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छह रूट पर हुआ सिटी लो फ्लोर बस का ट्रायल, जानिए क्या हैं खूबियां
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 21 Jun 2016 12:03 AM IST
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लॉ फ्लोर बस
- फोटो : अमर उजाला
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बॉटेनिक गार्डेन से एम-वन रूट समेत नोएडा और ग्रेटर नोएडा के छह रूट पर सोमवार सुबह आधुनिक लो फ्लोर एसी बस का ट्रायल हुआ। लो फ्लोर बसें फोल्डिंग रैंप जैसी अन्य विशेषताओं से युक्त हैं जिससे यात्री व्हीलचेयर के साथ आसानी से चढ़ और उतर सकें।
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सड़कों पर अतिक्रमण और कम चौड़ाई के साथ जाम की वजह से बस के परिचालन में दिक्कत हुई। बसें जेबीएम कंपनी की हैं। ट्रायल सुबह 10 बजे शुरू हुआ।
बॉटेनिक गार्डेन से सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन, सेक्टर 1, 7बी, 12, 10, 9, 4, 3, 16 मेट्रो स्टेशन होते हुए सेक्टर-15 मेट्रो स्टेशन तक के पहले ट्रायल में अधिकारियों ने बस में सफर किया।
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इनमें एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक सौम्य श्रीवास्तव, महाप्रबंधक (वित्त) पीडी उपाध्याय, विशेष कार्याधिकारी शैलेंद्र कुमार भाटिया, संदीप रायजादा, संदीप चंद्रा, एआरटीओ एसके सिंह और यातायात पुलिस के अधिकारी शामिल रहे।
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अधिकारियों ने बताया कि बस के लिए मुंबई की ईस्पायर ट्रांसपोर्ट कंपनी को चुना गया है जो पहले चरण में 50 एसी बसें उपलब्ध कराएगी। बस में सीसीटीवी कैमरे और विशेष सुरक्षा अलार्म लगा है।
बसों की सेवा शुरू करने की तारीख पर चुप्पी
बस का ट्रायल
- फोटो : अमर उजाला
रास्तों में पड़ने वाले बस शेल्टर विकसित करने के लिए नोएडा ट्रैफिक सेल को निर्देश दिए हैं। बसों के चौड़ी होने के कारण सड़कों पर अतिक्रमण और कम चौड़ाई के साथ जाम से दिक्कत हुई, जिसके निदान के लिए अधिकारियों ने जरूरी कदम उठाने की बात कही है। संभव है कि बस के रूटों में कुछ बदलाव भी किए जाएं।
35 सीटों की बस में अन्य लो फ्लोर बसों के मुकाबले बसों में खड़े लोगों के लिए 15-20 प्रतिशत अधिक स्पेस है। यात्री उठ बैठ सकते हैं और पिछले हिस्से में छत से टकराने की चिंता के बगैर आराम से घूम-फिर सकते हैं।
बस को भारतीय यातायात और मौसम हालात को ध्यान में रखकर बनाया है। कुछ खास विशेषताओं में मोनोकोक स्ट्रक्चर शामिल हैं जो अधिकतम ताकत और न्यूनतम वजन वाला है। सामने और किनारे टक्कर और दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा के लिए यूरोपीय मानकों की तरह काम करता है।
इन बसों में लीकेज की स्थिति में ऑटोमेटिक वाल्व क्लोज के साथ पांच बड़े डायामीटर सिलेंडरों के जरिये अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है। बसों की सीएनजी क्षमता भी 900 लीटर है जो मौजूदा समय में सड़कों पर चल रही बसों की 700 लीटर की क्षमता से अधिक है।
बसों की सेवा शुरू करने की तारीख पर चुप्पी
यात्रियों को इन बसों की सेवा कब मिलेगी, इसको लेकर अधिकारी खामोश रहे। अधिकारी बसों की सेवा शुरू करने के महीने या तारीख की जानकारी की बजाए बस जल्द शुरू होने की बात कहते रहे। हालांकि संभावना है कि बसें जुलाई या अगस्त तक सड़कों पर उतर जाएंगी।
35 सीटों की बस में अन्य लो फ्लोर बसों के मुकाबले बसों में खड़े लोगों के लिए 15-20 प्रतिशत अधिक स्पेस है। यात्री उठ बैठ सकते हैं और पिछले हिस्से में छत से टकराने की चिंता के बगैर आराम से घूम-फिर सकते हैं।
बस को भारतीय यातायात और मौसम हालात को ध्यान में रखकर बनाया है। कुछ खास विशेषताओं में मोनोकोक स्ट्रक्चर शामिल हैं जो अधिकतम ताकत और न्यूनतम वजन वाला है। सामने और किनारे टक्कर और दुर्घटना की स्थिति में सुरक्षा के लिए यूरोपीय मानकों की तरह काम करता है।
इन बसों में लीकेज की स्थिति में ऑटोमेटिक वाल्व क्लोज के साथ पांच बड़े डायामीटर सिलेंडरों के जरिये अतिरिक्त सुरक्षा मुहैया कराई गई है। बसों की सीएनजी क्षमता भी 900 लीटर है जो मौजूदा समय में सड़कों पर चल रही बसों की 700 लीटर की क्षमता से अधिक है।
बसों की सेवा शुरू करने की तारीख पर चुप्पी
यात्रियों को इन बसों की सेवा कब मिलेगी, इसको लेकर अधिकारी खामोश रहे। अधिकारी बसों की सेवा शुरू करने के महीने या तारीख की जानकारी की बजाए बस जल्द शुरू होने की बात कहते रहे। हालांकि संभावना है कि बसें जुलाई या अगस्त तक सड़कों पर उतर जाएंगी।