{"_id":"60e1f3da8ebc3ebf59350f06","slug":"this-time-also-the-government-forgot-the-village-shamshabad-khanchatan-mewat-news-noi591535333","type":"story","status":"publish","title_hn":"इस बार भी सरकार गांव शमशाबाद खैंचातान को भूल गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इस बार भी सरकार गांव शमशाबाद खैंचातान को भूल गई
विज्ञापन
पुन्हाना (यूनुस अलवी)। नूंह जिला के पुन्हाना खंड का शमशाबाद खैंचातान ऐसा गांव है जिसकी न तो अपनी पंचायत है और न ही वह किसी पंचायत व नगरपालिका में शामिल किया गया है। जिसकी वजह से गांव स्कूल, बिजली, पीने के पानी, सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है।
पिछले 15 साल से गांव के लोग पंचायत व निकाय चुनावों में अपना वोट डालने के अधिकार से वंचित है। इस बार गांव के लोगों को सरकार से उम्मीद जगी थी कि उनको नगरपालिका में शामिल कर लिया जायेगा या फिर अपनी अलग पंचायत बना दी जायेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी गांव के लोगों को पांच साल और इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि नूंह जिला में सरकार ने आठ नई पंचायतें बर्नाइं। उनमें शमशाबाद खैंचातान का नाम शामिल नहीं किया गया। वहीं पुन्हाना नगर पालिका के वार्डों का अब ड्रा हो चुका है, जिससे लोगों की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं।
खंड का गांव शमशाबाद खैंचातान करीब 15 साल पहले तक पटाकपुर गांव की पंचायत में शामिल था। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की सरकार ने कम आबादी की वजह से प्रदेश में कई नगर पालिका तोड़ कर पंचायत बना दी थी। जिससे नकनपुर और पुन्हाना पंचायत अलग पंचायत बन गई थी। वर्ष 2008 में कांग्रेस सरकार ने पुन्हाना का क्षेत्र बढ़ाकर दुबारा से नगरपालिका का दर्जा दे दिया था। पुन्हाना नगर पालिका में नकनपुर, पुन्हाना पंचायत के अलावा बास दल्ला, पटपड़बास और पटकपुर गांवों को जोड़ दिया था। गांवों को नगरपालिका में शामिल करते समय अधिकारी शमशाबाद खैंचातान गांव को भूल गए। इन्हें न तो नगरपालिका व पंचायत में जोड़ा ने ही उनकी अलग पंचायत बनाई। अधिकारियों कि लापरवाही ने गांव के लोगों से पंचायत चुनावों में वोट डालने का अधिकार छीन लिया था। गांव के करीब 250 वोटर पिछले 15 साल से अपनी पंचायत चुनने से वंचित रहे गये हैं। संवाद
विज्ञापन
अब टूट चुकी है आस
गांव के चरण सिंह, मोहम्मद याकूब, आफताब और गणेश कुमार का कहना है कि जब उनको पता चला कि उनके गांव के लोगों को वोट डालने से वंचित कर दिया है तभी से गांव के नगरपालिका में जोड़ने के लिये अधिकारी और नेताओं से शिकायत करते आ रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अब तो उनकी आस ही टूट गई है। क्योंकि जिले में बनी 8 नई पंचायतों में उनके गांव का नाम नहीं आया और नगर पालिका के वार्डों का आरक्षण हो चुका है।
सरकार की योजना का यहां कोई फायदा नहीं मिलता
गांव की अपनी पंचायत न होने कि वजह से गांव में विकास नाम की कोई चीज नहीं हैं। सभी गलियों में कीचड़ भरी हुई है। रात के समय तो उन गलियों से कोई निकल नहीं सकता है। नमाज पढ़ने के लिये मस्जिद में जाने वाले लोग अकसर गिर जाते हैं जिसकी वजह से उनके नमाज के कपडे़ खराब हो जाते हैं। गांव स्कूल, बिजली, पीने के पानी, सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव की राधा, बबीता महिलाओं का कहना है कि गांव में पीने के पानी और रास्तों की भारी समस्या हैं। लोगों ने अपने पैसे से बिजली के खंभे रास्ते बनवाते हैं। उनको सरकार की किसी भी योजना का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
विभाग के पास भेजा है प्रस्ताव
