दिल्ली अग्निकांड: अपनों की तलाश में भटकते रहे लोग, शाम को मिली लाशें
न्यू अनाज मंडी स्थित इमारत में आग लगने की सूचना मिलने के बाद सबसे पहले लोग दिल्ली के लोकनायक अस्पताल पहुंचे। दिनभर वह अपने दोस्त या परिजन की तलाश में मारे-मारे घूमते रहे। कभी इस वार्ड तो कभी उस वार्ड में खोजबीन की जाती रही, परंतु शाम होते-होते उन्हें अपनों की लाशें मिलीं तो कोहराम मच गया।
बिहार के मुज्जफरपुर निवासी बाबर के पांच परिचित इस घटना के बाद लापता थे। वे लोकनायक अस्पताल में सुबह से दोपहर तक कभी वार्ड 20 तो कभी वार्ड 12 में अपने मरीजों की तलाश कर रहे थे, लेकिन दोपहर बाद जब वे लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो वहां पुलिस ने उन्हें शवगृह में भेजा। गेट से भागते हुए अंदर पहुंचे बाबर कुछ ही देर में रोते-बिलखते बाहर आए। उन्होंने बताया कि पांचों परिचित के शव अंदर रखे हैं।
ठीक इसी तरह से सुनील अपने दोस्त की खोज में पहले लोकनायक अस्पताल गए। वहां न मिलने पर पुलिस ने उन्हें लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज भेज दिया। यहां भी जब उन्हें अपना दोस्त तौकीर नहीं मिला तो वे आरएमएल अस्पताल तक पहुंच गए। देर शाम जब वे वापस लोकनायक अस्पताल पहुंचे तो उन्हें तौकीर का शव लोकनायक अस्पताल के शवगृह में मिला। हालात ये थे कि ज्यादातर लोग दिनभर अपने परिजनों की तलाश ही कर रहे थे। इनमें से जिन्हें अपने परिचित जीवित मिल रहे थे वे भगवान और अल्लाह को याद कर रहे थे। बाकी अपने पहचान वालों के चले जाने का मातम मना रहे थे।
अमर उजाला की मदद से अपने भाई बबलू तक पहुंचा अलाउद्दीन
लोकनायक अस्पताल के बर्न विभाग के बाहर रोता हुआ अलाउद्दीन अपने भाई बबलू, राजू और सोनू की तलाश में था। वह सुबह 11 बजे जब अमर उजाला की टीम से मिला तो उसने आपबीती सुनाई। उसने कहा कि वह तीनों की तलाश कई घंटों से कर रहा है, लेकिन उसकी कोई मदद नहीं कर रहा है।
अमर उजाला की टीम ने लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, आरएमएल और लोकनायक अस्पताल प्रबंधन से संपर्क कर करीब 10 मिनट बाद बबलू का शव लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में, सोनू आरएमएल में भर्ती और राजू के लापता होने की जानकारी अलाउद्दीन को दी। इस सूचना को पाते ही अलाउद्दीन दौड़ पड़ा। शाम को जब वह वापस टीम को लोकनायक अस्पताल में मिला तो पता चला कि लापता राजू के बारे में उसे देर शाम तक पता नहीं चला था।