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बांग्लादेश के रास्ते दिल्ली-एनसीआर पहुंचे 2000 रुपये के नकली नोट, एक अरेस्ट
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 11 Aug 2018 11:04 PM IST
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Fake Notes
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बृहस्पतिवार को 7.50 लाख के नकली नोट के साथ मालदा (पश्चिम बंगाल) निवासी दीपक मंडल (32) को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से बरामद सभी नोट 2,000 रुपये के हैं। पुलिस के अनुसार, इन नोटों में असली-नकली का अंतर करना बेहद मुश्किल है। इंफ्रारेड किरणें से ही इनके असली और नकली होने की पहचान हो सकती है। आरोपी ने खुलासा किया है कि नकली नोट बांग्लादेश के रास्ते मालदा होते हुए दिल्ली-एनसीआर में आए हैं। आरोपी ने बताया कि वह पिछले एक साल के दौरान मार्केट में दो करोड़ रुपये के नकली नोट चला चुका है। सेल दीपक को रिमांड पर लेकर पूछताछ कर रही है।
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सेल के पुलिस उपायुक्त पीएस कुशवाहा ने बताया कि नकली नोटों का धंधा करने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह की सूचना मिलने पर एसीपी अतर सिंह, इंस्पेक्टर ईश्वर सिंह की टीम ने छानबीन शुरू की। इस दौरान पता चला कि बदमाश इंडो-बांग्लादेश बॉर्डर पर मालदा से नकली नोटों का गोरखधंधा कर रहे हैं। तीन माह के बाद पुलिस कर्मियों की मेहनत रंग लाई। एक सूचना पर बृहस्पतिवार को खानपुर बस स्टैंड से 2,000 के 375 नोट के साथ दीपक को दबोच लिया गया।
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800 में खरीदकर 1200 में बेचते थे
दीपक ने बताया कि वह करीब 12 साल से इस गोरखधंधे में लगा है। वर्ष 2010 में 3 लाख के नकली नोट के मालदा में साथ विकास के साथ पकड़ा गया। मामले में 6 साल की सजा हुई। जमानत पर आने के बाद 2013 में इलाहाबाद में दोनों 2.75 लाख के नकली नोटों संग गिरफ्तार हुए। जेल से बाहर आकर दोनों दोबारा इस धंधे में जुट गए। आरोपी ने बताया कि वह इंडो-बांग्लादेश बॉर्डर पर 800 रुपये में 2000 का नकली नोट खरीदकर दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के अन्य राज्यों में 1200 रुपये में बेचता था।
नोट में सिक्योरिटी थ्रेड और वाटर मार्क भी मौजूद
पुलिस का दावा है कि नोटबंदी के बाद पकड़े गए नोटों में यह सबसे अच्छे हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि नोट में सिक्योरिटी थ्रेड, वाटर मार्क के अलावा अन्य सुरक्षा मानक भी मौजूद है। इंफ्रारेड किरणों से ही नोटों के असली या नकली होने का पता लग पा रहा है।
दीपक ने बताया कि वह करीब 12 साल से इस गोरखधंधे में लगा है। वर्ष 2010 में 3 लाख के नकली नोट के मालदा में साथ विकास के साथ पकड़ा गया। मामले में 6 साल की सजा हुई। जमानत पर आने के बाद 2013 में इलाहाबाद में दोनों 2.75 लाख के नकली नोटों संग गिरफ्तार हुए। जेल से बाहर आकर दोनों दोबारा इस धंधे में जुट गए। आरोपी ने बताया कि वह इंडो-बांग्लादेश बॉर्डर पर 800 रुपये में 2000 का नकली नोट खरीदकर दिल्ली-एनसीआर के अलावा देश के अन्य राज्यों में 1200 रुपये में बेचता था।
नोट में सिक्योरिटी थ्रेड और वाटर मार्क भी मौजूद
पुलिस का दावा है कि नोटबंदी के बाद पकड़े गए नोटों में यह सबसे अच्छे हैं। पुलिस अधिकारी ने बताया कि नोट में सिक्योरिटी थ्रेड, वाटर मार्क के अलावा अन्य सुरक्षा मानक भी मौजूद है। इंफ्रारेड किरणों से ही नोटों के असली या नकली होने का पता लग पा रहा है।