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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Pollution from industries and residential areas, along with that from vehicles, has made the air in Delhi suffocating.

Delhi NCR News: वाहनों के साथ उद्योगों-रिहाइशी क्षेत्रों का प्रदूषण भी बना रहा दिल्ली की हवा को दमघोंटू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 25 Oct 2026 08:41 PM IST
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आईआईटीएम का पूर्वानुमान, 28 अक्तूबर तक औद्योगिक स्रोतों की हिस्सेदारी 5.09% और रिहायशी स्रोतों की 5.20% होगी, दोनों सेक्टर वाहनों के बाद प्रदूषण के दूसरे बड़े स्रोत
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संतोष कुमार
नई दिल्ली। वाहनों के धुएं से बेशक दिल्ली की हवाएं सबसे ज्यादा खराब होती है, लेकिन प्रदूषण की कहानी सिर्फ सड़कों पर ही नहीं दौड़ रही है। राजधानी के औद्योगिक क्षेत्रों और आवासीय गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण का हिस्सा भी दहाई में पहुंचने वाला है। भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के पूर्वानुमान के मुताबिक, 28 अक्तूबर तक सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले अति सूक्ष्मकणों- पीएम2.5 में औद्योगिक स्रोतों की हिस्सेदारी 5.09 फीसदी और रिहायशी स्रोतों की 5.20 फीसदी पहुंच सकती है। दोनों को मिलाकर यह योगदान 10.29 फीसदी हो सकता है।
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आईआईटीएम के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) के आंकड़े बताते हैं कि 25 अक्तूबर को औद्योगिक स्रोतों की हिस्सेदारी 4.649 फीसदी और रिहायशी स्रोतों की 4.678 फीसदी थी। अगले तीन दिनों में दोनों स्रोतों में उतार-चढ़ाव आने का अनुमान है। इस दौरान वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी भी 17.30 फीसदी से बढ़कर 26 अक्तूबर को 20.86 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है। 28 अक्तूबर को इसके 19.39 फीसदी रहने की आशंका है।
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दिल्ली की हवा पर वाहनों का दबाव सबसे ज्यादा बना रहेगा, लेकिन औद्योगिक और रिहायशी गतिविधियों का संयुक्त योगदान भी दस फीसदी के पार जा सकता है। प्रदूषण के इन स्रोतों की हिस्सेदारी में बदलाव मौसम और वायुमंडलीय परिस्थितियों के साथ-साथ अलग-अलग स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन के प्रभाव को भी सामने लाता है।
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दिल्ली से बाहर का धुआं भी बड़ी चुनौती
दिल्ली के स्थानीय स्रोतों के अलावा पड़ोसी जिलों से आने वाला प्रदूषण भी हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है। डीएसएस के पूर्वानुमान के अनुसार, 28 अक्तूबर तक दिल्ली के अपने स्रोतों की हिस्सेदारी करीब 35 से 40 फीसदी के बीच रह सकती है। शेष हिस्से में पड़ोसी राज्यों से आने वाले प्रदूषण और पराली जलाने का योगदान शामिल होगा। एनसीआर के गुरुग्राम और फरीदाबाद समेत हरियाणा के जिलों से होने वाला प्रदूषण दिल्ली की हवा पर असर डालता है। वहीं, हवा की दिशा में बदलाव के साथ उत्तर प्रदेश के जिलों से आने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी भी बदल सकती है। ऐसे में दिल्ली की हवा को साफ करने की चुनौती केवल राजधानी के भीतर उत्सर्जन पर लगाम लगाने तक सीमित नहीं है।
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पराली के धुएं में भी उतार-चढ़ाव
पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी में भी तेजी से बदलाव का अनुमान है। डीएसएस के अनुसार, 25 अक्तूबर को इसका योगदान 5.212 फीसदी था, जो 26 अक्तूबर को बढ़कर दस फीसदी से अधिक हो सकता है। इसके बाद 27 और 28 अक्तूबर को इसमें तेज गिरावट आने का अनुमान है। इन दिनों पराली के धुएं की हिस्सेदारी क्रमशः करीब दो और एक फीसदी तक रह सकती है।

आईआईटीएम के मुताबिक, पराली के धुएं का असर केवल आग लगाने की घटनाओं की संख्या पर निर्भर नहीं करता। हवा की दिशा और मौसमी परिस्थितियां भी तय करती हैं कि खेतों से उठने वाला धुआं दिल्ली तक कितना पहुंचेगा और राजधानी की हवा में उसका कितना योगदान होगा।
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दिल्ली के अलग-अलग स्रोतों से हवा में पीएम2.5 का हिस्सा
प्रदूषण के सोर्स.....25 अक्टूबर.....26 अक्तूबर......27 अक्तूबर...28 अक्तूबर

परिवहन...17.297....20.857.......19.114.......19.389

उद्योग....4.649....4.318........4.494....5.091

आवासीय..4.678......5.303.......4.953......5.197

ऊर्जा....2.435..........1.953......2.006......2.588

निर्माण........2.287............2.862.......2.714.....2.554

रोड डस्ट....1.221.........1.473.....1.368......1.36

अन्य.....1.211.....1.408....1.319....1.351

नोट: सभी आंकड़े फीसदी में हैं। 25 अक्तूबर का आंकड़ा वास्तविक है। जबकि 26-28 अक्तूबर के लिए आईआईटीएम ने पूर्वानुमान लगाया है।
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