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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Taking steroids is dangerous for the eyes, vision gradually goes away

Delhi NCR News: स्टेरॉयड लेना आंखों के लिए खतरनाक, धीरे-धीरे चली जाती है रोशनी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 08:32 PM IST
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-डॉक्टरों के अनुसार, देश में पहले से ही करीब 1.2 से 1.3 करोड़ लोग ग्लूकोमा से पीड़ित, देश में 85 से 90 प्रतिशत मामलों का नहीं चल पाता पता
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अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली।
बिना डॉक्टर की सलाह के स्टेरॉयड दवाओं और आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल आंखों की रोशनी के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसके इस्तेमाल के चलते देश में सेकेंडरी ग्लूकोमा के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यह बीमारी धीरे-धीरे बढ़ती है और समय पर इलाज न मिलने पर आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, लोग अक्सर एलर्जी, त्वचा रोग, सांस की समस्या या आंखों में जलन होने पर खुद से स्टेरॉयड वाली दवाएं या ड्रॉप्स इस्तेमाल कर लेते हैं। लंबे समय तक ऐसा करने से आंखों का दबाव बढ़ जाता है, जिससे आंख की नस (ऑप्टिक नर्व) को नुकसान होता है। शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखते, इसलिए मरीज को बीमारी का पता देर से चलता है।
पहले पता नहीं चलता, अंदर से होता है नुकसान



डॉक्टरों के अनुसार, देश में पहले से ही करीब 1.2 से 1.3 करोड़ लोग ग्लूकोमा से पीड़ित हैं। उन्होंने बताया कि देश में 85 से 90 प्रतिशत मामलों का पता ही नहीं चल पाता। ग्लूकोमा दुनिया में स्थायी अंधेपन का सबसे बड़ा कारण है। नेत्र विशेषज्ञ डॉ. जेएस टिटियाल के अनुसार, मौजूदा समय में स्टेरॉयड के गलत इस्तेमाल से ग्लूकोमा के मरीज बहुत ज्यादा आ रहे हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में कोई दर्द या परेशानी नहीं होती, लेकिन अंदर ही अंदर आंखों को नुकसान होता रहता है।
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इसके चलते अब युवाओं में भी बढ़ रही आंख की समस्या



डॉक्टर के अनुसार, ग्लूकोमा के कुछ आम लक्षणों में चश्मे का नंबर बार-बार बदलना, आंखों में खिंचाव, सिरदर्द, कम रोशनी में धुंधला दिखना और लाइट के चारों ओर घेरा दिखना शामिल है। आमतौर पर यह बीमारी 40 साल से ऊपर के लोगों में ज्यादा होती है, लेकिन अब बच्चों और युवाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि 40 साल से ऊपर के लोग हर 1-2 साल में आंखों की पूरी जांच जरूर कराएं। इन लोगों को डायबिटीज है या जो स्टेरॉयड दवाएं लेते हैं, उन्हें साल में एक बार जांच करानी चाहिए। सिर्फ नजर की जांच काफी नहीं होती, आंखों का दबाव और ऑप्टिक नर्व की जांच भी जरूरी है।
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