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Delhi NCR News: कालकाजी से शुरू होगा जेजे बस्तियों के पुनर्वास का काम
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- पहले हिस्से में कालकाजी समेत पांच स्थानों के 6,918 परिवार शामिल, जरूरत पर ड्रोन सर्वे भी होगा
शनि पाथौली
नई दिल्ली।
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के तहत झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्वास की शुरुआत कालकाजी से होगी। डीडीए ने पुनर्वास की परियोजनाओं को तीन हिस्सों में बांटा है। पहले हिस्से में 14 जेजे क्लस्टर के 6,918 परिवारों को यथास्थान बसाने की योजना तैयार की जाएगी। पुनर्वास की संभावनाओं का आकलन करने के लिए जरूरत पड़ने पर ड्रोन सर्वे के साथ क्लस्टर का आभासी भ्रमण भी कराया जाएगा।
डीडीए की योजना के तहत दिल्ली की 45 जेजे बस्तियों में रहने वाले 21,229 परिवारों के पुनर्वास की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके भाग-ए में 14 क्लस्टर, 6,918 परिवार शामिल है। भाग-बी में 16 क्लस्टर के 8,242 परिवार और भाग-सी में 15 क्लस्टर के 6,139 परिवार शामिल हैं।
पहले हिस्से में कालकाजी समेत पांच क्षेत्र
पहले हिस्से में कालकाजी, आजादपुर, जीटी करनाल रोड, पीतमपुरा और तिमारपुर के जेजे क्लस्टर शामिल हैं। इनमें कालकाजी के 764, आजादपुर के 1,461, जीटी करनाल रोड के 1,186, पीतमपुरा के 2,312 और तिमारपुर के 1,195 परिवार शामिल हैं। इन पांच परियोजनाओं के लिए कुल 39.75 एकड़ जमीन का क्षेत्रफल तय किया गया है। इनमें कालकाजी से पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। यहां यह देखा जाएगा कि मौजूदा जमीन और आसपास की परिस्थितियों को देखते हुए कितने परिवारों के लिए आवास विकसित किया जा सकता है। यथास्थान पुनर्वास होने से परिवारों को अपने मौजूदा रोजगार, स्कूल, बाजार और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं से दूर नहीं जाना पड़ेगा।
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बादली से शुरू होगा दूसरे चरण का काम
योजना के दूसरे हिस्से में बादली, विकासपुरी, तिलक नगर, नांगलोई जाट और शकूर बस्ती के जेजे क्लस्टर शामिल हैं। इनमें बादली के 2,851, विकासपुरी के 1,460, तिलक नगर के 1,853, नांगलोई जाट के 1,472 और शकूर बस्ती के 604 परिवार शामिल हैं। इनके लिए 48.55 एकड़ जमीन का क्षेत्रफल शामिल किया गया है। इन इलाकों में पुनर्वास की योजना बनाते समय आसपास के विकास और उपलब्ध सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
तीसरे हिस्से में शाहदरा समेत पांच क्लस्टर
तीसरे हिस्से में आनंद पर्वत, पटपड़गंज-1, पटपड़गंज-2, झिलमिल और शाहदरा को शामिल किया गया है। आनंद पर्वत में 534, पटपड़गंज-1 में 904, पटपड़गंज-2 में 562, झिलमिल में 1,517 और शाहदरा में 2,622 परिवार हैं। इन पांच परियोजनाओं के लिए कुल 47.44 एकड़ जमीन शामिल की गई है।
पांच किलोमीटर के दायरे का भी होगा अध्ययन
पुनर्वास की योजना केवल संबंधित जेजे क्लस्टर तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित स्थान के आसपास करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में मौजूद आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का भी तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। इससे आसपास के क्षेत्र में आवासीय विकास, जमीन की स्थिति और बाजार की संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा। स्थल की वास्तविक स्थिति समझने के लिए जरूरत पड़ने पर ड्रोन सर्वे कराया जाएगा। इससे बस्ती के आकार, उपलब्ध जमीन और आसपास की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
तीन महीने में तैयार होगी अंतिम रिपोर्ट
परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। काम शुरू होने के 15 दिन के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की जानी है। 45 दिन में स्थल और बाजार का आकलन किया जाएगा। इसके बाद 60 दिन में प्रारंभिक लेआउट और लागत का अनुमान तैयार होगा। 90 दिन में अंतिम व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग जेजे क्लस्टरों के पुनर्वास की आगे की योजना तैयार की जाएगी।
