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खर्राटे अब गुडबाय: इस समस्या को दूर करेगा स्वदेशी सीपैप, एम्स IIT दिल्ली के साथ मिलकर तैयार कर रहा मशीन

Mon, 09 Dec 2024 07:57 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 09 Dec 2024 07:57 PM IST
सार

इस मशीन में एक मास्क लगा होता है। यह मास्क एक पाइप से जुड़कर मशीन की मदद से उचित हवा भेजता है। इसकी मदद से खर्राटों की समस्या में आराम मिलता है। 

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Swadeshi CPAP solve problem of snoring AIIMS is developing machine in collaboration with IIT Delhi
खर्राटे लेना की समस्या को दूर करेगा स्वदेशी सीपैप - फोटो : freepik

विस्तार

खर्राटे लेने की समस्या को जल्द स्वदेशी मशीन ठीक करेगा। इस समस्या को दूर करने के लिए एम्स आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर सीपैप मशीन विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। मौजूदा समय में देश में विदेश से ऐसी मशीनों का आयात होता है।

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विशेषज्ञों का कहना है जब सांस लेते समय हवा आसानी से नाक या मुंह से नहीं निकल पाती, तो खर्राटे आते हैं। इस दौरान शरीर को उचित ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जिस कारण मस्तिष्क, दिल, फेफड़े सहित दूसरे अंगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति गंभीर समस्या खड़ी कर सकती है। इस समस्या से बचने के लिए मरीज को सीपैप मशीन लगाने का सुझाव दिया जाता है। इस मशीन की मदद से श्वसन मार्ग में लगातार सकारात्मक दबाव वाली हवा भेजी जाती है। इससे श्वास मार्ग खुला रहता है और सांस लेने में आसानी होती है। 

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इस मशीन में एक मास्क लगा होता है। यह मास्क एक पाइप से जुड़कर मशीन की मदद से उचित हवा भेजता है। इसकी मदद से खर्राटों की समस्या में आराम मिलता है। इसके नियमित इस्तेमाल से खर्राटों की समस्या दूर हो सकती है और नींद में सुधार आ सकता है। मौजूदा समय में विदेश से आयात होने वाली यह मशीन काफी महंगी है। इसे सस्ता व सुलभ बनाने के लिए एम्स आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर काम कर रहा है।

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एम्स के पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सौरभ मित्तल ने बताया कि सीपैप मशीन को विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। यह अभी शुरूआती दौर में है। हम उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में स्वदेशी उपकरण लोगों को उपलब्ध होगा। यह विदेशी उपकरण के मुकाबले भारतीय जरूरतों के आधार पर विकसित होगा।

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