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15 साल से अपने अधिकारों को तरस रहे ग्रामीण
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पुन्हाना। जिले के पुन्हाना खंड के गांव शमशाबाद खैंचातान के लोग करीब 15 साल से अपने अधिकारों को तरस रहे हैं। न तो गांव की अपनी पंचायत है और न ही नगरपालिका में शामिल किया गया है। ऐसे में ग्रामीण स्कूल, बिजली, पेयजल, सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। इतना ही नहीं लोगों को आज तक पंचायत चुनावों में मतदान का अधिकार भी नहीं दिया गया है।
गांव शमशाबाद खैंचातान करीब 15 साल पहले तक पटाकपुर ग्राम पंचायत में शामिल किया गया था। सरकार ने पटाकपुर, दल्लाबास और पटपडबास गांवों को शामिल कर पुन्हाना को नगर पालिका बनाने के आदेश दिए थे। नगरपालिका में गांवों को शामिल करते समय अधिकारी शमशाबाद खैंचातान गांव को भूल गए। उसको न तो नगरपालिका व पंचायत में जोड़ा और न ही अलग पंचायत बनाई। गांव के करीब 250 वोटर अपनी पंचायत चुनने से वंचित हैं। ऐसे में गांव विकास से भी अछूता है।
गांव के चरण सिंह, मोहम्मद याकूब, आफताब, गणेश कुमार का कहना है कि जब उनको पता चला की उनके गांव के लोगों को वोट डालने का अधिकार नहीं हे, तो वे लोग इसके संबंध में अधिकारियों और नेताओं से मिले। उन्होंने कई बार इसकी शिकायत भी की, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला ने बनाई थी पंचायतें
पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चैटाला कि सरकार ने प्रदेश में कई नगर पालिका को पंचायत बनाया था। जिससे नकनपुर और पुन्हाना अलग पंचायत बन गई। साल 2008 में काग्रेस सरकार ने पुन्हाना का क्षेत्र बढ़ाकर दोबारा से नगर पालिका का दर्जा दे दिया था। पुन्हाना नगर पालिका में नकनपुर, पुन्हाना पंचायत के अलावा बास दल्लला, पटपडबास और पटाकपुर गांवों को जोड़ दिया गया। लेकिन अधिकारियों ने पटाकपुर ग्राम पंचायत का हिस्सा रहे शमशाबाद खैंचातान गांव को शामिल नहीं किया।
विकास से भी है अछूता
गांव की अपनी पंचायत न होने कि वजह से आज तक विकास नहीं किया गया है। गलियों में कीचड़ भरी रहती है। रात के समय लोगों का वहां से निकलना भी मुश्किल होता है। नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में जाने वाले लोग अक्सर इन रास्तों में चोट खा जाते हैं। गांव स्कूल, बिजली, पीने के पानी, सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। गांव की राधा, बबीता आदि महिलाओं का कहना है कि गांव में पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। लोग अपने पैसे खर्च कर व्यवस्था करते हैं।
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गांव शमशाबाद खैंचातान करीब 15 साल पहले तक पटाकपुर ग्राम पंचायत में शामिल किया गया था। सरकार ने पटाकपुर, दल्लाबास और पटपडबास गांवों को शामिल कर पुन्हाना को नगर पालिका बनाने के आदेश दिए थे। नगरपालिका में गांवों को शामिल करते समय अधिकारी शमशाबाद खैंचातान गांव को भूल गए। उसको न तो नगरपालिका व पंचायत में जोड़ा और न ही अलग पंचायत बनाई। गांव के करीब 250 वोटर अपनी पंचायत चुनने से वंचित हैं। ऐसे में गांव विकास से भी अछूता है।
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गांव के चरण सिंह, मोहम्मद याकूब, आफताब, गणेश कुमार का कहना है कि जब उनको पता चला की उनके गांव के लोगों को वोट डालने का अधिकार नहीं हे, तो वे लोग इसके संबंध में अधिकारियों और नेताओं से मिले। उन्होंने कई बार इसकी शिकायत भी की, लेकिन आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।
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पूर्व मुख्यमंत्री ओपी चौटाला ने बनाई थी पंचायतें
पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चैटाला कि सरकार ने प्रदेश में कई नगर पालिका को पंचायत बनाया था। जिससे नकनपुर और पुन्हाना अलग पंचायत बन गई। साल 2008 में काग्रेस सरकार ने पुन्हाना का क्षेत्र बढ़ाकर दोबारा से नगर पालिका का दर्जा दे दिया था। पुन्हाना नगर पालिका में नकनपुर, पुन्हाना पंचायत के अलावा बास दल्लला, पटपडबास और पटाकपुर गांवों को जोड़ दिया गया। लेकिन अधिकारियों ने पटाकपुर ग्राम पंचायत का हिस्सा रहे शमशाबाद खैंचातान गांव को शामिल नहीं किया।
विकास से भी है अछूता
गांव की अपनी पंचायत न होने कि वजह से आज तक विकास नहीं किया गया है। गलियों में कीचड़ भरी रहती है। रात के समय लोगों का वहां से निकलना भी मुश्किल होता है। नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में जाने वाले लोग अक्सर इन रास्तों में चोट खा जाते हैं। गांव स्कूल, बिजली, पीने के पानी, सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित है। गांव की राधा, बबीता आदि महिलाओं का कहना है कि गांव में पीने के पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। लोग अपने पैसे खर्च कर व्यवस्था करते हैं।