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शनि पाथौली
नई दिल्ली।
दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के तहत झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के पुनर्वास की शुरुआत कालकाजी से होगी। डीडीए ने पुनर्वास की परियोजनाओं को तीन हिस्सों में बांटा है। पहले हिस्से में 14 जेजे क्लस्टर के 6,918 परिवारों को यथास्थान बसाने की योजना तैयार की जाएगी। पुनर्वास की संभावनाओं का आकलन करने के लिए जरूरत पड़ने पर ड्रोन सर्वे के साथ क्लस्टर का आभासी भ्रमण भी कराया जाएगा।
डीडीए की योजना के तहत दिल्ली की 45 जेजे बस्तियों में रहने वाले 21,229 परिवारों के पुनर्वास की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। इसके भाग-ए में 14 क्लस्टर, 6,918 परिवार शामिल है। भाग-बी में 16 क्लस्टर के 8,242 परिवार और भाग-सी में 15 क्लस्टर के 6,139 परिवार शामिल हैं।
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पहले हिस्से में कालकाजी समेत पांच क्षेत्र
पहले हिस्से में कालकाजी, आजादपुर, जीटी करनाल रोड, पीतमपुरा और तिमारपुर के जेजे क्लस्टर शामिल हैं। इनमें कालकाजी के 764, आजादपुर के 1,461, जीटी करनाल रोड के 1,186, पीतमपुरा के 2,312 और तिमारपुर के 1,195 परिवार शामिल हैं। इन पांच परियोजनाओं के लिए कुल 39.75 एकड़ जमीन का क्षेत्रफल तय किया गया है। इनमें कालकाजी से पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। यहां यह देखा जाएगा कि मौजूदा जमीन और आसपास की परिस्थितियों को देखते हुए कितने परिवारों के लिए आवास विकसित किया जा सकता है। यथास्थान पुनर्वास होने से परिवारों को अपने मौजूदा रोजगार, स्कूल, बाजार और सार्वजनिक परिवहन की सुविधाओं से दूर नहीं जाना पड़ेगा।
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बादली से शुरू होगा दूसरे चरण का काम
योजना के दूसरे हिस्से में बादली, विकासपुरी, तिलक नगर, नांगलोई जाट और शकूर बस्ती के जेजे क्लस्टर शामिल हैं। इनमें बादली के 2,851, विकासपुरी के 1,460, तिलक नगर के 1,853, नांगलोई जाट के 1,472 और शकूर बस्ती के 604 परिवार शामिल हैं। इनके लिए 48.55 एकड़ जमीन का क्षेत्रफल शामिल किया गया है। इन इलाकों में पुनर्वास की योजना बनाते समय आसपास के विकास और उपलब्ध सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाएगा। इससे यह तय करने में मदद मिलेगी कि उपलब्ध जमीन का बेहतर उपयोग किस तरह किया जा सकता है।
तीसरे हिस्से में शाहदरा समेत पांच क्लस्टर
तीसरे हिस्से में आनंद पर्वत, पटपड़गंज-1, पटपड़गंज-2, झिलमिल और शाहदरा को शामिल किया गया है। आनंद पर्वत में 534, पटपड़गंज-1 में 904, पटपड़गंज-2 में 562, झिलमिल में 1,517 और शाहदरा में 2,622 परिवार हैं। इन पांच परियोजनाओं के लिए कुल 47.44 एकड़ जमीन शामिल की गई है।
पांच किलोमीटर के दायरे का भी होगा अध्ययन
पुनर्वास की योजना केवल संबंधित जेजे क्लस्टर तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित स्थान के आसपास करीब पांच किलोमीटर के क्षेत्र में मौजूद आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं का भी तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा। इससे आसपास के क्षेत्र में आवासीय विकास, जमीन की स्थिति और बाजार की संभावनाओं का आकलन किया जा सकेगा। स्थल की वास्तविक स्थिति समझने के लिए जरूरत पड़ने पर ड्रोन सर्वे कराया जाएगा। इससे बस्ती के आकार, उपलब्ध जमीन और आसपास की स्थिति को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी।
तीन महीने में तैयार होगी अंतिम रिपोर्ट
परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। काम शुरू होने के 15 दिन के भीतर प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की जानी है। 45 दिन में स्थल और बाजार का आकलन किया जाएगा। इसके बाद 60 दिन में प्रारंभिक लेआउट और लागत का अनुमान तैयार होगा। 90 दिन में अंतिम व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर अलग-अलग जेजे क्लस्टरों के पुनर्वास की आगे की योजना तैयार की जाएगी।