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Delhi NCR News: मुफ्त कैंसर जांच से भी कतरा रहे लोग, तीन दिन में पहुंचे सिर्फ सात मरीज
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-डॉक्टर बोलीं-रिपोर्ट पॉजिटिव आने के डर से जांच कराने से पीछे हटते हैं लोग
- मेरी दिल्ली उत्सव में दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने लगाया था शिविर
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। कैंसर के बारे में जानकारी लेने के लिए लोग सवाल तो खूब पूछते हैं, लेकिन जब जांच कराने या वैक्सीन लगवाने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो क्या होगा। इसी डर और जागरूकता की कमी का असर दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) की ओर से लगाए गए मुफ्त स्वास्थ्य शिविर में भी देखने को मिला। तीन दिवसीय शिविर में सिर्फ सात लोग ही जांच और टीकाकरण के लिए पहुंचे।
डीएससीआई के क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार, कैंसर को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं, लेकिन जांच कराने के समय वे हिचकिचाने लगते हैं। उन्हें लगता है कि अगर बीमारी की पुष्टि हो गई तो आगे क्या होगा। इसी डर के कारण लोग जांच टालते रहते हैं, जबकि समय पर बीमारी का पता चलने से इलाज शुरू करने और जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है। इन सात लोगों में से एक व्यक्ति सर्वाइकल कैंसर की जांच, एक प्रोस्टेट कैंसर की जांच और तीन लोग मुंह के कैंसर की जांच के लिए आए। जबकि, दो लोगों ने टीकाकरण की सुविधा ली। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि कैंसर के डर से जांच से दूर न भागें। शरीर में कोई असामान्य बदलाव, लंबे समय तक रहने वाली गांठ, न भरने वाला घाव या लगातार बनी रहने वाली परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
बीमारी का डर जांच से बना रहा दूरी
डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने बताया कि कैंसर को लेकर डर और सही जानकारी का अभाव लोगों को जांच कराने से रोकता है। कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग बीमारी की पुष्टि होने की आशंका से डॉक्टर के पास जाने से भी बचते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलना इलाज के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जांच में देरी होने से बीमारी का पता आगे के चरणों में चल सकता है, जिससे इलाज अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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लक्षण दिखें तो डॉक्टर से लें सलाह
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- मेरी दिल्ली उत्सव में दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट ने लगाया था शिविर
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। कैंसर के बारे में जानकारी लेने के लिए लोग सवाल तो खूब पूछते हैं, लेकिन जब जांच कराने या वैक्सीन लगवाने की बात आती है तो पीछे हट जाते हैं। उन्हें डर रहता है कि कहीं रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई तो क्या होगा। इसी डर और जागरूकता की कमी का असर दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (डीएससीआई) की ओर से लगाए गए मुफ्त स्वास्थ्य शिविर में भी देखने को मिला। तीन दिवसीय शिविर में सिर्फ सात लोग ही जांच और टीकाकरण के लिए पहुंचे।
डीएससीआई के क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. प्रज्ञा शुक्ला के अनुसार, कैंसर को लेकर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं, लेकिन जांच कराने के समय वे हिचकिचाने लगते हैं। उन्हें लगता है कि अगर बीमारी की पुष्टि हो गई तो आगे क्या होगा। इसी डर के कारण लोग जांच टालते रहते हैं, जबकि समय पर बीमारी का पता चलने से इलाज शुरू करने और जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है। इन सात लोगों में से एक व्यक्ति सर्वाइकल कैंसर की जांच, एक प्रोस्टेट कैंसर की जांच और तीन लोग मुंह के कैंसर की जांच के लिए आए। जबकि, दो लोगों ने टीकाकरण की सुविधा ली। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि कैंसर के डर से जांच से दूर न भागें। शरीर में कोई असामान्य बदलाव, लंबे समय तक रहने वाली गांठ, न भरने वाला घाव या लगातार बनी रहने वाली परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
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बीमारी का डर जांच से बना रहा दूरी
डॉ. प्रज्ञा शुक्ला ने बताया कि कैंसर को लेकर डर और सही जानकारी का अभाव लोगों को जांच कराने से रोकता है। कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोग बीमारी की पुष्टि होने की आशंका से डॉक्टर के पास जाने से भी बचते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलना इलाज के लिहाज से महत्वपूर्ण है। जांच में देरी होने से बीमारी का पता आगे के चरणों में चल सकता है, जिससे इलाज अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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