ओपी शर्मा ने नहीं मांगी लांबा से माफी, विधानसभा सत्र से फिर हुए बाहर
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दिल्ली विधानसभा के दो सत्र के लिए निलंबित भाजपा विधायक ओपी शर्मा को हाईकोर्ट से झटका लगा है। अदालत ने आप विधायक अलका लांबा से माफी न मांगने पर ओपी शर्मा को वर्तमान में चल रहे दो दिवसीय सत्र में भाग लेने की इजाजत देने से इनकार कर दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों में समझौता न होने पर वे कोई भी निर्णय नहीं दे रहे। अदालत ने अब शर्मा द्वारा निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई करने का निर्णय किया है।
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने शर्मा व लांबा को बृहस्पतिवार को अदालत में तलब किया था ताकि बातचीत कर मामले का निपटारा करवाया जा सके। ओपी शर्मा के अड़े रहने पर लांबा ने भी समझौते से इनकार कर दिया। आखिर अदालत ने ओपी के उस तर्क को खारिज कर दिया जिसमें वर्तमान सत्र में शामिल होने की इजाजत मांगी गई थी।
अवकाश के बावजूद तय हुई थी विशेष सुनवाई
न्यायमूर्ति मनमोहन सिंह ने अवकाश के बावजूद बृहस्पतिवार को इस मामले की विशेष सुनवाई तय की थी। आप विधायक अलका लांबा व ओपी शर्मा अपने वकीलों के साथ अदालत में पहुंच गए।
लांबा ने अदालत के समक्ष एक लिखित माफीनामा करार पेश करते हुए कहा कि यदि शर्मा इसे स्वीकार करते है तो वे समझौते के लिए तैयार है। न्यायमूर्ति ने लांबा व ओपी को अलग-अलग अपने चैंबर में बुलाकर बात की।
उन्होंने दोनों पक्षों के वकीलों से भी चैंबर में उनका पक्ष सुना। सूत्रों के अनुसार ओपी शर्मा इस बात पर अड़े रहे कि लांबा भी उनसे माफी मांगे। उधर, लांबा इसके लिए तैयार नहीं थी, उनका कहना था कि मैंने ओपी शर्मा के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया। इसके अलावा ओपी को जो सजा दी गई है वह आचरण कमेटी की सिफारिश पर दी गई है और उसमें उनकी कोई भूमिका नहीं है।
ओपी माफी मांगने के लिए तैयार नहीं हुए
करीब दो घंटे तक यह सिलसिला चलता रहा। अदालत ने उन्हें समझाया कि यदि माफी या खेद प्रकट करने से मामले को निपटाया जा सकता है तो ऐसा किया जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी कहा कि वे मामले को पुन: आचरण कमेटी के पास भेज देंगे ताकि इस मुद्दे पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जा सके। इसके अलावा वे ऐसा आदेश देंगे जिसमें न लांबा की जीत मानी जाएगी न ही ओपी की हार। बावजूद इसके ओपी माफी मांगने के लिए तैयार नहीं हुए।
आखिर अदालत ने एक ड्राफ्ट तैयार कर दोनों पक्षों के वकीलों को दिया ताकि वे उस पर सहमत हो जाएं तो वे निर्णय दे सकें। इसके बाद भी दोनों पक्षों में रजामंदी नहीं होने पर अदालत ने समझौता प्रक्रिया को बंद कर दिया।
अलका बहन के समान लेकिन माफी नहीं मांगेंगे
अब अदालत ने ओपी की याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई का निर्णय किया है। ओपी ने विधानसभा सत्र में उनके निलंबन को एकतरफा बताते हुए इस निर्णय को रद्द की मांग की हैै। वहीं विधानसभा सचिवालय के अधिवक्ता ने विधानसभा में लिए निर्णय पर अदालत में सुनवाई के औचित्य पर सवाल उठाया है। अब पहले अदालत यह तय करेगी कि क्या यह याचिका विचार योग्य है या नहीं।
ओपी ने कहा कि लांबा उनकी बहन के समान हैं लेकिन वे माफी नहीं मांगेंगे। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लांबा तो एक मोहरा है मुख्य रूप से पूरा षड्यंत्र मुख्यमंत्री केजरीवाल का है। जब उनसे पूछा गया कि यदि ऐसा है तो आप माफी मांग कर मामले को खत्म क्यों नहीं करते तब उन्होंने फिर कहा कि वे माफी नहीं मांगेंगे।
आप विधायक अलका लांबा ने कहा कि उनका ओपी से कोई विवाद नहीं। उनके द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने पर आचरण समिति ने कार्रवाई की है मैं माफी देने वाली कौन हूं। फिर भी अदालत के सम्मान में आई हूं, माफी तो मांगनी ही होगी।