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दिल्ली दंगा 2020: हत्या के आरोप से सात आरोपी बरी, पुलिस की गवाही और वीडियो फुटेज क्यों नहीं आए काम?

Fri, 16 Oct 2026 05:34 PM IST
Rahul Kumar Tiwari पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Rahul Kumar Tiwari Updated Fri, 16 Oct 2026 05:34 PM IST
सार

दिल्ली दंगों के दौरान ऑटो चालक बाब्बू की मौत के मामले में अदालत ने सात आरोपियों को हत्या समेत गंभीर आरोपों से बरी कर दिया। पुलिस गवाह की गवाही की पुष्टि नहीं हुई और वीडियो से पहचान भी संभव नहीं थी। हालांकि, सातों निषेधाज्ञा उल्लंघन के दोषी ठहराए गए।

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Seven accused acquitted of murder in auto driver death in Delhi riots case
कोर्ट का फैसला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में एक व्यक्ति की जानलेवा पिटाई से जुड़े हत्या और अन्य गंभीर आरोपों से सात लोगों को बरी कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उन्हें निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि पुलिस के एक गवाह की अकेली गवाही के आधार पर आरोपियों को जानलेवा हमले का दोषी ठहराना सुरक्षित नहीं होगा। इस गवाही की पुष्टि के लिए अन्य साक्ष्यों की आवश्यकता थी।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने सात आरोपियों को हत्या, घातक हथियारों के साथ दंगा करने और वैमनस्य फैलाने सहित अन्य आरोपों से बरी कर दिया। हालांकि, उन्हें भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 188 के तहत निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का दोषी ठहराया। 15 अक्तूबर के आदेश में अदालत ने कहा, किसी भी गवाह की गवाही से ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिलता कि आरोपियों में से कोई भी घातक हथियार या किसी भी तरह का हथियार लेकर आया था।
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यह मामला 25 फरवरी 2020 को खजूरी चौक पर बाब्बू नाम के एक ऑटो-रिक्शा चालक पर हुए हमले से जुड़ा है। हमले में घायल बाब्बू की दो दिन बाद जीटीबी अस्पताल में मौत हो गई थी। अदालत ने कुलदीप सिंह, हरजीत सिंह उर्फ हैप्पी, राहुल उर्फ अजय, सचिन रस्तोगी, भरत भूषण उर्फ लकी, संदीप उर्फ संजीव और धर्मेंद्र उर्फ धमेंद्र को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत लगाई गई निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के लिए आईपीसी की धारा 188 के तहत दोषी ठहराया।

अभियोजन पक्ष ने सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) अनिल कुमार की गवाही पर भरोसा किया। उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने हमले को अपनी आंखों से देखा था। हालांकि, प्रत्यक्षदर्शी बताए गए अन्य गवाहों ने अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया।
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अदालत ने यह भी पाया कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए वीडियो फुटेज की गुणवत्ता बेहद खराब थी और उसमें मौजूद लोगों के चेहरे पहचाने नहीं जा सकते थे। अदालत ने कहा कि वीडियो में किसी व्यक्ति की पहचान नंगी आंखों से करना 'पूरी तरह असंभव' था।

न्यायाधीश ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि वीडियो में जिस व्यक्ति की पिटाई होती दिखाई दे रही है, वह बाब्बू ही था या फिर जानलेवा हमले के लिए आरोपी जिम्मेदार थे। मामले में एक अन्य आरोपी सचिन गुप्ता उर्फ मोपी को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। अदालत ने दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर दलीलें सुनने के लिए मामले की सुनवाई बाद की तारीख के लिए निर्धारित की है।
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