फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   pg owners submits false affidavit to save property tax

संपत्तिकर बचाने को 292 पीजी संचालकों ने दिया झूठा घोषणापत्र

Tue, 11 Jul 2017 09:31 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Tue, 11 Jul 2017 09:31 PM IST
विज्ञापन
 pg owners submits false affidavit to save property tax
demo pic

साइबर सिटी के पीजी संचालकों ने नगर निगम की आंखों में धूल झोंक कर संपत्तिकर बचाने की भरपूर कोशिश की है। इससे हर साल नगर निगम को पीजी संचालकों द्वारा करोड़ों रुपये की चपत लगाई गई। संपत्तिकर बचाने के लिए ज्यादातर पीजी संचालकों ने नगर निगम में झूठा शपथ पत्र दाखिल कर अपनी संपत्ति को व्यवसायिक की जगह रिहायशी बताया है। इस प्रकार हर साल नगर निगम को एक करोड़ रुपये से अधिक रुपये की चपत लगती है। 

विज्ञापन


मंगलवार को निगमायुक्त वी उमाशंकर ने शहर में संचालित सभी पीजी संचालकों के हलफनामे और मौका स्थिति की जांच करने के लिए अधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। पांच जुलाई को नाथूपुर में पीजी से नैनीताल के छात्र को पांचवीं मंजिल से फेंक कर हत्या करने का मामला सामने आया था। जिसमें निगम अधिकारियों से जब पुलिस ने पीजी का ब्यौरा मांगा तो नगर निगम ने उस जगह पर रिहायशी मकान होने की बात कही। उसके बाद पता चला की यहां पर तो कई साल से पीजी चल रहा है। उसके बाद साइबर सिटी में निगम अधिकारियों ने अचानक सर्वे किया तो पता चला कि ज्यादातर पीजी संचालकों ने झूठा शपथ पत्र देकर प्रॉपर्टी टैक्स की चोरी की है। 
विज्ञापन


शहर में संचालित 292 पीजी संचालकों ने संपत्ति की श्रेणी में बदलाव कराया है। पहले इनकी संपत्ति पीजी, व्यवसायिक में दर्ज थी लेकिन पिछले दो साल से यह पीजी संचालक निगम को झूठा शपथ पत्र देकर करोड़ों रुपये की चपत लगा रहे हैं। व्यवसायिक संपत्ति धारकों पर साढ़े सात रुपये प्रति वर्ग फीट के हिसाब से संपत्तिकर की देनदारी बनती है। वहीं इस संपत्ति के रिहायशी में आने पर 300 वर्ग फीट एरिया के लिए केवल एक रुपये ही देना होता है। वहीं 300 से 500 वर्ग फीट एरिया के लिए महज चार रुपये संपत्तिकर देना होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


रिहायशी संपत्ति पर सबसे कम प्रॉपर्टी टैक्स 
संपत्तिकर के लिहाज से शहर की सभी संपत्तियों को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें से सबसे कम रिहायशी संपत्तियों पर टैक्स रखा गया है। वहीं व्यवसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों पर ज्यादा टैक्स का प्रावधान है। इसके लिए नगर निगम ने संपत्ति धारकों को खुद ही संपत्ति का एसेसमेंट करने एवं संपत्ति पर बनने वाली कर की राशि का भुगतान करने के आदेश दिए थे। इस संबंध में संपत्तिधारकों से निगम अधिकारियों ने घोषणा पत्र भी लिया  था। 

औचक सर्वे में हुआ खुलासा
निगम अधिकारियों ने पिछले दिन पीजी से रिहायशी में बदली संपत्तियों का औचक सर्वे किया था। इसमें पाया गया कि इन संपत्तिधारकों ने भले ही कागजों में संपत्ति की श्रेणी बदलवा ली।  लेकिन अभी भी यहां पीजी का संचालन किया जा रहा है। ऐसे में अब निगमायुक्त ने पूरे शहर में संचालित छोटी बड़ी सभी तरह की पीजी की जांच कराने के आदेश दिए हैं। इसके लिए अलग अलग टीमों का गठन किया गया है।


15 दिन में आएगी जांच की रिपोर्ट
निगमायुक्त वी उमाशंकर के मुताबिक जांच के लिए गठित टीमों को 15 दिन के अंदर जांच कर रिपोर्ट देने को कहा गया है। जांच रिपोर्ट में यदि खामी पाई जाती है या हलफनामा झूठा पाया जाता है तो म्यूनिसिपल एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed