फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   SFI launches protest over irregularities in JNU PhD admissions

Delhi NCR News: जेएनयू पीएचडी दाखिला में अनियममिता को लेकर एसएफआई ने खोला मोर्चा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 28 Oct 2026 06:02 PM IST
विज्ञापन
-दाखिला में एससी, एसटी, दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित सीट नहीं हुई आवंटित
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में पीएचडी दाखिले 2026-27 में आरक्षण नियमों में कथित अनियमितता को लेकर छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने सीटों के बंटवारे को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन ने दावा किया कि अनुसूचित जनजाति (एसटी), अनुसूचित जाति (एससी) और बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए निर्धारित आरक्षण के अनुसार सीटें नहीं दी गई हैं। एसएफआई की शिकायत पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी किया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) ने भी मामले का संज्ञान लिया है। एसएफआई ने बुधवार को प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में पीएचडी दाखिला प्रॉस्पेक्टस के आंकड़े पेश करते हुए कहा कि कुल 711 नियमित सीटों में एसटी के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण के हिसाब से करीब 53 सीटें होनी चाहिए। जबकि प्रॉस्पेक्टस में केवल 38 सीटें दिखाई गई हैं।
इसी तरह एससी के लिए 15 प्रतिशत आरक्षण के तहत करीब 107 सीटें बनती हैं। लेकिन 103 सीटें ही विज्ञापित की गई हैं। वहीं, बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए करीब 36 सीटों की जरूरत के मुकाबले केवल 17 सीटें निर्धारित होने का दावा किया है। संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय कुल सीटों के आधार पर आरक्षण लागू करने के बजाय अलग-अलग केंद्रों और विषयों में छोटी सीट संख्या के आधार पर आरक्षण तय कर रहा है। कई केंद्रों में एक से तीन सीटें होने के कारण आरक्षित वर्गों के लिए सीटें नहीं निकल पातीं। एसएफआई के मुताबिक इस दाखिला सत्र में 29 केंद्रों ने एससी और एसटी दोनों वर्गों के लिए कोई सीट विज्ञापित नहीं की है। संगठन ने नेट-जेआरएफ, नेट और गेट के अलग-अलग माध्यमों में सीटों के बंटवारे को भी समस्या की वजह बताया।
विज्ञापन


एसएफआई ने पिछले वर्षों में खाली रह गई आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में बदलने के मुद्दे पर भी पारदर्शिता की मांग की। इस प्रेस वार्ता में पूर्व राज्यसभा सांसद वृंदा करात, पश्चिम बंगाल की पूर्व जनजातीय मामलों की मंत्री देबालीना हेम्ब्रम, एसएफआई के अखिल भारतीय अध्यक्ष आदर्श एम. साजी, संयुक्त सचिव आइशी घोष, जेएनयू छात्रसंघ की उपाध्यक्ष गोपिका बाबू और एसएफआई की जेएनयू इकाई के सचिव सागर सिंघल मौजूद रहे। एसएफआई ने मांग की कि 2026-27 के दाखिला सत्र में ही आरक्षण से जुड़ी कथित विसंगतियों को दूर किया जाए। संगठन ने कहा कि आरक्षण के मुद्दे का समाधान किए बिना दाखिला प्रक्रिया आगे बढ़ाना वंचित समुदायों के विद्यार्थियों के हितों की अनदेखी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article