दिल्ली: राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आम नागरिकों के लिए खोला विरासत पार्क, जानें क्या है इस पार्क में खास?
यूनेस्को धरोहर स्थल लाल किला और 17वीं सदी की जामा मस्जिद के बीच पर्यटक परेड ग्राउंड रोड पर खूबसूरत विरासत पार्क का दीदार कर सकते हैं। रविवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने पुरानी दिल्ली के इस विरासत पार्क में पहुंचकर इसका उद्घाटन किया है। पार्क के अंदर मुगल शैली में बनी बारादरी और रंग बिरंगे फूलों का बाग मन को मोह रहे हैं।
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राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने आम नागरिकों के लिए विरासत पार्क का दरवाजा खोल दिया है। अब लाल किला और जामा मस्जिद घूमने जाने वाले पर्यटक परेड ग्राउंड रोड पर खूबसूरत विरासत पार्क का दीदार कर सकते हैं। पार्क के अंदर मुगल शैली में बनी बारादरी और रंग बिरंगे फूलों का बाग मन को मोह रहे हैं।
रविवार शाम को करीब साढ़े छह बजे राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने अपनी पत्नी सविता कोविंद के साथ पहुंचकर पुरानी दिल्ली के इस विरासत पार्क का उद्घाटन किया। मौके पर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल, उत्तरी निगम के महापौर राजा इकबाल सिंह, दक्षिणी निगम के महापौर मुकेश सूर्यान, पूर्व महापौर जय प्रकाश, स्थायी समिति के अध्यक्ष जोगी राम जैन, उत्तरी निगम के आयुक्त संजय गोयल, उत्तरी निगम के सभी जोनों के उपायुक्त, कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
पूर्व महापौर चर्तीलाल गोयल के नाम पर पार्क का नाम रखा गया
इस विरासत पार्क को संवारने में उत्तरी निगम का विशेष सहयोग करने वाले राज्यसभा सांसद विजय गोयल, सांसद रूपा गांगुली मौके पर उपस्थित रहीं। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के पहुंचने पर ढोल नगाड़ों से उनका स्वागत हुआ। उत्तरी निगम के पूर्व महापौर चर्तीलाल गोयल के नाम पर पार्क का नाम रखा गया है, पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित है। राष्टपति रामनाथ कोविंद ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी के साथ पार्क का भ्रमण किया। उन्होंने उत्तरी निगम के इस कार्य की सराहना की।
7.65 करोड़ रुपयों की लागत से विरासत पार्क को संवारा गया
उत्तरी निगम ने यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल लाल किले के सामने सड़क के उस पार 17वीं सदी की जामा मस्जिद के ठीक बगल में करीब 1.75 एकड़ क्षेत्रफल में 7.65 करोड़ रुपयों की लागत से विरासत पार्क को संवारा है। पहले यह जगह गंदगी से पटी थी, अतिक्रमण था, महीनों कड़ी मेहनत के बाद यह एक सुंदर पार्क में तब्दील हो पाया है। इसमें पारंपरिक शिल्प कौशल से सुंदर संरचनाएं बनाई गई हैं। सफेद संगमरमर से घुमावदार मेहराब वाली बारादरी (मंडप) इस पार्क का केंद्र बिंदु है, लाल बलुआ पत्थर, सफेद संगमरमर, धौलपुर पत्थर के उपयोग से इस पूरे पार्क को बनाया गया है। अभी इस परियोजना के अंतर्गत दूसरे चरण में शेष 2.25 एकड़ क्षेत्रफल का विकास होना है, इसमें करीब 10.03 करोड़ रुपये अनुमानित लागत लगेगी। अभी इस पार्क में नि:शुल्क प्रवेश है, पूरा बन जाने के बाद निगम इसमें प्रवेश के लिए मामली रुपयों का टिकट लगाएगा।
भाजपा-कांग्रेस के सांसदों ने किया आर्थिक सहयोग
उत्तरी निगम ने इस पार्क को बनाने के लिए अपने संसाधनों से 4.70 करोड़ रुपये की व्यवस्था की थी। विजय गोयल ने बताया कि इस पार्क को संवारने में भाजपा के साथ कांग्रेस और दूसरे दलों के सांसदों ने भी आर्थिक सहयोग दिया है।
दूसरे चरण में और खूबसूरत बनेगा विरासत पार्क
दूसरे चरण में यहां पर एक जल धारा बनाई जाएगी, यह जल प्रपात के जैसा नजर आएगा। अभी यह पार्क में मुगलकालीन छतरियों, पत्थर की रेलिंग, लैंप पोस्ट, लाल किले की प्राचीर से मिलते जुलते डिजाइन, अलंकृत द्वार, एक ओपन-एयर थिएटर और शौचालय की सुविधा से संपन्न है। पार्क को डिजाइन करने वाले आर्किटेक्ट कपिल अग्रवाल ने बताया कि यहां एक फूड कोर्ट भी विकसित किया जा रहा है। आगंतुकों को चांदनी चौक का स्वादिष्ट व्यंजन और पुरानी दिल्ली का हस्तशिल्प यहां मिलेगा।