दिल्ली बचाने को बना था लाल किला

अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 31 Dec 2013 11:13 AM IST
Shahjahan was built Lal Kila for protecting delhi to invaders
विज्ञापन
ख़बर सुनें
दिल्ली के नेताजी सुभाष चंद्र मार्ग पर स्थित लाल किले की लोकप्रियता विश्व भर में है। हर साल देश-विदेश से यहां लाखों पर्यटक आते हैं। इसी के प्राचीर से हर स्वतंत्रता दिवस को प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं।
विज्ञापन


शाहजहां द्वारा बनवाए गए विशाल लाल किले की दीवारें जमीन से 33 मीटर ऊंची हैं। यह मुगल शासकों की राजसी शक्ति और प्रताप की याद दिलाती हैं। शाहजहां ने इसका निर्माण दिल्ली को आक्रमणकारियों से बचाने के लिए कराया था। लाहौरी गेट इसका मुख्य द्वार है।


इसके आगे एक शानदार चट्टा चौक बाजार है। यहां दिल्ली की अन्य बाजारों की अपेक्षा किफायती दरों पर सामानें मिलती हैं। यह मार्ग किले के प्रागंण की तरफ जाता है। इसके अंदर कई खास इमारतें हैं। इनके ऐतिहासिक महत्व के साथ मुगलकालीन तहजीब की झलक अपनी ओर खींचती हैं।

आइए जाने क्या है इनमें खास
red fort au
नक्करखाना
लाहौर गेट से चट्टा चौक की ओर आने वाली सड़क से लगा खुला मैदान है। इसी के पूर्वी छोर पर नक्कारखाना बना है। यह म्यूजिशयनों के लिए बनवाया गया था। यहां उस जमाने के संगीतज्ञ संगीत साधते थे।

दीवान-ए-आम
नक्कारखाना के आगे का गेट पार करने पर एक और खुला मैदान दिखाई देता है। यह दीवाने-ए-आम का प्रांगण हुआ करता था। यहां बैठकर राजा-महाराजा जनता से रूबरू हुआ करते थे। यहीं एक राज सिंहासन भी था।

नहर-ए-बहिश्त
राजगद्दी के पीछे की ओर निजी शाही कक्ष स्थापित हैं। उसके पूर्वी छोर के ऊंचे चबूतरों पर बने गुम्बददार इमारतों की कतार है। यहां से यमुना नदी का किनारा दिखाई पड़ता है। ये मंडप एक छोटी नहर से जुडे़ हैं, जिसे नहर-ए-बहिश्त कहते हैं। इसका पानी किले के पूर्वोत्तर छोर पर बने शाह बुर्ज पर चढ़ाया जाता है। यहीं एक आयत में लिखा है- अगर पृथ्वी पर कहीं जन्नत है, तो वो यहीं है, यहीं है, यहीं है।

जनाना
महल के दक्षिण में दो मंडप बने हुए हैं। इन्हें जनाना कहते हैं। इनका नाम मुमताज महल और रंग महल है। नक्काशीदार छतों और संगमर्मर सरोवर से बने इस मंडप में अब संग्रहालय है।

खास महल
दक्षिण से तीसरा मंडप है खास महल। इसमें शाही कक्ष बने हैं। इनमें राजसी सयन-कक्ष, प्रार्थना-कक्ष, एक बरामदा और मुसम्मन बुर्ज बने हैं। इस बुर्ज से बादशाह जनता को दर्शन देते थे।

मोती मस्जिद
हमाम के पश्चिम में औरंगजेब की निजी मोती मस्जिद बनी है। यह एक छोटी सी तीन गुम्बद वाली, तराशे हुए सफेद संगमर्मर से निर्मित है। इसका मुख्य फलक तीन मेहराबों से युक्त है और आंगन में उतरता है।

हयात बख्श बाग
इसी के उत्तर में एक बड़ा उद्यान है। इसे हयात बख्श बाग कहते हैं। इसका अर्थ है जीवन दायी उद्यान। इसमें बैठकर मुगल बादशाह नई उर्जा महसूस करते थे।

लाइट एंड साउंड शो है खास आकर्षण
हर रोज शाम छह बजे के बाद रेड किले पर लाइट एंड साउंड शो होता है। इसमें भारत के सुनहरे इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं का ऑडियो-विजुअल प्रदर्शन किया जाता है। इसको देखने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है।

संक्षिप्त जानकारी
नेताजी सुभाष मार्ग पर स्थित,
नजदीकी मेट्रो स्टेशन: चांदनी चौक,
खुलने के दिन: मंगलवार से रविवार,
अवकाशः सोमवार,
समय: सूर्योदय से सूर्सयास्त तक,
प्रवेश शुल्क: भारतीयों के लिए 10 रुपये,
विदेशियों के लिए 250 रुपये,
कैमरा ले सकते हैं,
वीडियोग्राफी के लिए अनुमति शुक्लः 25 रुपये
साउंड एंड लाइट शो: शाम 6 बजे के बाद
टिकट: 80 रुपये (व्यस्क), 30 रुपये (बच्चा)

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
  • Downloads

Follow Us

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00