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सलमान रश्दी के घर का विवाद: 1970 में 3.75 लाख में बेचा था, अब कीमत 130 करोड़ 

Sat, 28 Dec 2019 05:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 28 Dec 2019 05:14 AM IST
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Salman Rushdie house dispute sold for 3.75 lakhs in 1970, now worth 130 crores
सलमान रश्दी - फोटो : Social Media

विश्व प्रसिद्ध लेखक सलमान रश्दी के दिल्ली स्थित पॉश इलाके सिविल लाइंस में पैतृक घर की कीमत 130 करोड़ लगाई है। दरअसल रश्दी के पिता अनीस अहमद रश्दी ने 1970 में कांग्रेस नेता भीकूराम जैन को यह घर बेचने का करार किया था, लेकिन दोनों पक्षों में विवाद के कारण वह सौदा नहीं हो पाया था।

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पैतृक संपत्ति का यह विवाद अंतत: सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जिसने 3 दिसंबर, 2012 को कांग्रेस के पूर्व नेता भीकूराम जैन के पक्ष में फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि रश्दी आदेश के दिन तक बाजार मूल्य के हिसाब से उस मकान को जैन के हवाले कर दें। शीर्ष अदालत ने हालांकि बाजार मूल्य से उस मकान की कीमत तय करने की जिम्मेदारी दिल्ली हाईकोर्ट को सौंप दी थी। 
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अब हाईकोर्ट ने उसकी कीमत 2012 के मुताबिक 130 करोड़ रुपये निर्धारित की है। जस्टिस राजीव साही एंडलॉ ने यह भी कहा कि यदि जैन उस संपत्ति को उस कीमत पर खरीदने में असमर्थ हैं, तो रश्दी को 130 करोड़ में वह मकान छह महीने के अंदर किसी अन्य खरीदार को बेचना होगा। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि यदि रश्दी निर्धारित समय में उस मकान को 130 करोड़ में बेचने में असमर्थ हैं तो, उसके बाद 60 दिनों में जैन उस संपत्ति को 75 करोड़ में खरीदने के हकदार होंगे, जो कि 4 दिसंबर, 2012 का सर्कल रेट है। उसने यह भी कहा कि यदि जैन 75 करोड़ में वह संपत्ति नहीं खरीदते हैं, तो रश्दी को उस संपत्ति पर करार से राहत मिल जाएगी, जो दोनों के बीच 1970 में हुआ था। 

दरअसल अनीस अहमद रश्दी ने भीकूराम जैन को यह घर 3.75 लाख में बचने का करार किया था। जैन ने रश्दी को 50,000 रुपये पेशगी देते हुए आश्वस्त किया कि आयकर अधिकारियों से कर प्रमाणपत्र मिलने के बाद शेष राशि चुका दी जाएगी। 

50 साल लटका रहा मामला
बाद में दोनों परिवारों ने करार की शर्तों का सम्मान नहीं करने का एक दूसरे पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया था। जैन ने 1977 में केस दायर करते हुए ट्रायल कोर्ट को रश्दी को 1970 के करार को लागू करने का निर्देश देने की मांग की। 1983 में ट्रायल कोर्ट ने जैन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रश्दी को निर्देश दिया कि शेष 3.25 लाख रुपये चुकाने के बाद जैन को संपत्ति सौंप दी जाए। 


फैसले के खिलाफ 2011 में हाईकोर्ट में दायर अपील का फैसला रश्दी के हक में आया। उसके बाद जैन ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने रश्दी के पक्ष में फैसला देकर गलती की और उस आदेश को खारिज कर दिया।

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