स्केच बनाने की नई तकनीक से अंजान है जिले की पुलिस
एक ओर जहां दुनिया भर की पुलिस नई तकनीक के सहारे अपराधियों को ट्रेस कर रही है, वहीं जिले की पुलिस अभी तक पुरानी तकनीक के आधार पर बने स्केच से अपराधियों को पकड़ने में लगी है।
जिले के पूर्व एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के समय स्कॉटलैंड की तर्ज पर फेस आईडेंटीफिकेशन सॉफ्टवेयर बनवाने की तैयारी कर रही थी लेकिन अधिकारी बदलने के साथ ही मामला ठंडे बस्ते में जा पहुंचा।
जानकारों के अनुसार, वर्तमान तकनीक में कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में सैकड़ों तरीके के होंठ, आंख, नाक, कान, बाल समेत पूरे चेहरे के अंग होते हैं। चश्मदीद से पूछकर स्केच बनाने वाला उसका चेहरा कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में डालता रहता है और स्केच तैयार हो जाता है।
बैंक डकैती के स्केच से हुई किरकिरी
स्केच असली व्यक्ति के चेहरे से केवल 30 से 40 फीसदी तक बमुश्किल मिल पाते हैं। स्कॉटलैंड पुलिस के पास अपराधियों और संदिग्ध लोगों का एक बड़ा डाटा मौजूद है। सीसीटीवी की हल्की सी भी मिली फुटेज या स्केच को इसमें फीड करते ही सॉफ्टवेयर उसे पहचान लेता है।
पिछले दिनों दनकौर में बैंक डकैती के संदिग्ध का स्केच बनवाने के लिए उससे मिलते-जुलते व्यक्ति की फोटो खींचकर स्केच बनवाने पर पुलिस की किरकिरी हो गई। इसी आधार पर तीन अन्य बदमाशों के स्केच बनवा रही पुलिस ने इसको जारी करने पर रोक लगा दी है।
स्केच बनवाते समय चश्मदीद की याददाश्त पर निर्भर रहना पड़ता है। ऐसे में सीसीटीवी फुटेज बड़े काम की होती है। ज्यादातर स्थानों पर सीसीटीवी केवल नाम के लिए लगे होते हैं।