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ऑनलाइन पोर्टल बंद, कैसे पता करें बेड की उपलब्धता
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नोएडा (नेहा शर्मा)। खाली बेड को लेकर निजी अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने ऑनलाइन पोर्टल लांच किया था। इस पर घर बैठे एक क्लिक पर कोविड अस्पताल, खाली आईसीयू, वेंटिलेटर और ऑक्सीजन समेत सामान्य बेड की जानकारी जरूरतमंद लोग ले रहे थे। इसमें कोविड अस्पतालों की गूगल मैप से लोकेशन और फोन नंबर भी दिए गए थे, लेकिन अब ये वेबसाइट कई दिनों से बंद है। इस वजह से लोगों को घर बैठे खाली बेड की जानकारी नहीं मिल पा रही है। अब कॉल सेंटर पर फोन करने निजी अस्पतालों के नंबर दे दिए जा रहे हैं। इस संबंध में पहले तो स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया कि निजी अस्पताल प्रशासन खुद से वेबसाइट पर बेड की उपलब्धता की जानकारी अपलोड करते हैं। बाद में कहा कि इसे निजी ऑपरेटर संभाल रहे हैं।
दरअसल, अप्रैल में कोविड मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई थी। अस्पतालों में ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए मारामारी होने लगी थी। उस दौरान मरीजों का आरोप था कि निजी अस्पताल मनमानी पर उतर आए हैं। पैसों के चक्कर में आईसीयू और वेंटिलेटर बेड भरे हुए बता रहे है। इस वजह से कई मरीजों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। 29 अप्रैल को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर https://gbncovidtracker.in लांच किया था। इस पर घर बैठे अस्पताल में खाली बेड की सूचना मिल रही थी। इसमें अलग-अलग वर्ग बनाए गए थे, जिसमें बताया गया था कि अस्पताल में कुल कितने बेड हैं, कितने ऑक्सीजन, आईसीयू और कितने वेंटिलेटर के बेड खाली हैं। अब जब जिले में कोविड के केस थोड़े कम होने शुरू हुए हैं तो लापरवाही शुरू कर दी गई है। अब ये वेबसाइट चल ही नहीं रही है। एडिशनल सीएमओ डॉ. सुनील दोहरे ने बताया कि निजी अस्पताल खुद से वेबसाइट पर डाटा अपलोड करते थे। ये वेबसाइट प्राइवेट ऑपरेशन द्वारा संचालित की जा रही थी।
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दरअसल, अप्रैल में कोविड मरीजों की संख्या बढ़नी शुरू हो गई थी। अस्पतालों में ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर के लिए मारामारी होने लगी थी। उस दौरान मरीजों का आरोप था कि निजी अस्पताल मनमानी पर उतर आए हैं। पैसों के चक्कर में आईसीयू और वेंटिलेटर बेड भरे हुए बता रहे है। इस वजह से कई मरीजों ने इलाज के अभाव में दम तोड़ दिया था। 29 अप्रैल को प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने मिलकर https://gbncovidtracker.in लांच किया था। इस पर घर बैठे अस्पताल में खाली बेड की सूचना मिल रही थी। इसमें अलग-अलग वर्ग बनाए गए थे, जिसमें बताया गया था कि अस्पताल में कुल कितने बेड हैं, कितने ऑक्सीजन, आईसीयू और कितने वेंटिलेटर के बेड खाली हैं। अब जब जिले में कोविड के केस थोड़े कम होने शुरू हुए हैं तो लापरवाही शुरू कर दी गई है। अब ये वेबसाइट चल ही नहीं रही है। एडिशनल सीएमओ डॉ. सुनील दोहरे ने बताया कि निजी अस्पताल खुद से वेबसाइट पर डाटा अपलोड करते थे। ये वेबसाइट प्राइवेट ऑपरेशन द्वारा संचालित की जा रही थी।
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