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अब सर्किल रेट पर होगी रजिस्ट्री, दर्ज हो सकेंगी व्यवसायिक संपत्तियां
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Tue, 10 Nov 2015 06:35 PM IST
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व्यावसायिक संपत्तियों के रजिस्ट्री की पद्धति में बदलाव से प्रॉपर्टी खरीदारों को बड़ी राहत मिली है। सर्किल रेट से रजिस्ट्री होने से व्यावसायिक संपत्तियों की रजिस्ट्री सस्ती हो जाएगी।
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नोएडा में करीब 3000 संपत्तियां दर्ज होने और 60 से 70 करोड़ रुपये स्टांप शुल्क मिलने का अनुमान है। किराया पद्धति से बहुत ज्यादा कीमत होने के कारण जो खरीदार रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे थे।
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वे अब दर्ज करा सकेंगे। दरअसल, आयकर विभाग सर्किल रेट के हिसाब से संपत्तियों की कीमत का आकलन कर पैसे के लेनदेन का ब्योरा खंगालता है।
यहां की ज्यादातर संपत्तियों की कीमत सर्किल रेट की वजह से बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं, जबकि बाजार में उससे कम कीमत पर जमीन मिल जाती है।
अगर कोई खरीदार सर्किल रेट से कम कीमत पर प्रॉपर्टी खरीदता है और उसी रेट पर रजिस्ट्री कराता है तो आयकर विभाग का नोटिस आ जाता है।
इस वजह से नई व्यावसायिक संपत्तियों की खरीद-बिक्री बहुत घट गई है। साथ ही जिन लोगों ने पहले ही खरीद लिया है, उनकी रजिस्ट्री लंबे समय से रुकी हुई है।
उदाहरण के तौर पर बीते वर्ष नोएडा प्राधिकरण की तरफ से तीन बार व्यावसायिक संपत्तियों की योजना निकाली, मगर आधी भी नहीं बिकीं। इसकी वजह यही थी कि प्राधिकरण ने इन संपत्तियों का जो रिजर्व प्राइस रखा, उससे भी कम कीमत पर प्रॉपर्टी मिल रही है।
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सेक्टर-62 में कई व्यावसायिक संपत्तियां सिर्फ इसलिए दर्ज नहीं हो पा रही हैं क्योंकि यहां का सर्किल रेट ज्यादा है। यही हाल सेक्टर-93, 110, 115 आदि सेक्टरों का भी है।
आवासीय सेक्टरों के अंदर बनी मार्केट में भी दुकानों की खरीद-बिक्री नहीं हो रही। बता दें, कि प्रदेश कैबिनेट ने सोमवार को निर्णय लिया है कि व्यावसायिक संपत्तियों की रजिस्ट्री किराया पद्धति के बजाय सर्किल रेट के आधार पर होगा।
रजिस्ट्री शुल्क बढ़ने से 60 करोड़ अधिक
प्रदेश सरकार ने रजिस्ट्री शुल्क दोगुना कर दिया है। अब 10,000 रुपये शुल्क केबजाय 20,000 रुपये देने होंगे। इसकी अधिसूचना शीघ्र जारी होने जा रही है। उसके बाद ही इसे लागू माना जाएगा।
इस फैसले से प्रदेश सरकार को सिर्फ नोएडा से करीब 60 करोड़ रुपये अधिक की आमदनी होगी। अब तक साल भर में करीब 60 करोड़ रुपये ही रजिस्ट्री शुल्क के रूप में प्राप्त होता था। अब 120 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।
‘सेक्टर-18 में 60 मीटर के भूखंड की कीमत किराया पद्धति के आधार पर करीब सात करोड़ रुपये होता है, जबकि सर्किल रेट के हिसाब से करीब 3.5 करोड़ रुपये ही होता है।
इस फैसले से व्यावसायिक संपत्ति खरीदारों को बड़ी राहत मिल जाएगी। रजिस्ट्री शुल्क बढ़ाकर सरकार ने संपत्ति खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ डाला है। मौजूदा हालात में रजिस्ट्री शुल्क नहीं बढ़ाना चाहिए था।’
एलसी शर्मा, डीड राइटर, नोएडा