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सलाह: मानसून में रखे खान-पान का ध्यान, दूर रहेंगी बीमारियां, मंद हो जाती है जठराग्नि; पाचन में आता है बदलाव
Sun, 09 Jul 2023 12:40 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 09 Jul 2023 12:40 PM IST
सार
बरसात के दिनों जठराग्नि मंद हो जाती है। पाचन में बदलाव आता है। वर्षा ऋतु में पित्त दोष का संचय व वात दोष होता है। दूषित भोजन और पानी से पेट का संक्रमण हो सकता है।
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मानसून (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मानसून में बारिश अपने साथ बीमारियां लेकर आती है। बरसात से पहले गर्मी और उमस के कारण शरीर दुर्बल रहता है और भोजन को पचाने के लिए शरीर में विद्यमान जठराग्नि भी मंद हो जाती है। ऐसे में रोगों से बचाव के लिए खान-पान में सावधानी बरतना जरूरी है। आयुर्वेद के विशेषज्ञ बताते हैं कि वर्षा ऋतु में पित्त दोष का संचय और वात दोष का प्रकोप होता है।
वात की शांति के लिए अम्ल, लवण, कषाय एवं मधुर रस युक्त भोजन का प्रयोग करना चाहिए जिसमें घी और तेल का प्रयोग कम मात्रा में किया गया हो। इस मौसम में नया अन्न खाने से कई तरह के रोग हो सकते हैं। इससे बचने के लिए पुराने गेहूं, चावल और जौ का प्रयोग किया जा सकता है।
तेजी से बढ़ता है संक्रमण
बारिश के मौसम में गिरते तापमान, आर्द्रता व अन्य कारणों से रोगाणुओं की वृद्धि तेजी से होती है। इस मौसम में हैजा, उल्टी, दस्त, पीलिया, हैपेटाइटिस, पेट के रोग, जुकाम, खांसी, गले में दर्द, श्वसन रोग, दाद, खाज, खुजली व फंगल इन्फेक्शन, त्वचा के रोग सहित अन्य इस मौसम में बढ़ जाते हैं।
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दूषित भोजन व पानी से बचे
दिल्ली नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ आर. पी. पाराशर ने कहा कि इस पेट का संक्रमण मुख्य रूप से दूषित भोजन व पानी के कारण होता है। बरसात के कारण गंदा पानी पीने के पानी के साथ मिक्स हो जाता है। इस मौसम में पानी उबालकर पीएं तथा सलाद का प्रयोग सावधानी से करें, विशेष रूप से जमीन के नीचे होने वाली मूली, गाजर, साग सहित अन्य सब्जी का प्रयोग बिल्कुल न करें। बिना अच्छी तरह उबाले पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग भी न करें। अजवाइन, जीरा व सौंफ का प्रयोग भोजन के बाद अवश्य करें। सब्जियों में इनके अलावा धनिया, अदरक व इलायची सहित अन्य का प्रयोग जरूर करें। ये आंतों के संक्रमण की चिकित्सा में इन सभी द्रव्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
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वात की शांति के लिए अम्ल, लवण, कषाय एवं मधुर रस युक्त भोजन का प्रयोग करना चाहिए जिसमें घी और तेल का प्रयोग कम मात्रा में किया गया हो। इस मौसम में नया अन्न खाने से कई तरह के रोग हो सकते हैं। इससे बचने के लिए पुराने गेहूं, चावल और जौ का प्रयोग किया जा सकता है।
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तेजी से बढ़ता है संक्रमण
बारिश के मौसम में गिरते तापमान, आर्द्रता व अन्य कारणों से रोगाणुओं की वृद्धि तेजी से होती है। इस मौसम में हैजा, उल्टी, दस्त, पीलिया, हैपेटाइटिस, पेट के रोग, जुकाम, खांसी, गले में दर्द, श्वसन रोग, दाद, खाज, खुजली व फंगल इन्फेक्शन, त्वचा के रोग सहित अन्य इस मौसम में बढ़ जाते हैं।
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दूषित भोजन व पानी से बचे
दिल्ली नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ आर. पी. पाराशर ने कहा कि इस पेट का संक्रमण मुख्य रूप से दूषित भोजन व पानी के कारण होता है। बरसात के कारण गंदा पानी पीने के पानी के साथ मिक्स हो जाता है। इस मौसम में पानी उबालकर पीएं तथा सलाद का प्रयोग सावधानी से करें, विशेष रूप से जमीन के नीचे होने वाली मूली, गाजर, साग सहित अन्य सब्जी का प्रयोग बिल्कुल न करें। बिना अच्छी तरह उबाले पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग भी न करें। अजवाइन, जीरा व सौंफ का प्रयोग भोजन के बाद अवश्य करें। सब्जियों में इनके अलावा धनिया, अदरक व इलायची सहित अन्य का प्रयोग जरूर करें। ये आंतों के संक्रमण की चिकित्सा में इन सभी द्रव्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
वायरल से बचने के लिए करें तुलसी का प्रयोग
जग प्रवेश अस्पताल में आयुष विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर नीरज त्रिपाठी ने कहा कि बारिश के मौसम में वायरल फीवर भी तेजी से बढ़ता हैं। इससे बचने के लिए तुलसी पत्ता और अदरक का इस्तेमाल करना चाहिए। वही अन्य बीमारियों से बचने के लिए शहद का प्रयोग पानी या दूध में मिलाकर पीना चाहिए। गले या छाती के संक्रमण की चिकित्सा के लिए नमक के पानी के गरारे करें तथा अदरक, तुलसी, लौंग, काली मिर्च और पिप्पली का काढ़ा, चाय या दूध का प्रयोग करें।
जग प्रवेश अस्पताल में आयुष विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर नीरज त्रिपाठी ने कहा कि बारिश के मौसम में वायरल फीवर भी तेजी से बढ़ता हैं। इससे बचने के लिए तुलसी पत्ता और अदरक का इस्तेमाल करना चाहिए। वही अन्य बीमारियों से बचने के लिए शहद का प्रयोग पानी या दूध में मिलाकर पीना चाहिए। गले या छाती के संक्रमण की चिकित्सा के लिए नमक के पानी के गरारे करें तथा अदरक, तुलसी, लौंग, काली मिर्च और पिप्पली का काढ़ा, चाय या दूध का प्रयोग करें।
गीले कपड़े से हो सकता हैं संक्रमण
त्वचा के संक्रमण से बचने के लिए जितना जल्दी हो सके, गीले कपड़े बदल लें। नहाने के बाद शरीर का पानी अच्छी तरह से सूखने के बाद ही कपड़े पहनें। नमी में बैक्टीरिया व फंगस आसानी से फ़ैलता है। त्वचा पर संक्रमण हो जाए तो नहाने के बाद शरीर को सुखाकर नारियल के तेल में कपूर मिलाकर प्रयोग करें।
त्वचा के संक्रमण से बचने के लिए जितना जल्दी हो सके, गीले कपड़े बदल लें। नहाने के बाद शरीर का पानी अच्छी तरह से सूखने के बाद ही कपड़े पहनें। नमी में बैक्टीरिया व फंगस आसानी से फ़ैलता है। त्वचा पर संक्रमण हो जाए तो नहाने के बाद शरीर को सुखाकर नारियल के तेल में कपूर मिलाकर प्रयोग करें।