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आंदोलन की कमजोरी बनी 'चौधराहट' की लड़ाई
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आंदोलन की कमजोरी बनी ‘चौधराहट’ की लड़ाई
नोएडा (योगेश शर्मा)। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली घेरने निकले किसान अब अपने ही नेताओं की आपसी खींचतान में उलझते दिख रहे हैं। किसान संगठनों के बीच वार-पलटवार का खेल शुरू हो गया है। गाजीपुर से लेकर चिल्ला बॉर्डर तक इसकी झलक दिखाई देने लगी है। मंगलवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसान आंदोलन के 15वें दिन कृषि कानून से ज्यादा संगठन में गुटबाजी की चर्चा जोरों पर रही। आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसान अपने मुद्दों से भटके नजर आए। संगठन में लगी इस्तीफों की झड़ी को ‘चौधराहट’ की लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, सोमवार सवेरे ही गाजीपुर बॉर्डर से राकेश टिकैत गुट ने भानु प्रताप गुट पर गुगली फेंककर संगठन में खलबली मचा दी थी। दोपहर नहीं हो पाई थी कि कोर कमेटी की सहमति के बिना फैसला लिए जाने के विरोध में भानु गुट के एक धड़े ने इस्तीफों की लंबी फेहरिस्त जारी कर दी। राष्ट्रीय महासचिव के पद पर रहे बेगराज गुर्जर ने बाकायदा वीडियो जारी कर अपनी और अपने साथियों की कुंठा का इजहार कर दिया। उन्होंने ही धरना स्थल से दिल्ली कूच का एलान किया था। सुबह से आरोपों के वार झेल रहे भानु गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह को मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखना पड़ा।
पिता ने बिगाड़ा तो बेटे ने संभाला आंदोलन
धरना स्थल पर चर्चा थी कि शनिवार रात को चिल्ला बॉर्डर खोले जाने की सहमति देकरभानु प्रताप सिंह ने आंदोलन को पटरी से उतार दिया, लेकिन इससे नाराज उनके बेटे व प्रदेशाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। इसके बाद कार्यकर्ताओं में विश्वास जगा। हालांकि, कार्यकर्ता उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं मानें।
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मंत्रियों से मुलाकात के बाद बिगड़ा खेल
संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि शनिवार शाम रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात के बाद ही पूरा खेल बिगड़ गया। इस्तीफा दे चुके राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी दिल्ली में आयोजित बैठक में जाना चाहते थे, लेकिन पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सीमा तय होने के कारण उन्हें नहीं ले जाया गया। इससे नाराज होकर इस्तीफों का दौर शुरू हो गया।
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नोएडा (योगेश शर्मा)। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली घेरने निकले किसान अब अपने ही नेताओं की आपसी खींचतान में उलझते दिख रहे हैं। किसान संगठनों के बीच वार-पलटवार का खेल शुरू हो गया है। गाजीपुर से लेकर चिल्ला बॉर्डर तक इसकी झलक दिखाई देने लगी है। मंगलवार को चिल्ला बॉर्डर पर किसान आंदोलन के 15वें दिन कृषि कानून से ज्यादा संगठन में गुटबाजी की चर्चा जोरों पर रही। आरोप-प्रत्यारोप के बीच किसान अपने मुद्दों से भटके नजर आए। संगठन में लगी इस्तीफों की झड़ी को ‘चौधराहट’ की लड़ाई से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, सोमवार सवेरे ही गाजीपुर बॉर्डर से राकेश टिकैत गुट ने भानु प्रताप गुट पर गुगली फेंककर संगठन में खलबली मचा दी थी। दोपहर नहीं हो पाई थी कि कोर कमेटी की सहमति के बिना फैसला लिए जाने के विरोध में भानु गुट के एक धड़े ने इस्तीफों की लंबी फेहरिस्त जारी कर दी। राष्ट्रीय महासचिव के पद पर रहे बेगराज गुर्जर ने बाकायदा वीडियो जारी कर अपनी और अपने साथियों की कुंठा का इजहार कर दिया। उन्होंने ही धरना स्थल से दिल्ली कूच का एलान किया था। सुबह से आरोपों के वार झेल रहे भानु गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह को मीडिया के सामने आकर अपना पक्ष रखना पड़ा।
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पिता ने बिगाड़ा तो बेटे ने संभाला आंदोलन
धरना स्थल पर चर्चा थी कि शनिवार रात को चिल्ला बॉर्डर खोले जाने की सहमति देकरभानु प्रताप सिंह ने आंदोलन को पटरी से उतार दिया, लेकिन इससे नाराज उनके बेटे व प्रदेशाध्यक्ष योगेश प्रताप सिंह ने भूख हड़ताल पर बैठ गए थे। इसके बाद कार्यकर्ताओं में विश्वास जगा। हालांकि, कार्यकर्ता उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करते रहे, लेकिन वह नहीं मानें।
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मंत्रियों से मुलाकात के बाद बिगड़ा खेल
संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि शनिवार शाम रक्षामंत्री राजनाथ सिंह व कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात के बाद ही पूरा खेल बिगड़ गया। इस्तीफा दे चुके राष्ट्रीय स्तर के वरिष्ठ पदाधिकारी दिल्ली में आयोजित बैठक में जाना चाहते थे, लेकिन पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सीमा तय होने के कारण उन्हें नहीं ले जाया गया। इससे नाराज होकर इस्तीफों का दौर शुरू हो गया।