पंचायत ऑफिसर नसीम अहमद का कहना है कि शमशाबाद खैंचातान गांव को नगरपालिका पुन्हाना में शामिल करने के लिए विभाग के पास प्रस्ताव भेजा दिया था। किन कारणों से इसे नगरपालिका में जोड़ा नहीं गया है ये तो उच्च अधिकारी ही बता सकते है। वहीं, पुन्हाना नगरपालिका की चेयरपर्सन रूबीना का कहना है कि उन्होंने भी शमशाबाद खैंचातान गांव को नगरपालिका में जोड़ने का प्रस्ताव भेजा लेकिन इस बार भी शामिल नहीं हो सका है।
विज्ञापन
पिछले 15 साल से गांव के लोग पंचायत व निकाय चुनावों में अपना वोट डालने के अधिकार से वंचित है। इस बार गांव के लोगों को सरकार से उम्मीद जगी थी कि उनको नगरपालिका में शामिल कर लिया जायेगा या फिर अपनी अलग पंचायत बना दी जायेगी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अभी गांव के लोगों को पांच साल और इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि नूंह जिला में सरकार ने आठ नई पंचायतें बर्नाइं। उनमें शमशाबाद खैंचातान का नाम शामिल नहीं किया गया। वहीं पुन्हाना नगर पालिका के वार्डों का अब ड्रा हो चुका है, जिससे लोगों की संभावनाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं।
विज्ञापन
खंड का गांव शमशाबाद खैंचातान करीब 15 साल पहले तक पटाकपुर गांव की पंचायत में शामिल था। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला की सरकार ने कम आबादी की वजह से प्रदेश में कई नगर पालिका तोड़ कर पंचायत बना दी थी। जिससे नकनपुर और पुन्हाना पंचायत अलग पंचायत बन गई थी। वर्ष 2008 में कांग्रेस सरकार ने पुन्हाना का क्षेत्र बढ़ाकर दुबारा से नगरपालिका का दर्जा दे दिया था। पुन्हाना नगर पालिका में नकनपुर, पुन्हाना पंचायत के अलावा बास दल्ला, पटपड़बास और पटकपुर गांवों को जोड़ दिया था। गांवों को नगरपालिका में शामिल करते समय अधिकारी शमशाबाद खैंचातान गांव को भूल गए। इन्हें न तो नगरपालिका व पंचायत में जोड़ा ने ही उनकी अलग पंचायत बनाई। अधिकारियों कि लापरवाही ने गांव के लोगों से पंचायत चुनावों में वोट डालने का अधिकार छीन लिया था। गांव के करीब 250 वोटर पिछले 15 साल से अपनी पंचायत चुनने से वंचित रहे गये हैं। संवाद
विज्ञापन
अब टूट चुकी है आस
गांव के चरण सिंह, मोहम्मद याकूब, आफताब और गणेश कुमार का कहना है कि जब उनको पता चला कि उनके गांव के लोगों को वोट डालने से वंचित कर दिया है तभी से गांव के नगरपालिका में जोड़ने के लिये अधिकारी और नेताओं से शिकायत करते आ रहे हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। अब तो उनकी आस ही टूट गई है। क्योंकि जिले में बनी 8 नई पंचायतों में उनके गांव का नाम नहीं आया और नगर पालिका के वार्डों का आरक्षण हो चुका है।
सरकार की योजना का यहां कोई फायदा नहीं मिलता
गांव की अपनी पंचायत न होने कि वजह से गांव में विकास नाम की कोई चीज नहीं हैं। सभी गलियों में कीचड़ भरी हुई है। रात के समय तो उन गलियों से कोई निकल नहीं सकता है। नमाज पढ़ने के लिये मस्जिद में जाने वाले लोग अकसर गिर जाते हैं जिसकी वजह से उनके नमाज के कपडे़ खराब हो जाते हैं। गांव स्कूल, बिजली, पीने के पानी, सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव की राधा, बबीता महिलाओं का कहना है कि गांव में पीने के पानी और रास्तों की भारी समस्या हैं। लोगों ने अपने पैसे से बिजली के खंभे रास्ते बनवाते हैं। उनको सरकार की किसी भी योजना का कोई फायदा नहीं हो रहा है।
विभाग के पास भेजा है प्रस्ताव
पंचायत ऑफिसर नसीम अहमद का कहना है कि शमशाबाद खैंचातान गांव को नगरपालिका पुन्हाना में शामिल करने के लिए विभाग के पास प्रस्ताव भेजा दिया था। किन कारणों से इसे नगरपालिका में जोड़ा नहीं गया है ये तो उच्च अधिकारी ही बता सकते है। वहीं, पुन्हाना नगरपालिका की चेयरपर्सन रूबीना का कहना है कि उन्होंने भी शमशाबाद खैंचातान गांव को नगरपालिका में जोड़ने का प्रस्ताव भेजा लेकिन इस बार भी शामिल नहीं हो सका है।