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केजरीवाल सरकार में आ रही विवादों की बिजली
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 03 Feb 2014 02:57 PM IST
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दिल्ली की केजरीवाल सरकार में लोगों को विवादों की बिजली मिल रही है। जिसका कोई ठिकाना नहीं कब ठप हो जाए।
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पूर्वी और मध्य दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली कंपनी यमुना पावर लिमिटेड के किसी भी बिजली उत्पादन कंपनी के साथ रकम अदायगी को लेकर अच्छे संबंध नहीं हैं।
यमुना पावर पर सिर्फ एनटीपीसी का ही बकाया नहीं है बल्कि अन्य दूसरी बिजली उत्पादन कंपनियों के साथ भी कंपनी का विवाद चल रहा है। इसी कारण बिजली उत्पादन कंपनी सतलुज विद्युत निगम लिमिटेड ने भी यमुना पावर लिमिटेड को बिजली आपूर्ति बंद कर दी है।
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यमुना पावर पर नेशनल हाइड्रो पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) का करीब 24 करोड़ रुपये बकाया है। एनएचपीसी ने भी बिजली देने से में आनाकानी कर रही है। हालांकि यमुना पावर का कहना है कि सर्दी के मौसम में एनएचपीसी से महज 30 मेगावाट की ही बिजली सप्लाई होती है। लिहाजा सप्लाई बंद होने से कोई असर नहीं पड़ेगा।
दामोदर वैली कॉरपोरेशन (डीवीसी) ने भी बिजली आपूर्ति बंद कर दी है और यह विवाद अदालत में चल रहा है। यमुना पावर को 60 से 70 फीसदी बिजली एनटीपीसी से ही मिलती है।
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सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन, यमुना पावर लिमिटेड को रोजान करीब 65 मेगावाट बिजली की आपूर्ति करती है। वहीं दूसरी ओर बिजली कीमत अदा नहीं करने पर सतलुज जल विद्युत निगम ने भी यमुना पावर को अक्तूबर-2013 से बिजली आपूर्ति करना बंद कर चुकी है।
दिल्ली सरकार की बिजली कंपनियों की मजबूरी है इसलिए वे बिजली कीमत नहीं मिलने पर भी बिजली आपूर्ति कर रही है। क्योंकि करीब डेढ़ हजार हजार करोड़ रुपये से अधिक का बकाया इन कंपनियों का भी है। इसके लिए ट्रांसमिशन कंपनी दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) का भी सैकड़ों करोड़ रुपये यमुना पावर लिमिटेड पर बकाया है।