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स्मार्ट सिटी : 850 मीट्रिक टन कचरा ले डूबा शहरियों का सपना
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Wed, 03 Feb 2016 12:48 AM IST
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गाजियाबाद का कचरे ने भी गाजियाबादियों के स्मार्ट सिटी के सपने पर ग्रहण लगाया। स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल गाजियाबाद नगर निगम 20 साल में एक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट न लगा पाया।
850 मीट्रिक टन कचरा कालोनियों से इकट्ठा कर रोजाना प्रताप विहार और जहां-तहां खुले मैदानों में फेंक दिया जाता है।
दूसरी ओर गाजियाबाद के सामने स्मार्ट सिटी की प्रतिस्पर्धा में उतरे दूसरे गुजरात, मध्यप्रदेश जैसे प्रांत के शहर पहले से कूड़े का वैज्ञानिक विधि से निस्तारण कर रहे हैं।
गाजियाबाद के मौजूदा संसाधनों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का न होना भी स्मार्ट सिटी बनने के सपने को ले डूबा। गाजियाबाद नगर निगम के पास कूड़ा निस्तारण के लिए पर्याप्त जमीन और संसाधन भी नहीं हैं।
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निगम सूत्रों की मानें तो मौजूदा संसाधनों की रिपोर्ट में गाजियाबाद के नंबर कम होने से स्कोर पर असर पड़ा है। स्मार्ट सिटी प्रपोजल में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की डिटेल मांगी गई थी। हालांकि अब नगर निगम शहर में चार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने की तैयारी कर रहा है।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना नहीं हुई शुरू
गाजियाबाद में अफसरों की ही लेटलतीफी से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना शुरू न हो पाई। घरों से कूड़ा कलेक्शन के लिए निगम के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं है।
प्राइवेट कंपनियों से करार करने में निगम अफसरों की दिलचस्पी नहीं रही। हालांकि अब निगम ने एक प्राइवेट कंपनी से करार कर ट्रायल के तौर पर यह सुविधा शुरू करने की तैयारी की है।
केंद्र से फंड मिलने पर भी प्लांट न बना पाए अफसर
केंद्र सरकार ने तकरीबन 11 साल पहले सूबे के दो शहरों गाजियाबाद और बरेली को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे। नगर निगम अधिकारी इसके बावजूद भी प्लांट न लगा पाए।
निगम अफसरों की लेटलतीफी के चलते अब डूंडाहेड़ा स्थित निगम की जमीन के आसपास रिहाइशी इमारतें खड़ी हो गई है। उनके विरोध के चलते इस पर फिलहाल रोक लग गई। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
जहां जगह देखी वही फेंक दिया जाता है कचरा
कूड़े का निस्तारण न होने की वजह से शहर भर में अस्थायी डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। प्रताप विहार स्थित अस्थायी डंपिंग ग्राउंड अब फुल हो गया है।
ऐसे में निगम कर्मचारियों को जहां जगह दिखती है कूड़ा डंप करना शुरू कर देते हैं। निगम कर्मचारियों ने हिंडन किनारे भी अस्थायी डंपिंग ग्राउंड बना दिया था। एनजीटी की फटकार के बाद निगम ने नदी किनारे से कचरा हटाया।
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850 मीट्रिक टन कचरा कालोनियों से इकट्ठा कर रोजाना प्रताप विहार और जहां-तहां खुले मैदानों में फेंक दिया जाता है।
दूसरी ओर गाजियाबाद के सामने स्मार्ट सिटी की प्रतिस्पर्धा में उतरे दूसरे गुजरात, मध्यप्रदेश जैसे प्रांत के शहर पहले से कूड़े का वैज्ञानिक विधि से निस्तारण कर रहे हैं।
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गाजियाबाद के मौजूदा संसाधनों में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का न होना भी स्मार्ट सिटी बनने के सपने को ले डूबा। गाजियाबाद नगर निगम के पास कूड़ा निस्तारण के लिए पर्याप्त जमीन और संसाधन भी नहीं हैं।
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निगम सूत्रों की मानें तो मौजूदा संसाधनों की रिपोर्ट में गाजियाबाद के नंबर कम होने से स्कोर पर असर पड़ा है। स्मार्ट सिटी प्रपोजल में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की डिटेल मांगी गई थी। हालांकि अब नगर निगम शहर में चार सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने की तैयारी कर रहा है।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना नहीं हुई शुरू
गाजियाबाद में अफसरों की ही लेटलतीफी से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की योजना शुरू न हो पाई। घरों से कूड़ा कलेक्शन के लिए निगम के पास पर्याप्त कर्मचारी नहीं है।
प्राइवेट कंपनियों से करार करने में निगम अफसरों की दिलचस्पी नहीं रही। हालांकि अब निगम ने एक प्राइवेट कंपनी से करार कर ट्रायल के तौर पर यह सुविधा शुरू करने की तैयारी की है।
केंद्र से फंड मिलने पर भी प्लांट न बना पाए अफसर
केंद्र सरकार ने तकरीबन 11 साल पहले सूबे के दो शहरों गाजियाबाद और बरेली को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए थे। नगर निगम अधिकारी इसके बावजूद भी प्लांट न लगा पाए।
निगम अफसरों की लेटलतीफी के चलते अब डूंडाहेड़ा स्थित निगम की जमीन के आसपास रिहाइशी इमारतें खड़ी हो गई है। उनके विरोध के चलते इस पर फिलहाल रोक लग गई। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
जहां जगह देखी वही फेंक दिया जाता है कचरा
कूड़े का निस्तारण न होने की वजह से शहर भर में अस्थायी डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। प्रताप विहार स्थित अस्थायी डंपिंग ग्राउंड अब फुल हो गया है।
ऐसे में निगम कर्मचारियों को जहां जगह दिखती है कूड़ा डंप करना शुरू कर देते हैं। निगम कर्मचारियों ने हिंडन किनारे भी अस्थायी डंपिंग ग्राउंड बना दिया था। एनजीटी की फटकार के बाद निगम ने नदी किनारे से कचरा हटाया।