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सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामला : एसआईटी जांच से खुलेगी भ्रष्ट अधिकारियों की पोल
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नोएडा। शासन की ओर से गठित एसआईटी जांच से नोएडा प्राधिकरण के भ्रष्ट अधिकारियों की पोल खुलेगी। सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट मामले में चार सदस्यीय एसआईटी की टीम के सोमवार को नोएडा आने की संभावना है। जांच रिपोर्ट सात दिनों में शासन को देनी है। इसके बाद दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ एसआईटी की ओर से एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
शासन की ओर से एसआईटी की चार सदस्यीय टीम में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, अपर पुलिस महानिदेशक राजीव सब्बरवाल और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनूप कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं। इस कमेटी में एक-एक क्षेत्र के विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है जो मामले की जांच करेंगे। एसआईटी की जांच सहयोग के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से फाइलें आदि निकालकर पहले से बेस तैयार किया जा रहा है। इस बाबत शनिवार को भी कुछ विभाग खुले रहे। इसमें संबंधित अधिकारियों की एक सूची तैयार हो रही है जो कि एसआईटी की टीम को दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जिन-जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। उन-उन बिंदुओं पर फाइलों में जांच होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कहां-कहां नियमों का उल्लंघन किया गया है और किन-किन शर्तों का उल्लंघन हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि फाइलों के आधार पर दोषियों की पहचान करने में समय लग सकता है। उनका तर्क यह है कि अगर 2004 से फाइलों की जांच की जाती है तो इसमें समय लगेगा, क्योंकि उस दौरान वर्तमान समय में व्यवस्थित तरीके से विभाग नहीं बंटे थे। अगर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों की पहचान करनी होगी तो उस समय वर्क सर्किल व्यवस्था भी नहीं थी। नियोजन विभाग में भी एक कमेटी के माध्यम से नक्शा पास होता था। कई बार चीफ आर्किटेक्ट ऑफ प्लानर (सीएपी) की जगह प्रभारी से काम लिया जाता था। अब उनकी कितनी पावर थी। यह सब जांच में देखा जाएगा। लिहाजा, इस काम में थोड़ा मुश्किल है, लेकिन इसेे आसान बनाने के लिए प्राधिकरण काफी मशक्कत कर रहा है।
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मुकेश गोयल का बोर्ड प्राधिकरण में अब भी
नियोजन विभाग में प्रबंधक मुकेश गोयल के चैंबर के बाहर लगा बोर्ड अभी भी नहीं हटाया गया है, जबकि गोयल को प्राधिकरण से काफी पहले रिलीव कर दिया गया है। मुकेश निलंबित हैं और उन्हें गीडा में अटैच किया गया है। प्राधिकरण की ओर से इस पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया।
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शासन की ओर से एसआईटी की चार सदस्यीय टीम में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, अपर पुलिस महानिदेशक राजीव सब्बरवाल और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनूप कुमार श्रीवास्तव शामिल हैं। इस कमेटी में एक-एक क्षेत्र के विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है जो मामले की जांच करेंगे। एसआईटी की जांच सहयोग के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से फाइलें आदि निकालकर पहले से बेस तैयार किया जा रहा है। इस बाबत शनिवार को भी कुछ विभाग खुले रहे। इसमें संबंधित अधिकारियों की एक सूची तैयार हो रही है जो कि एसआईटी की टीम को दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जिन-जिन बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं। उन-उन बिंदुओं पर फाइलों में जांच होगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कहां-कहां नियमों का उल्लंघन किया गया है और किन-किन शर्तों का उल्लंघन हुआ है।
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सूत्रों का कहना है कि फाइलों के आधार पर दोषियों की पहचान करने में समय लग सकता है। उनका तर्क यह है कि अगर 2004 से फाइलों की जांच की जाती है तो इसमें समय लगेगा, क्योंकि उस दौरान वर्तमान समय में व्यवस्थित तरीके से विभाग नहीं बंटे थे। अगर इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों की पहचान करनी होगी तो उस समय वर्क सर्किल व्यवस्था भी नहीं थी। नियोजन विभाग में भी एक कमेटी के माध्यम से नक्शा पास होता था। कई बार चीफ आर्किटेक्ट ऑफ प्लानर (सीएपी) की जगह प्रभारी से काम लिया जाता था। अब उनकी कितनी पावर थी। यह सब जांच में देखा जाएगा। लिहाजा, इस काम में थोड़ा मुश्किल है, लेकिन इसेे आसान बनाने के लिए प्राधिकरण काफी मशक्कत कर रहा है।
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मुकेश गोयल का बोर्ड प्राधिकरण में अब भी
नियोजन विभाग में प्रबंधक मुकेश गोयल के चैंबर के बाहर लगा बोर्ड अभी भी नहीं हटाया गया है, जबकि गोयल को प्राधिकरण से काफी पहले रिलीव कर दिया गया है। मुकेश निलंबित हैं और उन्हें गीडा में अटैच किया गया है। प्राधिकरण की ओर से इस पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया।