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Ghaziabad: जिला जेल में साक्षर बनने के साथ आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ रहे बंदी, हाईस्कूल-इंटर की दे रहे परीक्षा

Sun, 22 Oct 2023 04:26 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला नेटवर्क, मसूरी (गाजियाबाद)
अमर उजाला नेटवर्क, मसूरी (गाजियाबाद) Published by: आकाश दुबे Updated Sun, 22 Oct 2023 04:26 PM IST
सार

पिछले कई वर्षों से जेल में बंदियों को साक्षर बनाने का काम हो रहा है। शिक्षा विभाग से एक अध्यापक जेल में बंदियों को पढ़ाने के लिए जाते हैं। जेल में ही हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की हर वर्ष परीक्षा भी कराई जाती है।

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Prisoners are becoming literate in Ghaziabad District Jail
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

जिला कारागार में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा बंदियों को साक्षर करने के लिए रोजाना सुबह 9 बजे से 2 बजे तक जूनियर हाईस्कूल तक के बंदियों को क्लास रूम में पढ़ाया जाता है। बाकी निरक्षरों व अन्य वर्ग के बंदियों को बैरकों में ही साथी शिक्षित बंदियों द्वारा शिक्षा दी जाती है तथा परीक्षा की तैयारी कराई जाती है। इस समय जूनियर हाईस्कूल तक लगभग 150 बंदी शिक्षा गृहण कर रहे हैं। इन सभी की बकायदा रजिस्टर में एंट्री के साथ रोजाना हाजरी लगाई जाती है। हर वर्ष बंदियों के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा का सेंटर जिला कारागार में बनाया जाता है। जिला कारागार की बैरकों में निरक्षर बंदियों को आयु वर्ग के शिक्षित बंदियों द्वारा रोजाना शिक्षा दी जाती है।

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जिला कारागार प्रशासन द्वारा सर्वे कराकर कक्षा वाइज बंदियों का रजिस्ट्रेशन किया जाता है। ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन तथा अन्य कोर्सेज के लिये भी फार्म भरवाकर उनकी शिक्षा के लिये जेल प्रशासन पूरा सहयोग करता है। जेल में बंद महिला बंदियों के बच्चों को भी जेल प्रशासन शिक्षित करने के लिये उनके लिये किताब कॉपी पेन्सिल आदि की व्यवस्था कराता है। सलाखों के पीछे बंदियों को साक्षर बनाने में जिला कारागार के जेल अधीक्षक आलोक सिंह कोई कोर कसर नहीं छोड़ते। जेल अधीक्षक का प्रयास रहता है कि जेल से निकलकर बंदी अपने को सुधार कर अपने परिवार का पालन पोषण अच्छे से कर सके किसी पर निर्भर न रहे।जिला कारागार में कम्प्यूटर, सिलाई,कढाई,पेन्टिंग,डान्स आदि का प्रशिक्षण भी बंदियों को कराया जाता है,इन सबका प्रशिक्षण सर्टिफिकेट भी दिया जाता है।

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