालू हो रहे हैं और शिक्षकों का पहला दल सिंगापुर ट्रेनिंग के लिए जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहली बार सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और प्रिंसिपल को विदेशों में ट्रेनिंग दिलवाने की कोशिश की जा रही है। यह योजना आजादी के बाद ही बनी होती तो अभी तक देश से गरीबी दूर हो गई होती। भारत तभी आगे बढ़ेगा, जब हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे।
मुख्यमंत्री बने 8 साल हो गए हैं। इस दौरान मात्र दो बार विदेश गया हूं। एक बार जब मदर टेरेसा का निधन हुआ तब इटली गया था। दूसरी बार साउथ कोरिया। मकसद है कि शिक्षक विदेश जाएं, मुख्यमंत्री के विदेश जाने क्या होगा? जबकि पांच साल में नेता पूरी दुनिया का चक्कर लगा आते हैं। स्कूल की बिल्डिंग अच्छी बना लेते, टीचर्स को विदेश घूमा लाते, लेकिन नतीजे अच्छे नहीं आते, तब कहा जाता कि केजरीवाल पैसे बर्बाद कर रहा है।
एलजी शिक्षकों का अनुभव सुनते तो उन्हें भी गर्व होता
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर एलजी भी शिक्षकों के अनुभवों को सुनते तो उन्हें भी गर्व होता। उन्हें शिक्षकों के अनुभवों की वीडियो भेजूंगा। उम्मीद है कि इसके बाद वो फिनलैंड की फाइल नहीं रोकेंगे। देश में सामंती सोच चली आ रही कि सरकारी स्कूलों में गरीब बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों को ट्रेनिंग के लिए विदेश भेजने की क्या जरूरत है? अगर भाजपा-कांग्रेस शासित राज्य का कोई मुख्यमंत्री कहे कि हमें भी सीखाओ, तो दिल्ली के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को कुछ दिन के लिए उधार में दे दूंगा। हमारे देश में एक प्रवृत्ति है कि कोई अच्छा काम करे, तो उसको लोग रोकते हैं, यह अच्छी बात नहीं है, इससे देश आगे नहीं बढ़ेगा।
त्यागराज स्टेडियम में विदेश से ट्रेनिंग ले चुके शिक्षकों से सीएम से किया संवाद
शिक्षकों का उत्साहवर्धन करते हुए सीएम ने कहा कि दिल्ली में जब सरकार बनी तो जज्बा था कि गरीबों के बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे। इसी जज्बे से देश-विदेश की ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में शिक्षकों को भेजना शुरू किया। लीडर वो होता है, जो जबरदस्ती नहीं करता है, वो अपने आचरण और शब्दों से सारे लोगों को प्रेरित करता है। प्रिंसिपल ने अपने आपको लीडर समझना चालू कर दिया, तो जाहिर तौर पर आपने एक बहुत बड़ी क्रांति के लिए उस स्कूल के सारे बच्चों और टीचर्स को प्रेरित करना चालू कर दिया। जब आप विदेश में जाकर स्टीफन हॉकिंग का कॉलेज देखा, तो आपके मन में यह इच्छा पैदा होनी चाहिए कि मैं वापस जाकर अपने देश के अंदर 10 स्टीफन हॉकिंग पैदा करूंगा।
बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए ट्रेनिंग कराते रहेंगे: सिसोदिया
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर भी आईआईएम में शानदार ट्रेनिंग दिलवाई। पिछले सात साल में दिल्ली सरकार ने अपने स्कूल प्रमुखों को प्रोफेशनल डेवलपमेंट के लिए सात अगल-अगल ट्रेनिंग की व्यवस्था की। हॉवर्ड तक का सफर तय किया है और इसे आगे भी इसे जारी रखेंगे। ट्रेनिंग देने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है, जिससे वो बच्चो के भविष्य के बारे में सही निर्णय ले पाते हैं।
विदेश में ट्रेनिंग ले चुके शिक्षकों ने साझा किए अनुभव
शिक्षक डॉ. राजपाल सिंह ने कहा कि कैंब्रिज दौरे के दौरान पहली बार ब्लेंडेड एप्रोच ऑफ लर्निंग के बारे में पता चला। सिंगापुर से ट्रेनिंग लिए शिक्षक मुरारी झा ने कहा कि अब लगता है कि कुछ नहीं बने तो टीचर्स बन गए वाली सोच बदल रही है। ज्योत्सना ने बताया कि मुझे 2018 में कैंब्रिज स्कूल जाने का मौका मिला। मुझे सबसे अच्छी बात यह लगी कि ये बहुत बाल केंद्रित है। असिस्टेंट प्रो. दीपिका मल्होत्रा ने फिनलैंड का अनुभव सांझा किया। कहा वहां दो चीजें ‘छात्र स्वायत्तता और ऑनरशिप’ मुझे सबसे अच्छी लगीं। इसके अलावा आशा, ब्रिजेश कुमार, अवधेश झा, ममता सलूजा समेत कई शिक्षकों ने अपने अनुभव सांझे किए।
शिक्षा मॉडल पर एलजी के आईना दिखाने से आप बौखलाई : बिधूड़ी
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा कि शिक्षा मॉडल पर उपराज्यपाल के आइना दिखाने पर आप नेता बौखलाहट में हैं। वे अपनी मर्यादाएं भूल गए हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में उपराज्यपाल के प्रति असम्मानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद अब सांसद संजय सिंह भी शालीनता भूल गए। नेता प्रतिपक्ष ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि विधानसभा सत्र बुलाकर शिक्षा मॉडल पर चर्चा करा ले। शर्त यह है कि उसमें विपक्ष को भी बोलने का अवसर दे। उन्होंने सरकार को सलाह दी है कि आपा खोने के बजाय शिक्षा पर ध्यान दे।
बिधूड़ी ने कहा कि आप नेताओं की इस भाषा से दिल्ली की जनता आहत है। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के विधानसभा में उठाए गए सवालों का जवाब दे दिया है, दिल्ली के शिक्षा मॉडल की असलियत जनता के सामने रख दी है। दिल्ली में 2012-13 में सरकारी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति 70 फीसदी से ज्यादा थी जो अब घटकर 60 फीसदी रह गई है।
नेता प्रतिपक्ष ने सीएम को दिया सुझाव
शिक्षकों को फिनलैंड में ट्रेनिंग के मामले में बिधूड़ी ने सुझाव दिया कि अगर ट्रेनिंग इतनी ही जरूरी है तो हजारों शिक्षकों को फिनलैंड भेजने के बजाय वहां से एक्सपर्ट्स को दिल्ली बुलाकर हजारों शिक्षकों को एक साथ ट्रेनिंग क्यों नहीं करा दी जाती। दिल्ली सरकार इस मामले पर केवल टकराव के लिए मुद्दा बना रही है।